Publish Date: Wed, 11 Jan 2017 (12:21 IST)
Updated Date: Wed, 11 Jan 2017 (12:28 IST)
-रवीन्द्र गुप्ता
आजकल यातायात में दिन-प्रतिदिन वृद्धि होती जा रही है। प्रतिदिन देशभर में हजारों गाड़ियां सड़कों पर आ जाती हैं। सड़कें वे ही की वे ही हैं, लेकिन यातायात दिन-पर-दिन बढ़ता चला जा रहा है। सिग्नल पर भी काफी इंतजार करना होता है। इससे ऐसा लगता है कि एक दिन पैदल चलना यातायात की तुलना में अधिक गतिशील होगा।
दौड़ता-भागता जीवन
आजकल की दौड़ती-भागती जिंदगी में स्वयं का निजी वाहन व मोबाइल होना प्रतिष्ठा का विषय न होकर आवश्यकता का विषय भी हो गया है। अब लोग पहले की तरह रेल-बस आदि अन्य साधनों का इंतजार न करते हुए स्वयं के साधनों से 100-200 किमी तक यूं ही चले जाया करते हैं। वे सोचते हैं कि टैक्सी से रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड जाने में लगने वाले समय व धन की तुलना में गाड़ी में ईंधन डलवाकर 'अपनी सुविधा' से मुकाम तक जाना कहीं उचित रहेगा। इस एक कारण से भी सड़कों पर ट्रैफिक बढ़ता जा रहा है।
आमदनी 5 हजार, गाड़ी 50 हजार की
आजकल छोटी-मोटी आमदनी वाले भी बैंक व किस्त के माध्यम से गाड़ियां खरीद लिया करते हैं। 5 हजार की आमदनी वाला आदमी भी 50 हजार की गाड़ी का ख्वाब देखने लगता है व देर-सवेर गाड़ी खरीद भी लिया करता है।
तब और अब में आ गया है अंतर
कोई 20-25 साल पहले की बात है। तब वाहन खरीदना इतना आसान नहीं था। वाहन प्राप्ति के लिए पहले एड्वांस बुकिंग करवानी होती थी। इस बुकिंग के कई दिनों (या महीनों) बाद व्यक्ति का गाड़ी खरीदने हेतु नंबर आता था। लेकिन जबसे पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहराव ने उदारीकरण (1991) की नीति अपनाई, तब से अब तक इन 25 सालों में काफी बदलाव आ गया है। अब आपके पास नकद पैसे हो तो शोरूम पर जाकर सब्जी-भाजी की तरह गाड़ी खरीदकर घर ला सकते हैं और अगर आपके पास अधिक पैसे नहीं हों तो बैंकों द्वारा दी जा रही किस्त-सुविधा तो है ही! बैंकों व फाइनेंस संस्थानों द्वारा काफी 'उदारतापूर्वक' इस हेतु लोन दिया जाता है जिसका लाभ उठाकर लोग गाड़ियां खरीद लिया करते हैं।
कितने वाहन हैं भारत में?
भारत में हर 7 साल में दोगुने वाहन रजिस्टर्ड हो रहे हैं और 2013 तक देश में 182 मिलियन वाहन रजिस्टर्ड थे इनमें से 133 मिलियन वाहन दोपहिया थे और कार, जीप और टैक्सियां 25 मिलियन थीं। वाहनों की संख्या बढ़ने का एक कारण यह भी है कि लाखों परिवार कार और मोटरसाइकल 'स्टेटस सिंबल' के लिए भी खरीद लेते हैं। ये कार और मोटर बाइक खुद को समृद्ध दिखाने के लिए खरीदते हैं जिसका एक प्रभाव यह भी हो रहा है कि इससे पेट्रोल-डीजल की खपत बढ़ती जा रही है।
इंदौर में 15 लाख वाहन
कुछ समय पहले एक खबर में पढ़ा था जिसके अनुसार मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में ही कोई 15 लाख से अधिक वाहन हैं। वर्तमान में इंदौर शहर की आबादी कोई 30 लाख के करीब है, वाहनों की संख्या इसकी आधी यानी कि 15 लाख! इसका अर्थ यह हुआ कि हर 2 व्यक्तियों के पीछे 1 वाहन है। एक समाचार के अनुसार कोइंबटूर (तमिलनाडु) के बाद भारत में सबसे ज्यादा वाहन इंदौर सिटी में ही हैं तथा इनकी संख्या में दिनोदिन वृद्धि ही होती जा रही है।
बढ़ भी रही हैं दुर्घटनाएं
