इश्क पर किसी का जोर नहीं चलता। ये कब, कहाँ, कैसे और किससे हो जाए कहा नहीं जा सकता। कभी प्रेम का फूल अपने बिल्कुल नजदीक रहने वाले साथ खिल जाता है तो कभी-कभी अपने से बहुत दूर बैठे किसी व्यक्ति को आप चाहने लगते हैं। ऐसे में जाति, धर्म, भाषा या स्थान कोई मायने नहीं रखता क्योंकि प्यार इन सबसे ऊपर होता है। अब ये बात अलग है कि आप किसी ऐसे व्यक्ति को चाहने लगते हैं, जो न आपकी बात समझ पाता है और न आप उसकी। कुल मिलाकर यूँ कहें कि आप उस व्यक्ति को चाहने लगते हैं, जिसकी भाषा आप नहीं समझते हैं और न ही वो आपकी भाषा को समझ पाता है। उफ, कितनी अजीब मुश्किल है? इतनी अजीब कि 'क्या कहें कुछ कहा भी न जाए, बिन कहे चुप रहा भी न जाए' क्योंकि आप बोलेंगे कुछ और वो समझेंगे कुछ।
चलिए कोई बात नहीं... क्योंकि ये इतनी बड़ी मुश्किल भी नहीं है। और जब आप किसी से प्यार करते हैं तो उसके लिए उसकी भाषा तो सीख ही सकते हैं। ठीक है थोड़ा समय लगेगा लेकिन कम-से-कम काम चलाने के लिए कुछ तो सीख ही सकते हैं ना। कैसे? अजी आपकी इस समस्या को भी हम सुलझा देते हैं। आपको केवल अपने महबूब या महबूबा की भाषा पर जाकर उसमें शामिल वाक्यों को समझना होगा और याद करना होगा। इतनी सी मेहनत करके आप उन तक अपने दिल की बात तो पहुँचा ही देंगे साथ ही उन्हें चौंका भी देंगे। क्यों कैसी रही? तो फिर देर किस बात की जल्दी से भाषा पर क्लिक कीजिए और फिर...