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Mahatma Gandhi : गांधीजी की पुण्यतिथि पर पढ़िए उनके अनमोल वचन

हमें फॉलो करें Mahatma Gandhi : गांधीजी की पुण्यतिथि पर पढ़िए उनके अनमोल वचन
1. निर्मल अं‍त:करण को जो प्रतीत हो, वही सत्य है।

2. भूल करने में पाप तो है ही, परंतु उसे छुपाने में उससे भी बड़ा पाप है।
 
3. चलिए सुबह का पहला काम ये करें कि इस दिन के लिए संकल्प करें कि मैं दुनिया में किसी से नहीं डरूंगा। नहीं, मैं केवल भगवान से डरूं। मैं किसी के प्रति बुरा भाव न रखूं। मैं किसी के अन्याय के समक्ष झुकूं नहीं। मैं असत्य को सत्य से जीतूं और असत्य का विरोध करते हुए मैं सभी कष्टों को सह सकूं।
 
 
4. भविष्य में क्या होगा, मैं यह नहीं सोचना चाहता। मुझे वर्तमान की चिंता है। ईश्वर ने मुझे आने वाले क्षणों पर कोई नियंत्रण नहीं दिया है।
 
5. मैं हिन्दी के जरिए प्रांतीय भाषाओं को दबाना नहीं चाहता, किंतु उनके साथ हिन्दी को भी मिला देना चाहता हूं।
 
 
6. व्यक्ति अपने विचारों से निर्मित एक प्राणी है, वह जो सोचता है वही बन जाता है।
 
7. काम की अधिकता नहीं, अनियमितता आदमी को मार डालती है।
 
8. गुलाब को उपदेश देने की आवश्यकता नहीं होती है। वह तो केवल अपनी खुशी बिखेरता है। उसकी खुशबू ही उसका संदेश है।
 
9. हम जिसकी पूजा करते हैं, उसी के समान हो जाते हैं।
 
10. श्रद्धा का अर्थ है आत्मविश्वास और आत्मविश्वास का अर्थ है ईश्वर में विश्वास।
 
 
11. कुछ लोग सफलता के केवल सपने देखते हैं जबकि अन्य व्यक्ति जागते हैं और कड़ी मेहनत करते हैं।
 
12. सुख बाहर से मिलने की चीज नहीं, मगर अहंकार छोड़े बगैर इसकी प्राप्ति भी होने वाली नहीं। अन्य से पृथक रखने का प्रयास करें।
 
13. आपकी मान्यताएं आपके विचार बन जाते हैं, आपके विचार आपके शब्द बन जाते हैं, आपके शब्द आपके कार्य बन जाते हैं, आपके कार्य आपकी आदत बन जाते हैं, आपकी आदतें आपके मूल्य बन जाते हैं, आपके मूल्य आपकी नियति बन जाती है।
 
14. अहिंसा ही धर्म है, वही जिंदगी का एक रास्ता है।
 
15. जिस दिन प्रेम की शक्ति, शक्ति के प्रति प्रेम पर हावी हो जाएगी, दुनिया में अमन आ जाएगा।
 
16. कुछ करने में या तो उसे प्रेम से करें या उसे कभी करें ही नहीं।
 
17. दुनिया में ऐसे लोग हैं, जो इतने भूखे हैं कि भगवान उन्हें किसी और रूप में नहीं दिख सकता सिवाय रोटी के रूप में।
 
18. चिंता से अधिक कुछ और शरीर को इतना बर्बाद नहीं करता और वह जिसे ईश्वर में थोड़ा भी यकीन है उसे किसी भी चीज के बारे में चिंता करने पर शर्मिंदा होना चाहिए।
 
 
19. प्रेम दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति है और फिर भी हम जिसकी कल्पना कर सकते हैं उसमें सबसे नम्र है।
 
20. स्वयं को जानने का सर्वश्रेष्ठ तरीका है स्वयं को औरों की सेवा में डुबो देना।
 
21. आप तब तक यह नहीं समझ पाते कि आपके लिए कौन महत्वपूर्ण है, जब तक आप उन्हें वास्तव में खो नहीं देते।
 
22. प्रेम की शक्ति दंड की शक्ति से हजार गुनी प्रभावशाली और स्थायी होती है।
 
 
23. जब तक गलती करने की स्वतंत्रता न हो, तब तक स्वतंत्रता का कोई अर्थ नहीं है।
 
24. प्रार्थना मांगना नहीं है। यह आत्मा की लालसा है। यह हर रोज अपनी कमजोरियों की स्वीकारोक्ति है। प्रार्थना में बिना वचनों के मन लगाना, वचन होते हुए मन न लगाने से बेहतर है।
 
25. पाप से घृणा करो, पापी से प्रेम करो।
 
26. मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित है। सत्य मेरा भगवान है, अहिंसा उसे पाने का साधन।
 
 
27. जो भी चाहे अपनी अंतरात्मा की आवाज सुन सकता है। वह सबके भीतर है।
 
28. जो समय बचाते हैं, वे धन बचाते हैं और बचाया हुआ धन, कमाए हुए धन के बराबर है।
 
29. केवल प्रसन्नता ही एकमात्र इत्र है जिसे आप दूसरों पर छिड़कें तो उसकी कुछ बूंदें अवश्य ही आप पर भी पड़ती हैं।
 
30. अपनी गलती को स्वीकारना झाडू लगाने के समान है, जो धरातल की सतह को चमकदार और साफ कर देती है।

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