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वरुण गाँधी पैरोल पर रिहा

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सुप्रीम कोर्ट
पीलीभीत लोकसभसीभाजपा के उम्मीदवार वरुण गाँधी दो सप्ताह के लिए गुरुवार शाम एटा जेल से पैरोल पर रिहा हो गए। उच्चतम न्यायालय ने उन्हें दिन में सशर्त राहत देते हुए रिहा करने का आदेश दिया था। इससे पहले वरुण ने जेल अधिकारियों को इस आशय का शपथ पत्र दिया कि वे भड़काऊ भाषण नहीं देंगे।

उच्चतम न्यायालय ने रासुका के तहत हिरासत में लिए गए 29 वर्षीय वरुण को यह कहते हुए रिहा किया है कि पैरोल पर रिहा होने के दौरान वे किसी समुदाय धर्म या नस्ल के खिलाफ भाषण नहीं देंगे और न ही सार्वजनिक शांति भंग करेंगे।

प्रधान न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि तथ्यों और परिस्थितियों के मद्देनजर हम उन्हें इस शर्त पर दो सप्ताह के लिए पैरोल पर रिहा कर रहे हैं कि वे एटा जेल के अधीक्षक को यह शपथ पत्र देंगे कि वे पैरोल के दौरान ऐसा कोई भाषण नहीं देंगे, जिससे सांप्रदायिक माहौल बिगड़ता हो और लोगों के बीच वैमनस्य फैलता हो।

पीठ में शामिल न्यायमूर्ति पी. सदाशिवम और न्यायमूर्ति जेएम पांचाल ने कहा कि पेरोल पर रिहा रहने के दौरान वरुण जनभावनाओं को नही भड़काएँगे। उन्होंने कहा कि वरुण को पीलीभीत जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष 50,000 रुपए का निजी मुचलका और इतनी ही राशि की दो जमानतें देना होंगी।

वरुण की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने उच्चतम न्यायालय की पीठ को जेल से भेजा गया भाजपा नेता के हस्ताक्षरयुक्त एक शपथ पत्र पेश किया। इस शपथ पत्र को उच्चतम न्यायालय के 13 अप्रैल को दिए पिछले आदेश के अनुपालन में पेश किया गया।

हालाँकि उत्तरप्रदेश के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने शपथ पत्र पेश किए जाने के तरीके पर आपत्ति जताई और कहा कि उन्हें शपथ पत्र की प्रतिलिपि प्राप्त नहीं हुई है और यह मामला संवेदनशील प्रकृति का है।

वरुण के शपथ पत्र से असंतुष्ट पीठ ने भी कहा कि शपथ पत्र की सामग्री उनकी इच्छानुसार नहीं हो सकती। पीठ ने कहा कि हम शपथपत्र का वह प्रारूप देंगे, जिसे वरुण को दाखिल करना होगा।

पीठ ने कहा कि यह पर्याप्त नहीं है। आपको यह बताना चाहिए कि आप किस प्रकार का शपथ पत्र सौंप रहे हैं। साल्वे ने कहा कि प्रशासन का यह मानना है कि वे सार्वजनिक शांति के लिए अब भी एक खतरा है।

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