इन वाहन वृद्धि के साथ ही इसका चिंताजनक पहलू यह भी उभरकर सामने आ रहा है कि वाहनों के अंधाधुंध चालन के परिणामस्वरूप दुर्घटनाएं भी बढ़ती जा रही हैं। दुर्घटनाओं में कई लोगों का जीवन समाप्त हो जाता है तो कई लोग जीवनभर के लिए अपाहिज हो जाते हैं। कइयों की ब्रेन डेथ हो जाती है तो कई जिंदगीभर के लिए पर-निर्भर हो जाते हैं।
यातायात नियमों का हो पालन
अक्सर दुर्घटनाओं का कारण यातायात नियमों का उल्लंघन करना होता है। लोग इतनी जल्दी में रहते हैं कि वे ग्रीन सिग्नल (Green Signal) होने के पहले ही निकलने की कोशिश करते हैं। इस चक्कर में अगल-बगल या आमने-सामने से आ रहे वाहनों से वे जा भिड़ते हैं। यातायात नियमों की सबसे प्रसिद्ध उक्ति 'दुर्घटना से देर भली' को वे नजरअंदाज कर जाते हैं, परिणामस्वरूप अस्पताल में ही आंखें खुलती हैं कइयों की या 'स्वर्ग' में।
हेलमेट का हो प्रयोग
हेलमेट के बारे में सरकार काफी प्रचार-प्रसार करती है, लेकिन लोग हैं कि हेलमेट लगाने को तैयार ही नहीं। हेलमेट से मानव जीवन की काफी सुरक्षा होती है। हेलमेट पहनने से सिर का काफी हद तक बचाव होता है तथा मनुष्य ब्रेन-डेथ का शिकार होने से बच जाता है। मानव जीवन काफी अमूल्य है। इसकी जितने संभव हिफाजत की जाए, उचित रहता है। अपना जीवन बेवजह जोखिम में डालना कतई बुद्धिमानी नहीं है तथा अपने परिवार को बेसहारा छोड़ना तो नासमझी ही कहा जाएगा।
कई बार चला है 'हेलमेट अभियान'
हेलमेट को लेकर पुलिस विभाग ने कई बार अभियान चलाया है, लेकिन यह अभियान कभी भी अपने सिरे से अंजाम तक नहीं पहुंचा। थोड़े दिन की सख्ती, चालानी कार्रवाई के बाद यह अभियान हमेशा की तरह टांय-टांय फिस्स होकर रह जाता है। राजनीतिक हस्तक्षेप भी इसके असफल होने का सबसे बड़ा कारण है। 3 सवारी लेकर वाहन चलाना, बिना हेलमेट गाड़ी चलाना, वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करना व यातायात नियमों का उल्लंघन करना आए दिन की बात हो गई है।
हवा में 'उड़ते' नौजवान
कई नौजवानों को भी हम सभी ने देखा है कि वे 'हवा में उड़ने वाली स्टाइल' में गाड़ी काफी तेज गति से चलाते हैं तथा उसे लहराते हुए भी चलाते हैं। इससे दुर्घटना का हमेशा भय बना रहता है। वे वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करने से भी नहीं चूकते। इस आशय की कई खबरें देखी गई हैं कि मोबाइल पर बात करने के परिणामस्वरूप दुर्घटनावश इस प्रकार के नौजवानों की 'स्वर्ग में सीट' पक्की हो गई थी।
शराब पीकर वाहन चलाना
अधिकतर ट्रक ड्राइवर, लॉरी व भारवाहन चालक शराब पीकर वाहन चलाते हैं। इससे भी काफी दुर्घटनाएं होती हैं। ब्रीथ एनालाइजर (मद्यपान सेवन को जांचने वाली मशीन) से जांच व चालानी कार्रवाई के बाद भी कई वाहन चालक अपनी आदत से बाज नहीं आते। वे अपने साथ ही कई अन्य लोगों की जान भी जोखिम में डाल देते हैं। वे खुद तो दुर्घटनावश मरते ही हैं, साथ ही कई अन्य दूसरों का परिवार भी उजाड़ दिया करते हैं। इस पर सख्ती से रोक लगाना भी जरूरी है।
उपरोक्त सारी बातों का लब्बोलुआब यही है कि आजकल के गतिशील जीवन में वाहन की अनिवार्यता के साथ ही यातायात नियमों का पालन करते हुए अपने साथ ही दूसरों के अमूल्य जीवन का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
इस एक उक्ति का हमेशा ध्यान रखा जाना चाहिए कि-
'दुर्घटना से देर भली।'
webdunia
Publish Date: Wed, 11 Jan 2017 (12:21 IST)
Updated Date: Wed, 11 Jan 2017 (12:28 IST)