-राजीव सोनी, भोपाल
भाजपा की चुनावी नैया पार लगाकर पुनः सत्ता पाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और प्रदेश अध्यक्ष नरेन्द्र तोमर की जोड़ी इन दिनों एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। मिशन 2008 को फतह करने के लिए उनके समक्ष मौजूद चौतरफा चुनौतियों से निपटने हेतु दस जाँबाज पार्टी के तारणहार बनकर उभरे हैं। चुनावी रण में नैपथ्य के इन्हीं खिलाड़ियों पर शिवराज-नरेन्द्र की जुगल जोड़ी निर्भर है। बागियों को मनाने की समस्या हो या चुनावी प्रबंधन का पेचीदा मसला- इनके पास हर मर्ज की दवा है।
मीडिया में कौन-सा विज्ञापन छपेगा, राष्ट्रीय और प्रादेशिक समाचारों-आरोपों पर प्रतिक्रिया देने से लेकर किस मुद्दे को कितनी हवा देना या फिर डिफ्यूज करना है, भाजपा की यह कोर टीम तय करती है। यहीं सारी रणनीति भी आकार लेती है।
इस टीम में अनेक दिग्गज हैं। इनमें 1. माखन सिंह, प्रदेश संगठन महामंत्री, 2. भगवतशरण माथुर, 3. अरविंद मेनन, 4. अनिल दवे, चुनाव सेल के संयोजक, 5. प्रभात झा, सांसद, 6. चेतन्य काश्यप, एनजीओ सेल के संयोजक, 7. विजेन्द्र सिंह सिसौदिया, कार्यालय प्रभारी, 8. विजेश लुनावत, 9. बालासुब्रमण्यम, राष्ट्रीय मीडिया सेल के सहसंयोजक, 10. गोविंद मालू, प्रदेश मीडिया प्रभारी
इस टीम की खासियत
अनिल दवे : ब्रांडेड महँगे कुरतों के साथ मैच करती डिजाइनर बंडीधारी की चुनावी प्रबंधन में दक्षता का सभी लोहा मानने लगे हैं। 2003 के चुनाव में पार्टी को ये अपनी प्रतिभा के गुर दिखा चुके हैं। जाबाली केंद्र के जरिए भी इन्होंने प्रबंधकीय विशेषज्ञता दी थी। चुनाव प्रकोष्ठ के प्रबंधन का सारा काम इन्हें ही सौंपा गया है। कार्यकर्ता महाकुंभ जैसे भव्य इवेंट की प्लानिंग और मैनेजमेंट के बाद मुख्यमंत्री की जनआशीर्वाद यात्रा की व्यवस्था और पब्लिसिटी का काम भी दवे को सौंपा गया। मीडिया को हैंडल करने के अलावा चुनावी प्रचार-प्रसार की सामग्री बनवाने से लेकर पूरे प्रदेश में वितरित कराने की जवाबदारी भी इन्हीं के कंधे पर है। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पार्टी के विज्ञापनों का अभियान चलाने जैसा महत्वपूर्ण काम भी यही संभाल रहे हैं। चुनाव में अत्याधुनिक साजो सामान के साथ आक्रामक प्रचार की योजना के अलावा अन्य कार्यों के लिए इन्होंने 15-20 कर्मठ साथियों के बीच जवाबदारी बाँटी है।
विजेश लुनावत : चुनाव प्रकोष्ठ में योजनाओं को अमलीजामा पहनाने और प्रचार-प्रसार सामग्री की डिजाइनिंग व छपाई की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। दूरस्थ जिलों से फीडबेक, डाटा का विश्लेषण और उन तथ्यों पर रिसर्च से लेकर पार्टी का स्टैंड तय करने वाली सामग्रियों के संयोजन में भी इनकी भूमिका है। चुनाव प्रचार की फिल्में बनवाने, ऑडियो-वीडियो सामग्री का चयन और उनकी वितरण व्यवस्था से लेकर मीडिया समन्वय के काम में इनकी महारत है।
माखनसिंह : संघ के अनुभव के कारण इन दिनों चुनाव से संबंधित सभी महत्वपूर्ण निर्णयों में भूमिका निभा रहे हैं। टिकट वितरण के तीन-चार माह पहले से चली लगातार मतदान केंद्र, मंडल, तहसील, जिला, संभाग, प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों से लेकर विधायकों, बैठकों में इनकी सक्रिय भागीदारी रही। इसके बाद सांसदों से रायशुमारी और चुनाव समिति की तीन दिनी मैराथन बैठकों में भी माखनसिंह मजबूत स्तंभ की तरह डटे रहे। इसके बाद बागियों को समझाने में भी विशेष भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री और अध्यक्ष के अलावा संघ को लगातार फीडबेक देते हैं।
