chandra grahan 2020 : 5 जून को उपछाया चंद्र ग्रहण, 3 घंटे 18 मिनट की होगी अवधि

आचार्य राजेश कुमार
 
चंद्र ग्रहण :-
 
इस साल का दूसरा चंद्र ग्रहण ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा, तिथि 5 जून 2020 की रात में लगेगा। खगोल शास्त्रियों के मतानुसार जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है तो यह ग्रहण लगता है, 5 जून को लगने वाला चंद्र ग्रहण उपछाया चंद्र ग्रहण होगा।
 
यह ग्रहण यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, साउथ/ईस्ट अमेरिका, पैसेफिक, अंटार्कटिका में दिखाई देगा। इसे भारत में भी देखा जा सकेगा, लेकिन इस ग्रहण के दौरान चंद्रमा के आकार में कोई परिवर्तन नहीं होगा। यह अपने पूर्ण आकार में आसमान में चलते नजर आएंगे। इस ग्रहण के दौरान चंद्रमा की छवि मलिन हो जाएगी यानी चांद कुछ मटमैला-सा दिखेगा। इसकी वजह यह है कि यह वास्तविक चंद्र ग्रहण नहीं है, यह एक उपछाया चंद्र ग्रहण है।
 
इस ग्रहण का समय 5 जून को रात 11.16 मिनट से 06 जून को रात 2.34 बजे तक रहेगा। ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 18 मिनट होगी।
 
चंद्र ग्रहण का पृथ्वी पर कुप्रभाव 
 
चंद्रमा ज्योतिष शास्त्र में बहुत अधिक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। इसके संबंध में ज्योतिष शास्त्र कहता है कि चंद्रमा का आकर्षण पृथ्वी पर प्राकृतिक आपदाएं भूकंप, समुद्री आंधियां, ज्वार भाटा, तूफानी हवाएं, अति वर्षा, भूस्खलन, विश्व युद्ध के योग इत्यादि लाता हैं। रात को चमकता पूरा चांद मानव सहित जीव-जंतुओं पर भी गहरा असर डालता है। चंद्रमा से ही मनुष्य का मन और समुद्र से उठने वाली लहरे दोनों का निर्धारण होता है।
 
किस राशि पर लगेगा ग्रहण : ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह ग्रहण वृश्चिक राशि और ज्येष्ठा नक्षत्र पर लगने वाला है, किंतु इसका कुप्रभाव अन्य राशियों पर भी पड़ेगा।
 
चंद्र ग्रहण दोष के विभिन्‍न कारण-  
 
चंद्र ग्रहण दोष के कई कारण होते हैं और हर व्‍यक्ति के जीवन पर उसका प्रभाव भी अलग तरीके से पड़ता है। चंद्र ग्रहण दोष का सबसे अधिक प्रभाव, उत्‍तरा भाद्रपद नक्षत्र में पड़ता है। जो जातक, मीन राशि का होता है और उसकी कुंडली में चंद्र की युति राहु या केतु के साथ स्थित हो जाएं, ग्रहण दोष के कारण स्‍वत: बन जाते हैं। ऐसे व्‍यक्तियों पर इसके प्रभाव अधिक गंभीर होते हैं।
 
चंद्र ग्रहण दोष के अन्‍य कारण-
 
राहु, राशि के किसी भी हिस्‍से में चंद्र के साथ पाया जाता है, जबकि केतु समान राशि में चंद्र के साथ पाया जाता है
 
चंद्र ग्रहण दोष की पहचान और परिणाम-
 
ग्रहण दोष से व्‍यक्ति दिक्कत में रहता है, दूसरों पर दोष लगाता रहता है, उसके मां के सुख में भारी कमी आ जाती है। उसमें सम्‍मान में कमी आती है। हर प्रकार से उस व्‍यक्ति पर भारी समस्‍याएं आ जाती है जिनके पीछे सिर्फ वही दोषी होता है। साथ ही स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी दिक्‍कतें भी आती हैं। 
 
सूर्य और चंद्र में से सूर्य के कारण दोष व्यक्तिगत सफलता, शोहरत नाम, समग्र विकास में पड़ाव परिणाम प्राप्त करने में बाधाओं का सामना। एक औरत बार-बार गर्भपात, बच्चे और दोषपूर्ण पुत्रयोग की अवधारणा में समस्या की तरह बच्चे से संबंधित समस्या का सामना करना पड़ता। स्वास्थ्य समस्याएं भी सूर्य दोष के कारण प्रमुख हैं। चंद्र दोष अपने स्वयं के बुरे प्रभावों के रूप में यह व्यक्ति अनावश्यक तनाव  देता है।
 
इस दोष के कारण अविश्वास, भावनात्मक अपरिपक्वता, लापरवाही, याददाश्त में कमी, असंवेदनशीलता, अस्वस्थ्य छाती, फेफड़े, सांस लेने और मानसिक अवसाद से संबंधित समस्याएं उत्पन्न होती हैं। आत्म विनाशकारी प्रकृति भी हो जाती है। व्यक्ति के मन में आत्महत्या करने की इच्छा जागृत होती है। 
 
यदि आप हमेशा कशमकश में रहते हैं, इधर-उधर की सोचते रहते हैं, निर्णय लेने में कमजोर हैं, भावुक एवं संवेदनशील हैं, अन्तर्मुखी हैं, शेखी बघारने वाले व्यक्ति हैं, नींद पूरी नहीं आती है, सीधे आप सो नहीं सकते हैं अर्थात् हमेशा करवट बदल कर सोएंगे अथवा उल्टे सोते हैं, भयभीत रहते हैं तो निश्चित रूप से आपकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर होगा। समय पर इस कमजोर चंद्रमा अर्थात् प्रतिकूल प्रभाव को कम करने का उपाय करना चाहिए अन्यथा जीवन भर आप आत्मविश्वास की कमी से ग्रस्त रहेंगे।
 
जिन व्यक्तियों का चंद्रमा क्षीण होकर अष्टम भाव में और चतुर्थ तथा चंद्र पर राहु का प्रभाव हो, अन्य शुभ प्रभाव न हो तो वे मिर्गी रोग का शिकार होते हैं। कफ प्रधान शरीर होता है। जिन लोगों का चंद्रमा छठे, आठवें आदि भावों में राहु दृष्ट न हो, वैसे पाप दृष्ट हो तो उनको रक्तचाप आदि होता है। 
 
दिव्यांश ज्योतिष केंद्र (www.divyanshjyotish.com)

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