विगत तीन वर्षों से अवर्षा की स्थिति का सामना कर रहे मध्यप्रदेश के सतना जिले के लोग अब दैवीय शक्ति का सहारा लेने के उपायों पर विचार कर रहे हैं।
अशोक शर्मा आचार्य ने बताया कि दो वर्ष पहले जिले में मेघ यज्ञ का आयोजन किया गया था और इसके परिणाम सार्थक सिद्ध हुए थे।
उन्होंने बताया कि अवर्षा की स्थिति में शिव को अखंड स्नान कराए जाने का भी विधान है इसके तहत शिवलिंग के ऊपर एक घट बाँधकर निरंतर शिव को स्नान कराया जाता है। मौलवी कादिर ने बताया कि अल्लाह के रहम से वर्षा के योग बन सकते हैं इसके लिए कुछ विशेष आयतें और दुआएँ करनी पड़ती हैं।
शहर में लगने वाली एक मनोरंजन प्रदर्शनी को इस आधार पर रोके जाने की माँग कुछ लोग कर रहे हैं कि आयोजनकर्ता पानी को तंत्रमंत्र से बाँध देते हैं जिस कारण जिले में पर्याप्त वर्षा नहीं हो पा रही है। वर्ष 2008 में तत्कालीन कलेक्टर वी.एन.कुरील ने प्रदर्शनी के आयोजन पर केवल इसलिए रोक लगा दी थी कि प्रदर्शनी के आयोजनकर्ताओं ने पानी को बाँध दिया है।
जानकार बताते हैं कि जहाँ मेघ यज्ञ के जरिए वर्ष के योग बनते हैं वहीं मेघ स्तम्भन के द्वारा मेघ विभाजन कर अतिवृष्टि और सामान्य वर्षा को प्रभावित किया जा सकता है।
आस्था और अंधविश्वास में ज्यादा अंतर न कर पाने वाले धार्मिक लोग सतना में आयोजित की जा रही एक मनोरंजन प्रदर्शनी का विरोध सिर्फ इसलिए कर रहे हैं कि प्रदर्शनी के आयोजनकर्ता पानी को एक बार पुनः बाँधकर जिले को अवर्षा की स्थिति में पहुँचा देंगे।
दिलचस्प बात यह है कि जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन और नगरीय प्रशासन भी प्रदर्शनी के आयोजनकर्ताओं को प्रदर्शनी लगाने की अनुमति देने में हिचक रहा है।