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रिश्ता तोड़ो तो मोह छोड़ो

... तो भावनात्मक रूप से भी दूर हो जाएँ

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रोमांस
मानस

NDND
हेलो दोस्तो! प्यार का रिश्ता इतना जटिल होता है कि जितनी सतर्कता इसे शुरू करने में बरतनी पड़ती है उतनी ही सावधानी इस रिश्ते से निकलने में भी करनी पड़ती है। भले ही रिश्ता तोड़ने का फैसला आपका हो फिर भी आप अनेक प्रकार की मानसिक पीड़ा से गुजरने लगते हैं। किसी रिश्ते से दामन झटकने के बाद भावनात्मक रूप से भी उससे दूर हो जाना बहुत जरूरी होता है।

अफसोस की बात यह है कि ज्यादातर मामले में खुद रिश्ता तोड़ने के बाद भी लोग उसी रिश्ते के पीछे लगे रहते हैं। इस प्रवृत्ति के कारण नए बनने वाले रिश्ते पर वह पूरी तरह ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं। कई बार इसी मानसिक दुविधा एवं अस्थिरता में दोनों ही रिश्ते समाप्त हो जाते हैं। किसी भी रिश्ते से मुँह मोड़ने के बाद उस रिश्ते के बारे में सोचना, उस साथी के बारे में पता करना, उसके संबंधों के बारे में तहकीकात करना बहुत ही घातक है। कई बार यह इतनी बड़ी मानसिक समस्या बन जाती है कि इस बीमारी से छुटकारा पाने के लिए मनोवैज्ञानिकों की शरण में जाना पड़ता है।

दरअसल रिश्ता तोड़ने वाला व्यक्ति अपनी मानसिक पीड़ा से खुद हैरान व परेशान हो जाता है। उसे समझ में नहीं आता है कि रिश्ता तोड़ने का फैसला भी उसी का था और उससे भी बड़ी यह बात है कि यह रिश्ता तोड़ते वक्त वह बहुत ही खुश था। फिर अचानक उसे उस रिश्ते के टूटने का गम क्यों सताने लगा? उस व्यक्ति के छूटने का दर्द क्यों सताने लगा। उसे समझ ही नहीं आता है कि उस व्यक्ति का भूत उसके सिर से क्यों नहीं उतर रहा है।

दोस्तो, जब कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति से अपना संबंध तोड़ता है तो वह यही सोचता है कि चलो इस संबंध से पीछा छूटा। एक बोझ सिर से उतरा क्योंकि दिमाग में यही बात बैठी रहती है कि उसे जितना इस रिश्ता में देना पड़ रहा था उतना उसे बदले में मिल नहीं रहा था। इसीलिए वह उस स्थिति से निकलने पर राहत महसूस करता है पर जब उसे यह पता चलता है कि उसके द्वारा ठुकराया हुआ व्यक्ति किसी और रिश्ते में बेहद खुश है, पुराने रिश्ते को भुला चुका है, अपने जीवन में मस्त है, स्थिर है और अपने करिअर में भी वह आगे बढ़ रहा है तो उसे अपने फैसले में हार नजर आती है।

हालत उस वक्त और भी दयनीय हो जाती है जब रिश्ता तोड़ने वाला व्यक्ति उसे फोन, एसएमएस आदि से संपर्क करना चाहता है और वह व्यक्ति एक-दो बार उसकी बात सुनने के बाद उससे मिलने से मना कर देता है। वह साफ तौर पर कह देता है कि वह अपने जीवन में हमेशा से ज्यादा खुश है। उसे पुराने रिश्ते के बारे में कोई भी बात करने में रुचि नहीं है। छोड़ने वाला व्यक्ति उसकी शांति, उसकी परिपूर्णता और नए व्यक्ति के प्रति सम्मान, प्रतिबद्धता एवं प्यार को देखकर और भी आहत होता है। उसकी जलन बढ़ जाती है। उसे लगता है यह सच्चे प्यार से भरा खजाना मेरा था। इसे मैंने जल्दबाजी में लुटा दिया।

दोस्तो, जो लोग गंभीरता से किसी रिश्ते में पड़ते हैं और उसे हर प्रकार से सच्ची भावना से निभाने की कोशिश करते हैं, उन्हें जब रिश्ते से बाहर किया जाता है तो वह उस रिश्ते में कभी फिर लौटकर नहीं आते हैं। लौटकर नहीं आने की वजह यह होती है कि वह संबंध तोड़ने के फैसले को भी उतनी ही गंभीरता से लेते हैं। वह रिश्ता तोड़ने वाले साथी के उस फैसले को सम्मान देते हैं। उसकी भावना की कद्र करते हुए उस रिश्ते से निकलकर वह अपनी नई दुनिया बसा लेते हैं।

  यह नकारात्मक भावना उस व्यक्ति का जीना मुहाल कर देती है और वह अपनी हरकतों से किसी तरह जब तात्कालिक रूप में उस व्यक्ति की शांति एवं खुशी की घड़ी में बाधा डाल पाता है तो उसे कुछ पल के लिए सुकून मिल जाता है।      
उसका यह व्यवहार अकेले रहने पर भी वैसा ही रहता है। अकेले होने पर संबंध तोड़ने वाले व्यक्ति का ध्यान उस ओर नहीं जाता है क्योंकि उसे लगता है वह अकेला बेचारा या बेचारी। हालाँकि कई बार कोई अकेला व्यक्ति भी बेहद सुकून और खुशी के साथ जीता है। पर खुशी के साथ अपने छोड़े गए साथी को किसी साथी के साथ समर्पित ढंग से जीवन बिताते देख रिश्ता तोड़ने वाले के पैरों के तले से जमीन खिसक जाती है।

दिलचस्प बात यह है कि उसे पाने की इच्छा तो बेहद तीव्र हो जाती है पर जब वह व्यक्ति मिलता है तो लगता है ऐसा भी इसमें क्या है जो इसके बारे में इतना सोचा जाए। अगर दिल की गहराई में झाँककर देखें तो उस व्यक्ति को पाने से ज्यादा उस व्यक्ति की खुशी को समाप्त करना ज्यादा बड़ा मिशन हो जाता है।

यह नकारात्मक भावना उस व्यक्ति का जीना मुहाल कर देती है और वह अपनी हरकतों से किसी तरह जब तात्कालिक रूप में उस व्यक्ति की शांति एवं खुशी की घड़ी में बाधा डाल पाता है तो उसे कुछ पल के लिए सुकून मिल जाता है। पर ऐसी हरकतों से वह पुराने रिश्ते से एक सामान्य-सा मनुष्यता का संबंध भी खो देता है। कोई भी रिश्ता तोड़ने के बाद उसे पूरी तरह भूल जाना ही नया संबंध बनाने का लव मंत्र है।

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