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पहचान कायम रखते हुए राष्ट्र के समग्र विकास का विजन

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अवधेश कुमार

भाजपा द्वारा संकल्प पत्र के नाम से जारी घोषणा पत्र तथा इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष राजनाथ सिंह, वित्तमंत्री अरुण जेटली एवं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के वक्तव्यों को साथ मिलाकर विचार करें तो यह भारतीय राष्ट्र की विचारधारा पर कायम हुए राष्ट्रवाद की भावना के साथ समग्र आर्थिक-सामाजिक-सांस्कृतिक विकास का व्यावहारिक दस्तावेज दिखता है।

 
इसके कवर पृष्ठ पर 'संकल्पित भारत, सशक्त भारत' शब्द प्रयोग है, तो पीछे के पृष्ठ पर विचारधारा के 3 बिंदु हैं- राष्ट्रवाद हमारी प्रेरणा, अन्त्योदय हमारा दर्शन, सुशासन हमारा मंत्र। इस तरह भाजपा के संकल्प पत्र में ऐसी अलग ध्वनियां हैं, जो पार्टी के रूप में उसकी पहचान को अन्य दलों से अलग करती है। प्रधानमंत्री ने भारत के वर्तमान और भविष्य की कल्पना को स्पष्ट करने की कोशिश की।
 
उन्होंने कहा कि हमारा ध्यान स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने यानी 2047 के भारत पर है। अगर 21वीं सदी को एशिया की सदी माना जा रहा है तो भारत उसका नेतृत्व करेगा या नहीं? यह प्रश्न हमारे सामने है। नेतृत्व करना है तो 2047 का भारत सभी मामलों में दुनिया का सर्वोपरि राष्ट्र होगा जिसका सुदृढ़ आधार 2019 से 2024 के बीच बन जाएगा।
 
 
इस प्रकार मोदी ने अपने संकल्प पत्र को सामान्य चुनावी घोषणा पत्रों से अलग विचार एवं कार्यों दोनों स्तरों पर एक व्यापक एवं सुस्पष्ट कल्पना का संकल्प साबित करने का प्रयास किया। सभी नेताओं का स्वर यही था कि 2014 में उस समय की चुनौतियों व परिस्थितियों के अनुसार हमने घोषणा पत्र तैयार किया था। सरकार में आने पर उन दिशाओं में काम करते हुए देश को आगे ले आए हैं और अगले 5 वर्षों में उसे सुदृढ़ करेंगे।

 
मोदी ने स्पष्ट किया कि यह संकल्प पत्र 2024 तक के लिए है लेकिन हमने स्वतंत्रता के 75वें वर्ष यानी 2022 तक का भी लक्ष्य निर्धारित किया है ताकि जनता हमारा अंतरिम हिसाब ले सके। राष्ट्रवाद एवं राष्ट्रीय सुरक्षा घोषणा पत्र का मूल स्वर है। राष्ट्रवाद के प्रति पूरी प्रतिबद्धता है, तो आतंकवाद को समाप्त करने तक शून्य सहिष्णुता की नीति पर अडिग रहने का संकल्प। सख्ती से अवैध घुसपैठ को रोकने तथा नागरिकता कानून को हर हाल में पारित कराने का वादा है।

 
साफ कहा गया है कि सुरक्षा के साथ किसी तरह का समझौता नहीं किया जाए और यह सब कुछ करते हुए आश्वासन है कि भारत की सांस्कृतिक पहचान पर आंच नहीं आने देंगे, उनकी रक्षा करेंगे। जहां से संकल्पों की शुरुआत होती है यानी पृष्ठ 13 से उसमें पहला बिंदु ही है- राष्ट्र सर्वप्रथम। इसके बाद आतंकवाद पर सुरक्षा नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा का शीर्षक है। राष्ट्रीय सुरक्षा में ही रक्षा के आधुनिकीकरण, सुरक्षा बलों को सुदृढ़ करने, पुलिस बलों का आधुनिकीकरण, सीमा सुरक्षा तटवर्ती सुरक्षा, वामपंथी उग्रवाद का मुकाबला आदि उपशीर्षक से समयबद्ध लक्ष्य निर्धारित है।

