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food blogging : खिचड़ी और ‘नेशन का टशन’

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स्वरांगी साने

डेस्टिनेशन- खिचड़ी नेशन, इंदौर 
आप तो बस इच्छा कीजिए आपको किस तरह की खिचड़ी खानी है और आपकी सेवा में हाजिर है। इंदौर में खिचड़ी को बीमारों वाला खाना वैसे भी नहीं माना जाता। इस शहर के होटलों में मिलने वाली बटर खिचड़ी और ठेले पर मिलती साबूदाने की खिचड़ी छककर खाने वाले जानते हैं कि भगवान् के 56 भोग में शामिल खिचड़ी का अपना आनंद कैसे हैं। अब तो इस शहर में एक नया डेस्टिनेशन खुल गया है- ‘खिचड़ी नेशन’ और शहर की प्रसिद्ध ‘56 दुकान’ के बाद यह आंकड़ा इस जगह से भी जुड़ गया है जहां 56 तरह की खिचड़ी मिलती है।
 
पर खिचड़ी और ‘नेशन का टशन’ समझ नहीं आता तो हम सोचते हैं शायद इस देश को दाल-चावल के अलावा दूसरा जो सबसे आम भोजन जोड़ता है वह है दाल-चावल से बनी खिचड़ी! स्मित मुस्कान के साथ इस दुकान के मालिक जयंत अग्रवाल बताते हैं कि खिचड़ी मतलब केवल दाल-चावल नहीं, खिचड़ी मतलब हर प्रांत की अपनी विशेषता, अपना ज़ायका और अपने फ़्लेवर की सुगंध...
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हलकी-फुलकी खिचड़ी से लेकर तड़के वाली तक और देसी से लेकर ऐक्ज़ॉटिक च्वॉइस में चाइनीज़, अमेरिकन कॉर्न, इटालियन टेस्ट की मशरूम पेस्टो खिचड़ी से लेकर रेड थाई और अरेबिक तक हर तरह की खिचड़ी यहां मिल जाएगी। अभी-अभी साल-दो साल पहले शुरू किए अपने इस व्यवसाय के प्रति उनका पैशन है कि आपकी उत्सुकता उनके उत्साह को बढ़ाती है और वे मद्धम मुस्कान और धीमी आवाज़ में बड़े सॉफ़िस्टिकेटेड तरीके से मसाला खिचड़ी और खड़ा मसाला खिचड़ी और हींग वाली खिचड़ी के बारे में बताने लगते हैं। 
 
इस डेस्टिनेशन पर आइए..उनके ‘लोगो’ में अशोक चक्र के प्रतीक को देखिए, भारत को देखिए और भारत देखने के लिए पूरे देश का दौरा करने की भी ज़रूरत नहीं...यहां बैठिए और देश के हर हिस्से के क्विज़िन का आनंद ले लीजिए। यदि आप पक्के फ़ूडी हैं तो मैन्यू कार्ड में छपे हर प्रांत की खिचड़ी के नाम ही आपकी भूख बढ़ाने के लिए काफी है जैसे अमृतसरी छोला खिचड़ी, बीकानेरी गेंहू खिचड़ी, मुंबइया भाजी खिचड़ी, दक्षिण भारत की बेसिबली खिचड़ी, कश्मीरी मूंग दाल खिचड़ी, हिमाचल ब्लैक दाल खिचड़ी, भोजपुरी खिचड़ी, बंगाली नीम भाजा खिचड़ी, आंध्र स्टाइल खिचड़ी....
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अब यदि आप अच्छे शेफ़ हैं और रसोई के बारे में जानते हैं तो आपको पता होगा आंध्रप्रदेश में खड़ी काली मिर्च, भुने काजू, कड़ी पत्ता और जीरे का फ्‍लेवर उस प्रांत की ख़ासियत बताता है या बंगाल की खिचड़ी में सरसों का तेल और नीम के पत्ते का कसैलापन उसका ज़ायका बढ़ाता है जबकि भोजपुरी खिचड़ी में बेसन अलग स्वाद देता है। मथुरा में मिलने वाली मखाने वाली खिचड़ी और गुजरात की सब्जियों से बनी बघार वाली खिचड़ी भी इस डेस्टिनेशन पर है।
 
यदि आपका व्रत-उपवास है और यदि नहीं भी है तो वैसे ही फरियाली खिचड़ी, पुदीने की साबूदाना खिचड़ी या लाल-लाल स्पाइसी खिचड़ी खा लीजिए। ओह, यदि आप डाइट पर है तो यहां डाइट खिचड़ी भी है, एकदम सिंपल मूंग दाल जीरे की खिचड़ी भी, दही खिचड़ी भी और यदि आप हेल्थ कॉन्शस है तो पालक वाली पौष्टिक खिचड़ी ले लीजिए। ज़रा हटके में मारवाड़ी परिवारों की पापड़ चूरी खिचड़ी, बिना चावल की खिचड़ी, सोया कीमा खिचड़ी, अचारी खिचड़ी भी है। आपको लग रहा है पूरा मैन्यू कार्ड बता रहे हैं, जी नहीं जनाब, हम तो कुछ स्वाद ज़िंदगी का बता रहे हैं...चाहे तो आप आजमाकर देख लीजिए। और हां, साथ में केशर पानी, गुलाब खीर, ड्रायफ्रूट हलवा भी आपको स्वाद की मधुर दुनिया में ले जाने के लिए स्वागतातुर है.... 
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