Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia
Advertiesment

सबसे गरीब उम्मीदवारों में शामिल है यह अभिनेता, पास है सिर्फ 1000, इस तरह लड़ रहा है चुनाव

हमें फॉलो करें सबसे गरीब उम्मीदवारों में शामिल है यह अभिनेता, पास है सिर्फ 1000, इस तरह लड़ रहा है चुनाव
इंदौर , गुरुवार, 16 मई 2019 (07:56 IST)
इंदौर। अगर उनके चुनावी हलफनामे पर यकीन किया जाए, तो हिन्दी फिल्मों और टीवी विज्ञापनों में छोटे-मोटे रोल निभा चुके जॉनी करण मौजूदा लोकसभा चुनावों में देश के सबसे गरीब उम्मीदवारों की फेहरिस्त में शामिल हैं।
 
मध्यप्रदेश की खरगोन लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में किस्मत आजमा रहे करण (41) ने इस हलफनामे में खुद को केवल 1,000 रुपए का मालिक बताया है। यह रकम उनके उस बैंक खाते में जमा है जो उन्होंने चुनाव के खर्चों का हिसाब देने के लिए नियमानुसार खुलवाया है। हलफनामे के मुताबिक उनके एक अन्य बैंक खाते में शून्य रुपए जमा हैं। 
 
बी. कॉम. तक पढ़े करण ने अपने चुनावी हलफनामे में खुद को पेशे से कृषि मजदूर और सामाजिक कार्यकर्ता बताया है। हलफनामे के मुताबिक उनके पास निजी मिल्कियत का न तो कोई वाहन है, न ही जेवरात। उनके पास खेत, मकान और जमीन जैसी एक भी अचल संपत्ति नहीं है। बहरहाल, सरकारी अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि 11 मई तक की स्थिति के मुताबिक करण द्वारा चुनाव में 12,500 रुपए खर्च किए जा चुके हैं।
 
यह पूछे जाने पर कि चुनावी हलफनामे में बताई गई भारी तंगहाली के बावजूद उन्होंने इस रकम का इंतजाम किस तरह किया, 41 वर्षीय अभिनेता ने जवाब में दावा किया कि वह अपने समर्थकों से रकम उधार लेकर चुनाव लड़ रहे हैं।
 
करण ने कहा, 'अगर मेरे पास पर्याप्त धन होता, तो मैं भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों को अपेक्षाकृत मजबूत चुनावी टक्कर दे सकता था।'
 
खरगोन सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। पश्चिमी मध्यप्रदेश के खरगोन और बड़वानी जिलों में फैली इस सीट पर हालांकि कुल सात उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला भाजपा प्रत्याशी गजेंद्र सिंह पटेल और कांग्रेस प्रत्याशी गोविंद मुजाल्दा के बीच होना है। खरगोन क्षेत्र के 18.34 लाख मतदाता 19 मई को होने वाले चुनाव में उम्मीदवारों का भविष्य तय करेंगे। (भाषा) 

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

चुनाव प्रचार का समय कम करने से ममता नाराज, मोदी-शाह के निर्देश पर हुआ यह फैसला