 
उदाहरण के लिए वामपंथी उग्रवाद यानी माओवाद के खतरे को खत्म करने तथा प्रभावित क्षेत्रों में जारी विकास अभियान को और तेज करने की बात है। माओवाद के बारे सीधी घोषणा है कि सख्त कदमों के द्वारा उनको कुछ हिस्सों में सिमटा दिया गया है और इसे जारी रखते हुए अगले 5 वर्षों में उनको पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। यह पहला घोषणा पत्र है जिसमें माओवादियों ही नहीं, किसी भी हिंसक तत्वों के साथ तनिक भी लचीला रुख नहीं अपनाया गया है। बिलकुल निष्ठुरता से उनको मार डालने का संकल्प है।

 
इस तरह भाजपा ने राष्ट्रवाद, सुरक्षा, जम्मू-कश्मीर एवं विदेश नीति को लेकर एकदम साफ चेहरा सामने रख दिया है। यह ऐसा दस्तावेज है जिसमें भाजपा अन्य पार्टियों से एकदम अलग दिखाई पड़ती है। राष्ट्र प्रथम है और सुरक्षा इसकी पहली शर्त है, शेष बातों का स्थान उसके बाद आता है। किसी भी क्षेत्र में हिंसक और अलगाववादी व मजहबी कट्टरपंथियों से बातचीत के एक शब्द नहीं है।
 
आतंकवाद के समाप्त होने तक शून्य सहिष्णुता की नीति का मतलब है कि जब तक एक भी आतंकवादी है या आतंकवादी पैदा होने की संभावना है, तब तक बिलकुल असहिष्णु रहते हुए सुरक्षा बलों की कार्रवाई जारी रहेगी। जम्मू-कश्मीर में जो अलगाववादी और मजहबी कट्टरपंथी हैं, उनके लिए शामत की नीति जारी रहने वाली है।

 
वास्तव में 2014 के संकल्प पत्र की तुलना में राष्ट्रवाद और सुरक्षा के वादे ज्यादा स्पष्ट एवं मुखर हैं। पहली बार जम्मू-कश्मीर से संबंधित संविधान के अनुच्छेद 35ए को खत्म करने का ऐलान है। धारा 370 को खत्म करने जैसे शब्द नहीं हैं लेकिन कहा गया है कि हम जनसंघ से आज तक के अपने रुख पर कायम हैं। 370 हटाने के रास्ते की संवैधानिक एवं राजनीतिक बाधाओं का ध्यान में रखते हुए ही अगले 5 वर्षों में बाहर करने का ऐलान नहीं है। बावजूद रुख पर कायम रहने का मतलब यही है कि जैसे ही मौका मिलेगा, कदम उठाया जाएगा।

 
इस तरह भाजपा ने अपने संकल्प पत्र से देश के सामने साफ कर दिया है कि दो प्रकार की विचारधाराएं राष्ट्र के संदर्भ में हैं। एक का नेतृत्व भाजपा के हाथों है जिसका राष्ट्रवाद संस्कृति से आच्छादित है, सुरक्षा उसके लिए सर्वोपरि है जिसमें कोई किंतु-परंतु नहीं। दूसरी ओर एक विचारधारा है, जो 370 के प्रति प्रतिबद्धता जताता है, देशद्रोह कानून खत्म करने का वादा करता है, सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून अफस्पा को कमजोर करने का ऐलान कर रहा है, जम्मू-कश्मीर में इसकी समीक्षा का वचन देता है तथा सुरक्षा बलों की संख्या कम करने को प्राथमिकता घोषित करता है।

 
तो दो में से एक विकल्प का चयन देश को करना है। नागरिकता कानून तथा तलाक कानून बनाने की बात है। कांग्रेस ने दोनों को न रखने की घोषणा की है। इस घोषणा का अर्थ है कि भाजपा राजनीतिक जोखिम उठाते हुए भी पड़ोस से पीड़ित होकर आने वाले हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन और ईसाई को नागरिकता देने के अपने स्टैंड पर कायम है। लंबे समय बाद भाजपा का अपने मूल मुद्दों पर इतना मुखर घोषणा पत्र आया है।

