Publish Date: Sun, 12 Apr 2009 (14:34 IST)
Updated Date: Sun, 12 Apr 2009 (14:34 IST)
भाजपा के शीर्ष पुरुष और देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के चुनावी राजनीति से संन्यास लेने के निर्णय के बाद हो रहे पहले लोकसभा चुनाव में उनकी लखनऊ लोकसभा सीट पर कब्जे के लिए प्रदेश की राजनीति में प्रभावी सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच दिलचस्प मुकाबले की संभावना है।
वर्ष 1991 से लेकर अब तक लगातार पाँच बार वाजपेयी को लोकसभा भेजने वाली प्रतिष्ठापूर्ण लखनऊ सीट के लिए हो रहे चुनावी समर में भाजपा के साथ ही समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस के उम्मीदवारों को लेकर कुल 56 उम्मीदवार मैदान में हैं।
राजनीतिक प्रेक्षक अपने-अपने तकों के साथ हालाँकि मुख्य मुकाबला वाजपेयी के अति करीबी समझे जाने वाले भाजपा उम्मीदवार लालजी टंडन और बसपा उम्मीदवार पूर्व केन्द्रीय मंत्री अखिलेश दास गुप्ता के बीच मान रहे हैं, मगर कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष डॉ रीता बहुगुणा जोशी की लगभग अंतिम क्षणों मे घोषित उम्मीदवारी और सपा की तरफ से पूर्व मिस इंडिया नफीसा अली की उम्मीदवारी ने इस चुनाव को खासा दिलचस्प बना दिया है।
भाजपा उम्मीदवार लालजी टंडन के पक्ष में उन्हें स्वयं अटलजी का आशीर्वाद प्राप्त होने और उनके खाटी लखनऊवा होने के तर्क दिए जा रहे हैं। टंडन वर्तमान में लखनऊ पश्चिम सीट से विधायक हैं और लंबे समय तक प्रदेश के नगर विकास मंत्री रह चुके हैं।
अटलजी के चुनाव लड़ने अथवा नहीं लड़ने की चर्चाओं के दौर में भी वे कहते रहे हैं अटलजी लड़ें अथवा नहीं यह सीट उन्हीं के नाम रहेगी। हम उनकी तस्वीर को सामने रखकर उनकी विरासत को अक्षुण्ण रखेंगे।
टंडन का कहना है लखनऊ अटलजी की कर्मभूमि रही है और उन्होंने लखनऊ संसदीय क्षेत्र के विकास के लिए बहुत कुछ किया है। मुझे विश्वास है कि लखनऊ की जनता मेरी जीत सुनिश्चित करेगी क्योंकि वह वस्तुत: अटलजी की जीत होगी।
बसपा ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री अखिलेश दास गुप्ता के लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व कांग्रेस छोड़कर पार्टी में आने के बाद उन्हें लखनऊ से पार्टी का उम्मीदवार बनाने की घोषणा कर दी थी और वे तभी से चुनाव की तैयारी मे लगे हुए हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री स्व बनारसी दास के पुत्र अखिलेश का लखनऊ से पुश्तैनी रिश्ता है, वे लखनऊ के मेयर भी रह चुके हैं। उनके बारे में दिलचस्प जानकारी यह भी है कि पिछले लोकसभा चुनाव में उन्हें कांग्रेस ने लखनऊ का उम्मीदवार बनाया था, मगर बाद में तब वाजपेयी के विरुद्ध मैदान में उतरे निर्दलीय उम्मीदवार राम जेठमलानी के पक्ष मे कांग्रेस ने उन्हें मैदान से हटा लिया था।
वर्तमान में राज्यसभा सांसद अखिलेश दास लखनऊ की राजनीति में सक्रिय दखल रखते रहे हैं और उनकी नजर बहुत पहले से लखनऊ लोकसभा सीट पर लगी रही है। वे शहर मेयर के बीते चुनाव में मंजूर अहमद को चुनाव लड़वा चुके हैं, जो दो लाख से अधिक वोट पाकर दूसरे नम्बर पर रहे थे।
बहुत पहले ही पार्टी की तरफ से उम्मीदवार घोषित कर दिए गए अखिलेश दास ने मतदाताओं को लुभाने के लिए होली, दीवाली और ईद के त्यौहारों का भरपूर उपयोग किया है। उनका दावा है कि मेरे पक्ष में लहर है। लोग यह मानते हैं कि मैं ही इस संसदीय क्षेत्र का विकास सुनिश्चित कर सकता हूँ।
राजनीतिक प्रेक्षक हालाँकि लखनऊ की लड़ाई को भाजपा बसपा के बीच मानते हैं। मगर ऐन मौके पर कांग्रेस की तरफ से मैदान मे उतरीं पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रीता बहुगुणा जोशी और संजय दत्त को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिलने के बाद उम्मीदवार बनीं नफीसा अली की उम्मीदवारी से चुनाव दिलचस्प हो उठा है।
पूर्व मुख्यमंत्री और अपने समय में कांग्रेस के साथ ही देश के कद्दावर नेताओं में शुमार रहे स्व. हेमवती नन्दन बहुगुणा की पुत्री डॉ. रीता बहुगुणा जोशी हालाँकि फूलपुर अथवा इलाहाबाद से चुनाव लड़ना चाहती थीं, मगर पार्टी ने अचानक उन्हें लखनऊ सीट से उम्मीदवार बना दिया।
पार्टी ने उन्हें बिना किसी पूर्व योजना के लखनऊ से चुनाव मैदान मे उतार दिया है इसके बावजूद उन्हें भरोसा है कि वे कांग्रेस की पुरानी विरासत कांग्रेसनीत संप्रग सरकार के कामकाज और सबसे बढ़कर अपने स्व. पिता की ख्याति के बल पर यहाँ जीत दर्ज करेंगी।
वाजपेयी के विरुद्ध कभी राजबब्बर तो कभी अपने समय की लोकप्रिय फिल्म उमराव जान के निर्देशक मुजफ्फर अली को मुकाबले में उतार कर लखनऊ पर कब्जा करने की लड़ाई लड़ चुकी सपा वाजपेयी की अनुपस्थिति में सिने अभिनेता संजय दत्त के बूते लखनऊ जीतना चाहती थीं, पर सर्वोच्च न्यायालय से उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति न मिलने के कारण उसे अपना निर्णय बदलना पड़ा है। अब पार्टी ने पूर्व मिस इंडिया और सामाजिक कार्यकर्ता नफीसा अली को चुनाव मैदान मे उतारा है, जो सपा उम्मीदवार बनने से पहले कांग्रेस मे थीं।
वे कोलकाता दक्षिण सीट पर तृणमूल कांग्रेस की फायर ब्रांड नेत्री ममता बनर्जी के विरुद्ध पिछला लोकसभा चुनाव भी लड़ चुकी हैं और इस बार लखनऊ से कांग्रेस का ही टिकट चाहती थीं।
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