गोविंद मालू : पार्टी कार्यालय में बतौर मीडिया प्रभारी रहते हुए दिनभर पत्रकारों से मेल-मुलाकातों का दौर चलता रहता है। उन्हें पार्टी के बारे में समाचार सामग्री उपलब्ध कराने से लेकर दिनभर के कार्यक्रमों की प्रकाशन सामग्री तैयार कराना भी इन्हीं का दायित्व है। साथ ही प्रेस कॉन्फ्रेंस की व्यवस्थाओं से लेकर पत्रकारों को सूचना देने में भी ये सक्रिय बने रहते हैं।
बिजेन्द्रसिंह सिसौदिया : चेहरे पर मुस्कान लिए भाजपा मुख्यालय के प्रभारी के बतौर ये राजनीतिक मामलों पर नजर रखते हैं। नेताओं के गिले-शिकवे सुनना और उनके बारे में अध्यक्ष को अवगत कराना भी इन्हीं का दायित्व है। असंतोष और कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन के दौरान शॉक एब्जॉर्वर के बतौर कार्यालय में डटे रहे। अब चुनावी अभियान में केन्द्रीय स्टार प्रचारकों के लिए कहाँ किसकी माँग ज्यादा है इसका आकलन करना और नेताओं की चुनावी सभाओं की व्यवस्थाओं को तय करना।
प्रभात झा : पार्टी अध्यक्ष के राजनीतिक सचिव और राज्यसभा का सदस्य होने का रुतबा अपने आप में ही महत्वपूर्ण है। किन इसके अलावा मप्र में इन्होंने लंबे समय तक पार्टी के अनेक महत्वपूर्ण दायित्व संभाले हैं। मीडिया के लोगों से जीवंत और आत्मीय संपर्क कई बार इन्हें पार्टी का संकटमोचक भी बना देता है। तीन माह से भोपाल में डेरा डाले हुए हैं।
राष्ट्रीय नेताओं को फीडबेक देना, रणनीति बनाना, टिकट वितरण और डेमेज कन्ट्रोल तक में इनकी अहम भूमिका रही। शिवराजसिंह और नरेन्द्र तोमर के साथ बढ़िया ट्यूनिंग के कारण प्रादेशिक और दिल्ली के नेताओं के बीच समन्वय बनाते हैं।
चेतन्य काश्यप : चुनावी तैयारियों के लिए प्रदेश में पिछले छः माह से पार्टी पदाधिकारियों के साथ समन्वयक के रूप में कार्यरत हैं। एनजीओ के राष्ट्रीय संयोजक के रूप में पूरे देश के नेटवर्क से जीवंत संपर्क। इन दिनों मीडिया सलाहकार के साथ चुनाव अभियान में लगे पाँच हेलिकॉप्टर और हवाई जहाज की व्यवस्थाओं का भार भी इन्हीं पर है। कब कौन-सा उड़नखटोला कहाँ पहुँचाना है, यह व्यवस्था भी ये देख रहे हैं।
भगवतशरण माथुर : प्रदेश में सह संगठन महामंत्री पद पर रहते हुए इंदौर और भोपाल संभाग के सभी विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशियों, पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं से जीवंत संपर्क और उन्हें चुनाव में डटे रहने के लिए प्रोत्साहित करने में जुटे हैं। टिकट वितरण की कवायद से लेकर बाद में उपजे असंतोष के दौरान ये शॉक एब्जॉर्वर के रूप में पूरी तरह मैदान में डटे रहे। पिछले कई महीनों से कार्यकर्ताओं के गिले-शिकवे इन्हीं की ड्योढ़ी पर हल्के होते रहे।
अरविंद मेनन : मीडिया से परहेज करने वाले मृदुभाषी संघ के जुझारू-कर्मठ प्रचारक के बतौर इन पर सागर, जबलपुर और रीवा संभाग में पार्टी के कामकाज का दायित्व है। संगठन का कामकाज सायलेंट वर्कर के रूप में अंजाम देने में इनका ज्यादा भरोसा है।
बालासुब्रमण्यम : राष्ट्रीय मीडियासह समन्वयक के रूप में भोपाल में आए आंध्र दिवासी बालाजी मीडिया में सहयोग के लिए भोपाल में डेरा डाले हैं। मीडिया की खबरों पर नजर रखना और उनके बारे में संदर्भ सहित पार्टी का पक्ष रखने के लिए प्रमुख पॉइंट तैयार करने में इनकी महारत है। सुबह तय हो जाता है कि पार्टी का रुख क्या होगा और किस मुद्दे को किस तरह खेला जाए।