नया ज्ञानोदय

नवंबर 2008

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तरतीब

नोबेल पुरस्कार : ले. क्लेज़िओ

एडम स्मिथ : अमेरिका और यूरोप कर्ज़दार हैं। टेलिफोनिक बातचीत

बुकर पुरस्कार : अरविंद अडिगा

विजय शर्मा : व्हाइट टाइगर, काली दुनिया

दुर्लभ पृष्ठ
नागार्जुन : एक कविता

स्मरण : वेणुगोपाल
नरेंद्र मोहन : दु:स्वप्न को सपने में ढालने की क‍ोशिश

गुलज़ार : मेरा कुछ सामान...
गुलज़ार : पीपल, इमली, आम, अमलतास, खु़मानी अखरोट, सब्ज़ लम्हे
गुलज़ार : मैं कुछ कहता नहीं ख़ुद से
कन्हैयालाल नंदन : अहसास के गमलों में उगे हुए सपने

कहानी
निर्मल वर्मा : दूसरी दुनिया
कैलाश बनवासी : उनकी दुनिया
शर्मिला बोहरा जालान : ईमेल
राजेंद्र लहरिया : सवाल
आर.के.पालीवाल : ताक झाँक
श्रीप्रकाश मिश्र : प्रेत-पुतले

कला सौंदर्य
यशदेव शल्य : कला का सत्य

लोक
इंदुप्रकाश पांडेय : लोकवार्ता : प्रसंग और प्रयोजन

यात्रा
ममता कालिया : काजू, कैसिनो और फ़ैनी का प्रदेश : गोआ

शख्सियत
प्रयाग शुक्ल : याद आते हैं पक्षियों की दुनिया वाले सालिम अली

कविता
हरीशचंद्र पांडेय : किसान और आत्महत्या, भाई-बहन, गोधूलि
श्रीप्रकाश शुक्ल : पाथेय, रेत में कलाकार, रेत में सुबह, रेत में दोपहर, रेत में शाम, रेत में लखटकिया
एकांत श्रीवास्तव : नासपाती, अंगूर, अनार, तरबूज़, लीची
जितेंद्र श्रीवास्तव : एक घर था, जैसे दो हाथ, बहाव

कहानी जो याद आती है
विजयमोहन सिंह : 'दूसरी दुनिया' : एक मार्मिक मानवीय कहानी

  गुलज़ार : मेरा कुछ सामान... गुलज़ार : पीपल, इमली, आम, अमलतास, खु़मानी अखरोट, सब्ज़ लम्हे गुलज़ार : मैं कुछ कहता नहीं ख़ुद से कन्हैयालाल नंदन : अहसास के गमलों में उगे हुए सपने ...      
अतिथि भूमि
केशरीनाथ त्रिपाठी : तीन कविताएँ
विश्वनाथ : नहीं देख पाया, चिंतन, महाभारत प्रसंग, चीरहरण

पहली परंपरा की खोज
भगवान सिंह : कच्चा चिट्‍ठा

प्रत्यंचा
ज्ञान चतुर्वेदी : कब तक यह फैंटेसी?

ज़रूरी किताब
राहुल सिंह : सार्त्र : असंभव विकल्पों की तलाश (विजयमोहन सिंह)

पढ़ते‍-लिखते
सुशील सिद्धार्थ : ये असंख्य लोग

संपूर्ण उपन्यास
संजय कुंदन : टूटने के बाद

मार्फ़त नया ज्ञानोदय
एस.आर.हरनोट : स्नोवा बार्नो : आवाज़ दे कहाँ है?

संपादक : रवींद्र कालिया
मूल्य : 25 रुपए
प्रकाशक : भारतीय ज्ञानपीठ
18, इंस्टीट्‍यूशनल एरिया, लोदी रोड, पोस्ट बॉक्स नं. 3113
नई दिल्ली - 110003 फोन - 2462 6467, 2465 4197

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