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सुखी दांपत्य के मूलाधार

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सुखी दांपत्य दंपति रोमांस इश्क प्रेम प्यार मोहब्बत पतिपत्नी
नूरी खान

अधिकांश दंपति इस बात से सहमत होंगे कि सुखी वैवाहिक जीवन के लिए समय और शक्ति दोनों लगाने पड़ते हैं। वैवाहिक जीवन टेढ़ी खीर है, लेकिन सर्वाधिक सुखी दंपति अपने संबंधों के प्रति अलग नजरिया रखते हैं। आइए जानें कैसे-

* वैवाहिक जीवन बस यूँ ही सुखी नहीं हो जाता। एक-दूसरे की इच्छाओं को समझने और जानने के बाद उस अनुसार आचरण भी करना चाहिए। संबंध का अच्छा या बुरा होना इस बात पर निर्भर करता है कि दो लोग एक-दूसरे के प्रति अच्छे या बुरे समय में व्यवहार आखिर कैसा करते हैं?

प्रेम मिटता नहीं : अधिकांश दंपति मन ही मन डरते हैं कि उनके संबंध कहीं जड़ न हो जाएँ। याद रखें कि प्रेम कभी नहीं मरता वह विलुप्त अवश्य लग सकता है और वह भी इसलिए क्योंकि हम इस पर दूसरी भावनाओं का ग्रहण लग जाने देते हैं। वैवाहिक जीवन में गड़बड़ी होने पर दोनों साथियों को बचाव करना चाहिए। जिनके बीच अच्छे संबंध होते हैं वे इस बात को बखूबी समझते हैं कि तूफान के बाद सौहार्द भी लौट आएगा।

* अपने प्रति प्रेम का होना भी रिश्तों में जरूरी है। सबसे सुखी दंपति वे हैं जो अपने वैवाहिक संबंधों को अटूट बनाने के लिए अपने आप से प्रेम करते हैं। आपके संबंध कितने भी घनिष्ठ क्यों न हों? ये मत भूलिए की पहले आप एक व्यक्ति भी हैं।

* प्रेम किसी को बदलने का अधिकार नहीं देता लेकिन फिर भी हम मूर्खतावश इसी बात पर विश्वास करते हैं। हम अपने साथी की कमियों को दूर करने का प्रयास करने लगते हैं। चाहे इस प्रक्रिया में हम उसकी उन खूबियों को ही क्यों न कम कर दें, जिसके कारण वह हमें प्यारा है? सचमुच सुखी दंपति जानते हैं किसी व्यक्ति की बदलने की इच्छा उसके इसी बोध से जाग्रत होती है कि वह जैसा भी है उसी रूप में स्वीकार भी किया जाता है।

अंतर्यामी नहीं होते सहचर : प्रेम से जुड़ा एक भ्रम यह भी है कि हमारा साथी हमारे अंतर को, विचारों को और स्वप्नों को बखूबी समझता है। हमारा साथी जब इस स्थिति को नहीं समझ पाता है तो हमें दुःख व निराशा का अनुभव होता है। जो लोग यह मानते हैं कि उनका साथी उन्हें समझता या समझती है, वे यह जानते हैं कि अपने आप को समझाने, बताने का दायित्व भी स्वयं उन्हीं पर ही है।

अच्छे संबंध समयानुसार परिवर्तनशील : हममें से अधिकांश यह मानते हैं कि ठोस संबंध-सालों साल यथावत रहते हैं। सच तो ये है कि दांपत्य संबंध अनिवार्य रूप से बदलते हैं। परिवर्तनों का सामना कर वे ही संबंध बचे रहते हैं जो पहले ही इन परिवर्तनों को समझ कर इनका सामना सकारात्मक ढंग से करते हैं।

प्रेम दोष नहीं मढ़ता - विवाह उपरांत हम अक्सर अपने साथी पर दोषारोपण करते हैं कि मैं यदि दुखी हूँ तो सिर्फ तुम्हारे कारण। हमारे दुःखों की जड़ क्या है? ये ढूँढने से उत्तम अपने साथी के कामों में दोष ढूँढना है। जबकि विवाह पूर्व हम दोषअपने कर्मों पर थोपते हैं। अपने अच्छे-बुरे के लिए अपने आप को जितना अधिक उत्तरदायी समझेंगे उतने ही अधिक सुखी आप और आपका जीवन साथी होंगे।

प्रेम निस्वार्थ होता है : सहज निःस्वार्थ भाव ही प्रेम का सार होता है। सच्चे प्रेम का आग्रह है कि हम अपनी आवश्यकताओं की अपेक्षा अपने साथी की अपेक्षाएँ पूरी करें बशर्ते उनकी उचित सीमा हो। सबसे उत्तम साथी जीवन में शत-प्रतिशत देते हैं और बदले में शत-प्रतिशत पाते हैं। अंततः प्रेम का सबसे महत्वपूर्ण सूत्र यह है कि अपने और अपने साथी के प्रति केवल ऐसा व्यवहार करें जिससे आपको अपनी सुपात्रता और ईमानदारी का बोध हो। शादी जैसे मजबूत बंधन को बाँधने के लिए सिर्फ सात फेरे काफी नहीं, बल्कि जीवनपर्यंत मजबूत और ठोस विचारधारा की भी जरूरत है।

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