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Mother's Day 2021 : कुछ खुले अशआर माँ के लिए

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डॉ. अंजना चक्रपाणि मिश्र

ए खुदा बंदों को महसूस हो तेरी मौजूदगी औ ख़ुदाई, 
इस वास्ते तूने इस ज़मी पर इन्सान की "माँ"  बनाई !
 
बहुत दूर बादलों के पार...रहती हैं वो ,
मेरी रगों में प्यार बनके बहती हैं वो !!
 
वो रोज़ मुझे आग़ोश में लेकर आँचल तले सुलाती थी,
लोरियाँ गाती माँ मिरी, गोद में थपकी दे झूलाती थी!!
 
मेरी चौखट से टकराकरआज भी बलाएं लौट जाती हैं ,
ये दुआएँ ही हैं मेरी माँ की जो अपना असर दिखाती हैं ! 
 
इबादत औ दुआ है रूहानी, मोहब्बत से दुलारा कीजिये,
वो माँ है हुज़ूर उसे बाइज़्ज़त प्यार से पुकारा कीजिये !
 
माँ
तुम उतर आना आसमानों से एक दिन देखना मुस्काती मिलूंगी ,
बिन पूछे ही मैं तुम्हें अपनी नम आँखों से कहानी सुनाती मिलूंगी ।
 
स्वयं मैं ही -
डॉ.अंजना चक्रपाणि मिश्र
Mothers Day : मदर्स डे पर खास सामग्री 
 

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