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बच्चों को गलती से भी न कहें ये बातें, दिमागी सेहत पर पड़ता है असर

हमें फॉलो करें बच्चों को गलती से भी न कहें ये बातें, दिमागी सेहत पर पड़ता है असर
- मोनिका पाण्डेय 
 
कहते हैं कि बच्चे कोरे कागज की तरह होते हैं, आप उन्हें जिस रंग में ढालते हैं वो उस रंग में ही ढल जाते हैं। बच्चे अपने आसपास के वातावरण से चीजें बहुत जल्दी सीखते हैं। बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए फैमिली का माहौल सही होना बहुत जरूरी होता है, साथ ही बच्चों पर मां-बाप की बातों का असर सबसे ज्यादा पड़ता है। 
 
कई बार मां-बाप अपने बच्चों को अंजाने में कुछ ऐसी बातें कह देते हैं, जिसका बच्चों पर बहुत बुरा असर पड़ता है और वो बातें आगे चलकर बच्चों के व्यवहार और क्षमता को भी प्रभावित करती हैं। इसलिए आपको अपने बच्चों से कुछ भी कहते समय अपने शब्दों और वाक्यों पर ध्यान देना चाहिए। आज के इस लेख में हम आपको बताएंगे कुछ ऐसी बातों के बारे में जो आपको अपने बच्चों को गुस्से में भी नहीं बोलना चाहिए-
 
घर से चले जाओ, ऐसी बातें न कहें : 
 
कई बार माता-पिता अपने बच्चों पर इतना गुस्सा हो जाते हैं कि वो उन्हें बातों-बातों में घर छोड़ कर चले जाओ, जैसी बातें कह देते हैं। जब बच्चे छोटे होते हैं उस वक्त आप जब ये बात कहते हैं तो बच्चा रोने लगता है कभी-कभी तो वो बाहर भी चले जाते हैं लेकिन थोड़े समय बाद वह घर पर आ जातें हैं क्योंकि उस वक्त वह कोई गलत कदम उठाने के लिए सक्षम नहीं होता है। लेकिन आपके द्वारा कही यह बात बच्चे के दिमाग पर बहुत बुरा असर डालती है।

जब आपका बच्चा बड़ा हो जाता है और उस वक्त आप गुस्से में अपने बच्चे को यह बात कहते हैं, तो यह बात उसके दिमाग पर बहुत बुरा और गहरा प्रभाव डालती है और वह गुस्से में कुछ ऐसा डिसीजन ले लेता है, जिसका पछतावा पेरेंट्स को ज़िंदगी भर रहता है। 
 
अपने बच्चों को दूसरे बच्चों से कंपेयर न करें : 
 
कई बार माता-पिता अपने बच्चों का कंपेरिजन किसी दूसरे बच्चों से या उनके फ्रेंड्स से करते हैं। आपके द्वारा किया हुआ यह कंपेरिजन आपके बच्चों पर बहुत बुरा असर डालता है। इससे आपका बच्चा खुद को कम आंकने लग जाता है। हर बच्चों की अपनी अपनी कैपेसिटी होती है। जिसके हिसाब से वह काम करता है या पढ़ाई करता है। इसलिए आपको अपने बच्चे की तुलना किसी और बच्चे से नहीं करनी चाहिए।   
 
तुम्हें पैदा करके गलती कर दी : 
 
मां-बाप जब बच्चों से गुस्सा होते हैं तो गुस्से में कई बार ये वाक्य बोल देते हैं। कभी-कभी हंसी में बच्चों को उनकी गलतियों का एहसास दिलाने के लिए भी इस वाक्य का प्रयोग कर देते हैं। मगर इस बात का असर बच्चों के दिमाग पर बुरा पड़ता है। 
 
हम अक्सर यही समझते हैं कि सेल्फ रिस्पेक्ट जैसी चीज बड़ों में ही पाई जाती है। लेकिन सच्चाई यह है कि छोटे बच्चों को भी सेल्फ रिस्पेक्ट उतना ही पसंद होता है जितना बड़ों को। जब उन्हें ठेस पहुंचता है तो उनके अवचेतन मस्तिष्क पर बुरा असर पड़ता है। इसलिए बच्चों को कभी भी यह वाक्य न कहें, भले ही उसने कितनी भी बड़ी गलती की हो।
 
तुम किसी काम के नहीं हो : 
 
अक्सर माता-पिता गुस्से में अपने बच्चों को यह बोल देते हैं कि तुम किसी काम के नहीं हो। यह बोलना गलत बात है पर उन्हें अपनी इस गलती का कभी एहसास नहीं होता है, यह उससे भी गलत बात है।

जब तक बच्चा आपकी बातों को सुनता है वो अपनी गलतियों को दोहराते रहते हैं और जब आपका बच्चा आपकी इस बात पर रियेक्ट करता है, तब जाकर आपको यह बात समझ आती है लेकिन तब तक पानी बच्चे के सिर से ऊपर जा चुका होता है। जिसका पछतावा हमेशा के लिए आपके मन में रह जाता है।  

 

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