 
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए रास्ता प्रशस्त करने को लेकर पिछले वर्षों की तुलना में ज्यादा स्पष्टता है। प्रश्न किया जा सकता है कि भाजपा ने 5 वर्षों में जब अयोध्या पर एक भी कदम नहीं उठाया तो कैसे विश्वास किया जाए? एकमात्र भाजपा ही है, जो खुलकर घोषणा पत्र में इसे जगह दे रही है। दूसरे, पिछले 6 महीने में भाजपा अपने मुद्दों पर जिस तरह मुखर हुई है, उससे उम्मीद बंधती है। प्रधानमंत्री ने कहा भी कि मूल एजेंडे पर काम करने से कुछ लोगों को तकलीफ भी होती है यानी अपने एजेंडे पर काम करने में वे इसका विचार नहीं करेंगे कि कौन लोग विरोध में खड़े हैं?

 
भाजपा ने स्वतंत्रता के 75 साल पूरे होने यानी 2022 तक के लिए 75 लक्ष्य 75 कदमों के रूप में सामाजिक-आर्थिक विकास का जो समयबद्ध लक्ष्य तय किया गया है, अगर उस दिशा में कम काम हुआ तो भी 3 साल बाद ज्यादा बेहतर सामाजिक-आर्थिक रूप से विकसित तथा बढ़े हुए आत्मविश्वास का भारत मिलेगा। इनमें विस्तार से जाना संभव नहीं।
 
कृषि, गांव, शहर के विकास से लेकर घर, पानी, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी आम सुविधाओं का पूरा खाका है। इसके अलावा भी ऐसी बातें हैं, जो आर्थिक एवं सामाजिक विकास को ताकत देंगे, जैसे अगले 5 वर्षों में कृषि क्षेत्र में 25 लाख करोड़ रुपया तथा बुनियादी ढांचे में 100 लाख करोड़ रुपया का निवेश। लक्ष्य सीधा है। कृषि, ग्रामीण विकास से लेकर शहरी क्षेत्रों के विकास तथा उद्योगों एवं कारोबार को बढ़ावा देने वाले सभी तरह का बुनियादी ढांचा उपलब्ध करा देना। गांव पूरी तरह सड़कों से जुड़ जाएं, सिंचाई उपलब्ध हों, कृषि से संबंधित उद्योगों को मध्यम एवं लघु उद्योग के अंदर बढ़ाया जाए। इसके लिए कौशल बढ़ाने का योजनाबद्ध कार्य हो तो अगले 5 वर्ष में भारत काफी हद तक बदल सकता है।

 
यही बातें उद्योग, सेवा आदि श्रेत्र पर भी लागू होती हैं इसलिए 8 प्रतिशत विकास दर तथा निर्यात दोगुना करने का लक्ष्य अव्यावहारिक नहीं है। सीमांत किसानों और छोटे दुकानदारों को पेंशन की सुविधा देने का वादा भी महत्वपूर्ण है। एक प्रभावी राष्ट्रीय व्यापारिक आयोग के गठन से बहुत पुरानी मांग पूरी होगी। व्यापारियों को अपनी मांग या शिकायत आदि के लिए एक आयोग उपलब्ध होगा।
 
तो कुल मिलाकर हम भाजपा के संकल्प पत्र को अपनी पहचान कायम रखते हुए हर दृष्टि से सुरक्षित व राष्ट्र के समग्र उत्थान के व्यापक विजन का व्यावहारिक रूपांतरण भी कह सकते हैं। कम से कम भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में स्वतंत्रता के 75वें वर्ष को प्रेरणा लेने के महत्वपूर्ण अवसर के रूप में सामने रखा तो। कांग्रेस को स्वतंत्रता के 75 वर्ष की महत्ता का भान भी नहीं हुआ।

 
प्रधानमंत्री ने 100वें वर्ष यानी 2047 तक के भारत की बात की है। हम भाजपा और मोदी के जितने भी विरोधी हों, इतनी कल्पना करने का माद्दा तो आज न किसी दूसरे दल में दिखता है और न किसी नेता में ही। 

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