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दिल जो न कह सका

जरूरी है समय पर मन की बात कहना

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लवमंत्र
मानसी
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हलो दोस्तो! पूरी दुनिया हमें यह अहसास कराती रहती है कि हम भारतीय बहुत ज्यादा बोलते हैं। मोबाइल फोन कंपनियों ने भी अपने अनेक अध्ययन में पाया कि हम भारतीयों का बक-बक करने में जवाब नहीं। जब तमाम तरह के अध्ययनों से यह तथ्य साबित किया जा रहा है तो वाकई भारतीय ज्यादा बोलते होंगे। यूँ तो पुरुष यही प्रचार करते रहते हैं कि औरतें ही बातूनी मशीन हैं पर इस सच्चाई से भी पुरुषों को एतराज नहीं होना चाहिए कि मोबाइल या अन्य प्रकार की फोन सुविधा जितनी पुरुषों को है उतनी महिलाओं को नहीं है। मतलब भारतीय पुरुषों को भी बातें करने में महारत हासिल है ।

फिर क्या कारण है कि जब महत्वपूर्ण बातें उन्हें करनी होती हैं तो नहीं कर पाते हैं, खासकर महिलाओं के साथ, महिलाओं से संबंधित। अंग्रेजी के एक निहायत बुजुर्ग (उम्र के लिहाज से) नामचीन लेखक ने एक बार अपने कॉलम में लिखा कि आज जब मैं कई महिलाओं को उन पर आए क्रश के बारे में बताता हूँ तो वे ये कहती हैं कि काश 50 या 60 वर्ष पहले कहा होता क्योंकि मेरे दिल में भी वही जज्बा था। मैं भी तुम्हें देखकर तड़प जाती थी। लेखक ने उन महिलाओं के सवाल पर लिखा कि मैं डरता था कि पता नहीं तुम्हारा क्या जवाब या प्रतिक्रिया हो। आगे लिखते हैं, अब मलाल करने के सिवाय चारा भी क्या है। सच अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत।

पर आश्चर्यजनक रूप से आज भी लाखों, करोड़ों नौजवानों की श्रीमान लेखक जैसी ही दशा है। शायद वे भी 30-40 वर्ष बाद अपनी क्रश से नहीं बल्कि किसी और के सामने अपने दिल में दबी बात को जुबाँ पर लाते हुए मिल जाएँ। बड़े लेखकों की बड़ी बात होती है। उनकी मित्र मंडली अंतिम समय तक गाहे-बगाहे मिलती-जुलती रह सकती है पर बेचारे आम नौजवान की क्रश इस दुनिया की भीड़ में कहाँ गुम हो जाएगी कौन जाने।

दरअसल, भारतीय पुरुष यूँ तो अपनी बहादुरी एवं जवाँमर्दी की खूब डींगे मारते हैं। उनकी बातें सुनो तो दफ्तर व धंधे में उससे बड़ा तीसमार खाँ कोई नहीं है। कई को तो अपने ज्ञान पर इतना घमंड होता है कि औरतों का सही लिखा हुआ भी उन्हें गलत दिखाई देता है। लड़कियों के सामने जब वे थोथे आत्मविश्वास से भरकर हाँकते हैं तो ऐसा लगता है मानो भेजे से अकल उबाल मारकर बाहर निकल आएगी पर बेचारे सामने वाली को ये नहीं बता पाते कि तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो। मुझ पर रहम करो। पूरा समय या तो बेकार की बातों या जरूरत से ज्यादा काम की बातों में निकल जाता है और समय के साथ ही देखते ही देखते लड़की भी वहाँ से निकल जाती है।

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तब बेचारे, संकोच के मारे यही सोचते रहते हैं काश कोई ऐसी मशीन होती जो दिल की बात उस तक बिना बोले पहुँचा देती। पर सदियों से चले आ रहे नाकाम सैदाइयों को कौन बताए कि न तो ऐसी मशीन बनी है और न ही आने वाले वर्षों में इसकी ईजाद की कोई आशा है। बेहतर यही है कि आप थोड़ा हौसला बढ़ाएँ और अपनी पसंद के सामने अपनी जुबान खोल दें। शायद भारतीय मर्दों के इसी दर्द को एक मुंबइया फिल्म में बयान किया गया है।

'हौसला और करो, मुँह से कहते न डरो, दिल न तोड़ेंगे अपना वादा है।' फिल्मों में तो बड़ी आसानी से हीरो-हीरोइनें अपना हाले दिल गाकर बयान कर डालते हैं पर वास्तविक जीवन में ये बेचारे नौजवान कैसे अपनी बात रखें ।

ज्यादातर पत्र इसी मसले को लेकर होते हैं कि निजीपन लिए संवाद कैसे शुरू किए जाएँ। हिंदी भाषी लड़के-लड़कियों के सामने तो ये समस्याएँ और भी गंभीर रूप लेकर खड़ी हो जाती हैं। लड़कों को लगता है कि कहीं लड़की की या उसके पोशाक की तारीफ कर दी और लड़की ने बुरा मान लिया तो उसकी शराफत पर ही सवालिया निशान लग जाएगा। दोस्ती की भी बलि चढ़ी सो अलग। लड़कों का डर भी बेजा नहीं लगता है क्योंकि अक्सर लड़कियाँ सहजता से मना करने के बजाय कुछ ज्यादा ही हल्ला-गुल्ला मचाने लगती हैं।

बातचीत बंद कर देना अपने परिवार और दोस्तों में बताना व मजाक उड़ाना सचमुच किसी भी लड़के को शर्मिंदगी में डाल सकता है। अब कोई बिल्कुल ही मजनुँओं वाली हरकतें करे तो उससे सावधान रहना या खौफ खाना तो सही है पर छोटी सी बात का बतंगड़ बना देना कि मुझे ऐसी-वैसी लड़की मत समझना, मैं बड़ी चरित्रवान हूँ, ऐसी हालत में बेचारे लड़कों की शामत ही आ जाती है।

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किसी भी लड़की को करीब से जानने का एक ही तरीका है कि पहले उससे आम बातचीत करनी चाहिए। उसे जानने के लिए साधारण दोस्त बनने की जरूरत है। रोजाना के कामकाज से सबंधित संवाद बनाना चाहिए। शालीनता के साथ उसके साथ पेश आना चाहिए। यदि उसके प्रति आपके दिल में इज्जत है तो वह आपकी बातों और व्यवहार से भी झलक जाएगा जो आपकी दोस्ती को मजबूत करने में सहायक होगा।

समय के साथ-साथ यही दोस्ती प्यार के इजहार का साहस भी जरूर देगी। जल्दबाजी में केवल औपचारिक सी शादी होती है जिसमें सबकुछ बाहरी तौर पर जोड़-घटाव किया जाता है। जात-पात, खानदान, नौकरी, रंग-रूप, शिक्षा मैच कर गया शादी कर लो। प्रेम के लिए एक-दूसरे को समझने, पसंद करने की जरूरत होती है। इसलिए धैर्य रखें। लड़के-लड़कियों को समाज में अलग-अलग रखने के कारण दोनों ही एक-दूसरे को सशंकित ढंग से देखते हैं पर भरोसा रखें, दोनों मनुष्य हैं और यकीन मानें दोनों लगभग एक ही जैसा सोचते हैं।

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