मानसी हैलो दोस्तो! हसीन झूठ बोलना भी बहुत ही प्यारा सा गर्म-गर्म लवमंत्र है। वैसे तो रिश्ते झूठ के आधार पर बहुत लंबे समय तक नहीं चल पाते हैं पर कभी-कभी सोचा-समझा झूठ भी रिश्ते को हसीन आकार देता है। हाँ, ऐसे हसीन और मासूम झूठ का मकसद निश्चित रूप से एक-दूसरे को खुशी
पहुँचाना होना चाहिए। कोई विशेष तारीख या कार्यक्रम भूल जाने पर झूठ का सहारा लेकर सामने वाले को संतोषजनक उत्तर दिया जाए तो उसमें कोई हर्ज नहीं है। उस समय आपको यह आँकना होगा कि सच बोलने से आपका साथी ज्यादा आहत होगा या फिर झूठ से उसे राहत मिलेगी!आपका मकसद तो उन्हें सहज करना और खुशी देना ही है न। हाँ, जब स्थिति सामान्य हो जाए और समय अनुकूल दिखे तो आप सच्चाई बयान भी कर सकते हैं। इस प्रकार सामनेवाले का विश्वास भी आप पर बना रहेगा और मौके की नजाकत को संभालने की आपकी लियाकत पर भी उनको प्यार आएगा। झूठ बोलना भी एक कला है। कई बार हम बहुत ही सच्ची बात कहते हुए झूठ बोलने का विश्वास दिलाते हैं। जैसे सचमुच यदि आप ऐसे शख्स के साथ समय बिता रहे थे जिसे आपका साथी पसंद नहीं करता है तो आप जोरदार अंदाज में उस बात की घोषणा करते हैं और सामने वाला उसे झूठ समझता है। |
| कई बार मजाकिया अंदाज में बोला गया झूठ आसानी से हजम हो जाता है और इससे किसी का नुकसान भी नहीं होता। माहौल को खुशगवार करने के लिए झूठी डींगें भी खूब हाँकी जाती हैं और सबको इसका मजा भी आता है। |
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अप्रिय सत्य को सामने रखने की तुलना में झूठ बोलना ही ठीक माना जाएगा। आपके साथी द्वारा किए गए खुश करने के ऐसे प्रयास जो आपको उतना न भाया हो जितनी उनको अपेक्षा थी तो वहाँ झूठ बोलना ही उचित है। ऐसा झूठ सामनेवाले का उत्साह और खुशी दोनों ही बनाए रखेगा।
यूँ तो हम रोजाना की जिंदगी में इसे अपनाते भी रहते हैं। हमारे साथी के किसी अपने पर मुसीबत आने पर या देहांत के समय अपेक्षाकृत कम दुख होने पर भी हम झूठ का ही सहारा लेते हैं और ऐसा झूठ उदासीनता दिखाने वाले सच से ज्यादा अच्छा है।
प्रेमीयुगल वायदे पूरा न कर पाने पर असहज और गुस्से को रोकने के लिए झूठ का सहारा लेते हैं और इसमें कोई बुराई भी नहीं है। दोस्तो, इसका मतलब यह नहीं है कि आप धड़ल्ले और बेझिझक होकर झूठ का सहारा लें। अपनी गलती और बचाव के लिए लगातार झूठ बोलने से सामनेवाले का विश्वास टूटने लगता है।
कई बार मजाकिया अंदाज में बोला गया झूठ आसानी से हजम हो जाता है और इससे किसी का नुकसान भी नहीं होता। माहौल को खुशगवार करने के लिए झूठी डींगें भी खूब हाँकी जाती हैं और सबको इसका मजा भी आता है।
अपनी शान बघारने के लिए झूठ नहीं बोलना चाहिए। आप झूठ तभी बोलें जब आपका काम सच बोलने से नहीं चलता हो। वरना झूठ की फिर कहीं कोई सीमा नहीं होती है। बहुत बड़े झूठ के कारण आई दरार को पाटना बहुत मुश्किल होता है। याद रखें, हसीन झूठ प्यार के पलों को और हसीन बनाने के लिए होते हैं न कि किसी को कष्ट पहुँचाने के लिए।