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प्यार को कभी भूलना भी जरूरी

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रोमांस
- मानसी

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हैलो दोस्तो ! सच्चे अपनेपन से बड़ा अहसास और कोई नहीं होता। आप दुनिया के किसी कोने में हों, यदि आपको यह भरोसा हो कि कोई आपकी सलामती की दुआ करता है, आपके इंतजार में है और आपसे मिलने को बेचैन है तो आप अकेले होकर भी अकेले नहीं होते। आप अपने अंदर सुकून महसूस करते हैं और दिल लगाकर अपना काम पूरा करने में लग जाते हैं ताकि अपने साथी से जब मिलें तो पूरे संतोष के साथ मिलें लेकिन यदि कोई किसी का इंतजार करने से इनकार कर दे तो निश्चित ही यह दिल तोड़ने वाली बात होगी।

ऐसी ही स्थिति में हैं अजय (नाम बदला हुआ) जो शिप पर सेकेंड इंजीनियर हैं। अजय और उनकी दोस्त एक जाति के नहीं हैं। पहले तो इनमें खूब प्यार था पर धीरे-धीरे अजय की दोस्त को लगने लगा कि यह प्यार शादी में नहीं बदल सकता। उसने अजय को सलाह दी कि वह इस प्रेम को भूल जाएँ पर अजय हैं कि चाहे वह कहीं भी हों वहाँ से अपनी दोस्त को फोन करते हैं पर दोस्त बात तक नहीं करती। अजय के लिए इस प्यार को भुलाना मुश्किल हो रहा है।

अजय जी आपने पूछा है आप क्या करें? दरअसल, आप कुछ कर ही नहीं सकते हैं। आप तो प्यार कर ही रहे हैं। रिश्ता तोड़ने का फैसला तो आपकी दोस्त ले रही हैं। आप चाहें न चाहें, आपको उस फैसले को मानना ही है। चाहें तो एकतरफा प्यार करें पर उसकी क्या तुक है। अपनी दोस्त के बारे में कोई दुर्भावना रखने के बजाय उसे माफ करते हुए जीवन में आगे बढ़ जाना ही उचित होगा। अपनी दोस्त के मुँह फेर लेने से आपके प्यार भरे दिल को ठेस जरूर पहुँची है पर यदि आप उसके दृष्टिकोण का विश्लेषण करें तो शायद आपका दुख और क्रोध कम हो जाए और उसका फैसला कुछ हद तक जायज लगे। पुरानी मान्यताओं के कारण संभव है कि अलग जाति की वजह से दोनों ही परिवार इस शादी का वैसा स्वागत न करें जैसा अपनी जाति के रिश्तों में करते हैं। आप तो ज्यादा वक्त जहाज पर रहते हैं।

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ऐसे में उस अकेली को यहाँ सहयोग करने वाला कौन रहेगा? जीवन में हर कदम पर समाज और परिवार की मदद की जरूरत पड़ती है। आप दोनों साथ-साथ होते तो शायद वह परिवार वालों की नाराजगी झेलने का साहस जुटा पाती। पर, भविष्य में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों से वह घबरा गई है। यूँ प्यार करने वालों से यही उम्मीद की जाती है कि वे जोखिम उठाने का दमखम रखें पर अपना जो सामाजिक ढांचा है वहाँ प्यार में कोई चैन सुकून से जी सके ऐसा बहुत ही मुश्किल है। आपकी दोस्त जानती है कि समय पड़ने पर मदद करने के बजाय लोग ताना कसने में जुट जाएँगे। उन सबकी कल्पना से ही वह विचलित हो गई होगी।

खैर ! बेहतर तो यही होता कि आप दोनों एक होते पर समय रहते ही उसके मन का सही द्वंद्व सामने आ गया, इसे आप बढ़िया संकेत समझें वरना शादी के बाद यह समस्या बेहद जटिल हो जाती और तब मनमुटाव-तकरार आपके जीवन का बहुत बड़ा भाग छीन लेता। अभी आपके हिस्से में बड़ा भाग खूबसूरत यादों का है। उसे संभालते हुए दूसरे साथी की तलाश में जुट जाएँ। जब कोई अपनी जुबान से अलग होने का प्रस्ताव रखता हो तो उसे प्यार से विदा कर देना चाहिए। प्यार दो दिलों का मेल होता है। जबर्दस्ती या रोना रोकर तो आप किसी को नहीं रोक सकते न। प्यार में विवशता नहीं होनी चाहिए। प्यार आजादी का दूसरा नाम है। रिश्ते में कई बार इतनी गहराई नहीं होती है कि वे एक-दूसरे से सारी बातें शेयर करें। सामने वाले को यह भरोसा नहीं होता है कि वह जो कुछ बताएगा उसे उसका साथी उसी भावना से समझ पाएगा,आत्मसात कर पाएगा इसलिए जोड़े काफी समय तक एक-दूसरे से छोटी-छोटी बातें भी छुपाते हैं। इस छुपाने को कई लोग इतनी गंभीरता से लेते हैं कि रिश्ते ही टूट जाते हैं।

ऐसी ही एक समस्या है गुड़िया की जो लता की दोस्त हैं। लता ने लिखा है कि उनकी दोस्त गुड़िया ने अपने प्रेमी हेम को एक एसएमएस देखने नहीं दिया। हेम को जब एसएमएस जानने वाले के बारे में पता चला तो दोनों में झड़प हो गई। जहाँ हेम को एसएमएस पर आपत्ति थी वहीं गुड़िया को उसके मोबाइल के मामले में हस्तक्षेप करने के मामले में। एक साल से चल रहा प्रेम-प्रसंग इस एक बात पर टूट गया।

कई महीनों की चुप्पी के बाद अब गुड़िया ने नया मोबाइल नंबर ले लिया है। लता पूछती हैं कि क्या गुड़िया फिर से प्रेम के बारे में सोचे? मेरे खयाल से नहीं। आपसी समझदारी ही प्यार के रिश्ते को आधार देती है। और पुरानी घटना यही बताती है कि उन दोनों में आपसी समझदारी की कमी है। एक खास प्रकार का रिश्ता जी लेने के बाद केवल दोस्त बनकर एक-दूसरे को समझना भी बहुत परिपक्वता खोजता है जो कि हेम और गुड़िया में फिलहाल नजर नहीं आता। बेहतर है इस प्रसंग को भूल जाएँ।

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