प्यार में जरूरी है डिवोशन
प्यार क्या है? एक खूबसूरत एहसास जिसे डिफाइन करने के लिए लेखकों और कवियों ने शब्दों की कई नदियाँ बहाई हैं। फिर भी प्यार ऐसी खुशबू है, जो शब्दों के दायरे में नहीं बँधती। डेडिकेशन, सेल्फलेसनेस, म्युचुअल अंडरस्टेन्डिंग और मन के तारों के जुड़ाव से पैदा होता अफेक्शन और डिवोशन। यही भाव असल में सच्चे प्यार को स्वयं से गूँथे रखता है। इसकी किसी से तुलना नहीं। प्यार यानी एक ही डायरेक्शन सोचना सुमन की शादी तय हो चुकी थी। एक दिन बातों ही बातों में उसके भावी पति बोले, 'प्यार का अर्थ एक-दूसरे की ओर देखते रहना नहीं, बल्कि एक ही दिशा में देखना व सोचना है।' उनकी इस समझदारीभरी बात ने सुमन को अभिभूत कर दिया। सच ही तो है कि किसी भी विवाहित जोड़े को जब कई महत्वपूर्ण निर्णय लेने पड़ते हैं, तब उनके सोच की तारतम्यता उस निर्णय को आसान बना देती है। यह आपसी समझ ही दोनों को स्नेह के अटूट बंधन में बाँधती है।सब ढूँढते हैं सच्चा प्यार प्यार, जीवन की नाव को चलाने के लिए पतवार का काम करता है। यह सिर्फ कोरी भावनाओं पर नहीं टिकता, बल्कि समझदारी, ट्रस्ट और रिस्पेक्ट आधारित होता है। हम सब इसी सच्चे प्यार को अपने जीवन में खोजते हैं। प्रेम सिर्फ कल्पना, किताबों, उपन्यासों और फिल्मी पात्रों में सिमटी भावुकता नहीं है। प्रेम, इंसान के दिल की शुभ तरंगों से भरी वह अवस्था है, जब वह आंतरिक खुशी और प्रसन्नता से लबरेज हो जाता है।पारखी बनें हमारा प्यार हमारे पास ही होता है, लेकिन वह होता है फिल्मी अंदाज से बिलकुल जुदा। जब कोई पति अपनी बीमार पत्नी की देखभाल करता है, तब उसमें पत्नी के प्रति उसका प्यार ही छुपा होता है। वेलेन्टाइन-डे पर कार्ड, तोहफे और गुलाब भेंट कर देना ही प्यार नहीं है। प्यार तो परवाह, देखभाल, सहेजने और साथी का ध्यान रखने का नाम है। इसलिए जब साथी से यह देखभाल सहज ही मिल जाए तो उसे 'फॉर ग्रांटेड' न लें, उसके स्रोत को पहचानें।लुक मैटर नहीं करता मीनाक्षी एक बेहद खूबसूरत और पढ़ी-लिखी लड़की है। जब उसके लिए परेश के परिवार की ओर से विवाह प्रस्ताव आया तब उसने परेश की साँवली रंगत और सामान्य कद की वजह से उसे ठुकरा दिया। परेश की छवि उसके सपनों के राजकुमार से मेल जो नहीं खाती थी। मीनाक्षी की माँ अनुभवी थीं, उन्होंने दुनिया देखी थी। उन्होंने मीनाक्षी को समझाया, 'बेटा! रंग-रूप तो किसी के हाथों में नहीं होता। परेश एक गुणी लड़का है, नेक है। तू उसके गुण और काबिलियत देख।' मीनाक्षी ने माँ की बात पर गौर किया और परेश के साथ विवाह बंधन में बँध गई। कहना न होगा कि आज वह अपने जीवन से बहुत खुश और संतुष्ट है। सच्चे प्यार का अर्थ समझ चुकी है।प्यार सबसे मीठा एहसाससच्चा प्यार करने वाला और पाने वाला दोनों ही खुशनसीब होते हैं और आज के आपाधापी के दौर में खुशी का ठौर पा लेते हैं। प्यार की सौंधी खुशबू से जीवन की माटी महकने लगती है। तो हम भी अपने आसपास के रिश्तों में प्यार को तलाश लें। इसकी खुशबू अपने जीवन में बसाकर खुद भी महकें और अपने परिवेश को भी महकाएँ।