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हिंदुस्तान में पाकिस्तान का झंडा फहराना आम बात है?

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डॉ. प्रवीण तिवारी

बिहार के नालंदा में एक महिला शबाना अनवर ने पाकिस्तान का झंडा फहराया। इस घटना के सामने आने के बाद पूरे इलाके में तनाव पैदा हो गया। महिला के परिवार ने सफाई देते हुए कहा कि बेटा पैदा होने के लिए उन्होंने मन्नत मांगी थी और वो पिछले कई सालों से इस तरह का झंडा फहरा रहे हैं। इस महिला का पति विदेश में मजदूरी करता है। बेटा पैदा होने की बात पुलिस को हजम नहीं हुई, क्यूंकि बेटे की उम्र 5 साल है और इलाके के लोगों का दावा है कि कई सालों से झंडा फहराने की बात झूठी है क्यूंकि उन्होंने इस तरह का झंडा पहले नहीं देखा। पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर लिया। 
 
इस मामले में कई प्रतिक्रियाएं आईं। बिहार सरकार ने इस सिरफिरों का काम तक कहा, लेकिन सबसे दिलचस्प प्रतिक्रिया एनसीपी नेता तारिक अनवर की आई। उन्होंने कहा मुस्लिम त्योहारों के मौके पर अक्सर इस तरह के झंडे फहराए जाते हैं। ये हरे रंग के होते हैं और इनमें चांद तारा बना होता है। शायद इसे देखकर गलत फहमी हो गई होगी। उनकी इस बात को सुनकर मुझे भी दिल्ली से कही जाते हुए रामपुर और उत्तर प्रदेश के कुछ और इलाकों का एक दृश्य याद आ गया। 
 
कुछ समय पहले की बात है, जब मैं अपनी कार से उत्तराखंड जा रहा था। इन इलाकों में मैंने इस तरह के कई झंडे देखे थे और बहुत आश्चर्य हुआ था कि कैसे पाकिस्तान का झंडा फहराया जा सकता है। वहां भी पूछताछ में यही पता लगा कि ये तो हर त्योहार पर लगाए जाते हैं।
 
इस देश में हर बात में सांप्रदायिकता को तलाशने वाले लोगों को इस मुद्दे पर भी ध्यान देना चाहिए। यह मामला सिर्फ किसी देश का झंडा फहराने का नहीं है, यह बात जेहनियत की है। अनपढ़ और गंवार लोगों को आसानी से बरगलाया जा सकता है। यह बात किसी धर्म और मजहब की नहीं है, यह बात इस देश के प्रति समर्पण और इसके प्रतीकों के सम्मान की है। बात-बात पर भारतीय संविधान का हवाला दिया जाता है और अभिव्यक्ति की आजादी की बात कही जाती है। इसी देश में खोजने निकलेंगे तो देश द्रोह की कई हरकतें और बातें देखने और सुनने को मिल जाएंगी, लेकिन इन बातों को आखिर पालता पोसता कौन है?
 
मैं निजी तौर पर नीतीश कुमार के काम का प्रशंसक हूं। उन्होंने शराब बंदी के साथ पूरे देश के सामने एक बेहतरीन मिसाल रखी है। वे लालू यादव जैसे नेता के साथ निभा रहे हैं, ये भी कम साहस का विषय नहीं है। लेकिन इस घटना के बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की प्रतिक्रिया ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या सचमुच तुष्टिकरण की राजनीति करते-करते हम इतने आगे निकल आए हैं कि देश प्रेम और देश द्रोह का फर्क भूल गए हैं। यह हमारे देश की स्थिति है, कि यहां देश के खिलाफ कोई काम करने वालों के बारे में दस बार सोचना पड़ता है, कहीं मुझे किसी धर्म विशेष का विरोधी तो करार नहीं दे दिया जाएगा? कहीं मुझे किसी धर्म विशेष का कट्टर समर्थक तो नहीं कह दिया जाएगा?
 
गिरिराज सिंह ने कहा कि आतंकी को अपनी बेटी कहने वाले नेताओं के राज में आप क्या उम्मीद कर सकते हैं। इशरत जहां, बाटला हाउस एनकांउटर आदि जैसे मुद्दों पर भी राष्ट्रहित से ऊपर वोटहित को रखा गया। पूरा भगवा आतंकवाद सिर्फ तुष्टिकरण के लिए खड़ा कर दिया गया। आज इस घटना के बाद यह लग रहा है कि यदि देश में सबके लिए समान कानून बनाकर राजनीति से ऊपर उठकर देशहित के भाव को जागृत नहीं किया गया, तो हर छत पर ऐसे ही झंडे दिखाई पड़ेंगे। 
 
आखिर में यह बताना जरूरी है, कि सिर्फ पाकिस्तान का ही नहीं, सेक्शन 7, फ्लैग कोड के तहत किसी अन्य देश का झंडा फहराना कानूनन अपराध है। जब बात पाकिस्तान की होती है तो सवाल और अहम होता है क्यूंकि ये कभी हमारा ही हिस्सा था। इसके अलग होने की जड़ में मजहब था। मजहब की वह दीवार अब भी देखने को मिलती है, लेकिन हिंदुस्तान में रहने वाले हर हिंदुस्तानी को समझना होगा, कि ये पाकिस्तान नहीं और पाकिस्तान में हिंदुओं की तो जो हालत है वो है ही, मुसलमानों की भी हालत अच्छी नहीं। एक झंडा इस अखंड भारत को पाकिस्तान नहीं बना सकता, लेकिन देशद्रोह की एक घटिया सोच ऐसा कर सकती है। इससे बचिए।

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