diet for sick kids: बच्चों के बीमार होने पर उनके खानपान को लेकर कई तरह के मिथक प्रचलित हैं। इन मिथकों के कारण कई बार माता-पिता बच्चों को सही आहार नहीं दे पाते हैं, जिससे उनकी तबीयत और बिगड़ सकती है। आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही मिथकों की सच्चाई।
मिथक और उनकी सच्चाई
मिथक 1: बच्चों को खांसी-जुकाम में केला नहीं खिलाना चाहिए?
सच्चाई: यह एक आम गलत धारणा है। केला पौष्टिक होता है और इसमें पोटैशियम होता है, जो बच्चों के लिए फायदेमंद है। खांसी-जुकाम में केला खाने से कोई नुकसान नहीं होता है।
मिथक 2: सर्दियों में बीमार पड़ने पर दही खिला सकते हैं?
सच्चाई: दही में प्रोबायोटिक्स होते हैं, जो बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। सर्दियों में बीमार पड़ने पर दही खिलाना फायदेमंद हो सकता है। लेकिन अगर बच्चे को सर्दी-खांसी है, तो दही खिलाने से बचना चाहिए।
मिथक 3: बुखार के दौरान बच्चों को खाने के लिए मजबूर करना चाहिए?
सच्चाई: बुखार के दौरान बच्चों को भूख कम लगती है। उन्हें जबरदस्ती खिलाने से उनकी तबीयत और बिगड़ सकती है। बच्चों को हल्का और सुपाच्य भोजन दें।
मिथक 4: कफ होने पर बच्चों को चावल नहीं देना चाहिए?
सच्चाई: चावल आसानी से पचने वाला भोजन है। कफ होने पर बच्चों को चावल दिया जा सकता है। लेकिन उन्हें ज्यादा तैलीय या मसालेदार चावल न दें।
एक्सपर्ट की राय
एक्सपर्ट्स का कहना है कि बच्चों के बीमार होने पर उन्हें पौष्टिक और सुपाच्य भोजन देना चाहिए। उन्हें ज्यादा तैलीय, मसालेदार या भारी भोजन न दें। बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाएं और उन्हें आराम करने दें। बच्चों के बीमार होने पर उनके खानपान को लेकर किसी भी मिथक पर विश्वास न करें। हमेशा एक्सपर्ट की सलाह लें और बच्चों को सही आहार दें।
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