पोलियो उन्मूलन की सफलता की कहानी, डॉ. संतोष शुक्ला की जुबानी

गुरुवार, 24 अक्टूबर 2019 (16:21 IST)
डॉ. शुक्ला ने दिया था 'दो बूंद जिंदगी की' का नारा
 
पूरी दुनिया में 24 अक्टूबर विश्व पोलियो दिवस के रूप में मनाया जाता है। बच्चों में होने वाली लाइलाज बीमारी पोलियो पर अब भारत के साथ पूरी दुनिया में पूरी तरह काबू पा लिया गया है। वायरसजनित बीमारी पोलियो को पूरी तरह काबू पाने पर विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुख्यालय जेनेवा में आज गुरुवार को पोलियो विजय दिवस मनाया जा रहा है। भारत में पोलियो को काबू पाने और बच्चों को इस लाइलाज बीमारी से मुक्त कराने में पल्स पोलियो किसी वरदान से कम साबित नहीं हुआ है।
 
विश्व पोलियो दिवस पर 'वेबदुनिया' ने मध्यप्रदेश के राज्य टीकाकरण अधिकारी और पल्स पोलियो अभियान की सफलता का नारा (स्लोगन) 'दो बूंद जिंदगी की' देने वाले डॉक्टर संतोष शुक्ला से पोलियो और उसके उन्मूलन को लेकर खास बातचीत की। बातचीत में डॉक्टर संतोष शुक्ला कहते हैं कि आज भारत के साथ ही विश्व में करीब करीब पोलियो की बीमारी का पूरी तरह उन्मूलन कर दिया गया है।
 
विश्व के 2 देशों पाकिस्तान और अफगानिस्तान को छोड़कर आज पोलियो सभी देशों में पूरी खत्म हो चुका है। वे कहते हैं कि भारत में पोलियो का आखिरी केस 2011 में पाया गया था तथा इसके बाद से भारत में इस बीमारी का कोई भी केस नहीं पाया गया, वहीं आज विश्व में पोलियो के पी-2 और पी-3 वायरस पर पूरी तरह काबू पाया जा चुका है, अब केवल पोलियो के पी-1 वायरस के केस ही बचे हैं।
 
डॉ. शुक्ला कहते हैं कि पोलियो को दुनिया से पूरी तरह नेस्तनाबूद करने के लिए 2019 से 2023 तक विश्व स्तर पर एक सघन उन्मूलन कार्यक्रम चलाया जा रहा है। वे 'वेबदुनिया' के जरिए लोगों से अपील करते हैं कि वे अपने बच्चों को सब काम छोड़कर प्राथमिकता के तौर पर पोलियो की दवा जरूर पिलाएं।
 
वे कहते हैं कि माता-पिता को बच्चे के टीकाकरण के प्रति जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से लगातार अभियान चलते रहते हैं लेकिन इसके बाद भी खुद माता-पिता को बच्चों के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। वे कहते हैं कि पोलियो एक लाइलाज बीमारी है लेकिन पोलियो से होने वाली विकृति को हम अपनी सजगता से रोक सकते हैं।
 
पल्स पोलियो अभियान की सफलता के लिए 'दो बूंद जिंदगी की' नारे के बारे में बात करते हुए डॉ. शुक्ला कहते हैं कि जन-जन तक पल्स पोलियो अभियान को पहुंचाने और इसको जन आंदोलन बनाने में इस स्लोगन ने बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और इसके लिए वे ईश्वर का धन्यवाद देते हैं। 'वेबदुनिया' से बातचीत में वे कहते हैं कि भारत से पोलियो के उन्मूलन में मध्यप्रदेश और यहां के लोगों का बहुत बड़ा योगदान है।

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