Publish Date: Mon, 23 Jan 2017 (12:42 IST)
Updated Date: Mon, 23 Jan 2017 (12:45 IST)
नई दिल्ली। डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने गांवों में आधार-पे का प्रचार-प्रसार शुरू कर दिया है। आधार-पे के तहत सिर्फ फिंगरप्रिंट के जरिए ट्रांजैक्शन किया जा सकता है। वास्तव में आधार-पे पहले से चल रहे आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (AEPS) का व्यापारी वर्जन है।
ऑनलाइन और डेबिट-क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन में जहां पासवर्ड और पिन की जरूरत होती है वहीं आधार-पे के इस्तेमाल को काफी सरल बनाने की कोशिश की जा रही है। किसी भी पेमेंट के लिए ग्राहक को अपना आधार नंबर, उस बैंक का नाम जिससे पैसे का भुगतान करना है और फिंगरप्रिंट देना होगा।
UIDAI के सीईओ एबी पाण्डेय ने बताया कि आधार-पे सभी ऐंड्रॉयड फोन पर चलता है। इसके साथ बस फिंगर बायोमेट्रिक डिवाइस जोड़ना होगा। आधार-पे के जरिए भुगतान लेने वाले दुकानदारों को 2,000 रुपए की बायोमेट्रिक डिवाइस लेनी पड़ेगी।
इस ऐप से बिना किसी कार्ड और पिन नंबर के डिजिटल लेन-देन करना संभव होगा। आधार-पे ऐप को प्रचलित करने के लिए सरकार ने बैंको से प्रति ब्रांच 30-40 दुकानदारों को एनरोल करने के लिए कहा है जिससे वह अपने ग्राहकों को कैशलेस पेमेंट की सुविधा दे सकें।
दुकानदारों को लंबे समय तक इसका इस्तेमाल करने पर इंसेंटिव देने की है। सरकार की योजना के मुताबिक दुकानदारों की इस लागत को जल्द से जल्द इंसेटिव के जरिए अदा करने की है जिससे वह लंबे समय तक इस माध्यम का इस्तेमाल करते हुए अपने ग्राहकों को कैशलेस पेमेंट की सुविधा मुहैया करा सकें।
गौरतलब है कि आधार असक्षम भुगतान (एनेबल्ड पेमेंट सिस्टम) व्यवस्था की अपेक्षा आधार-पे बाकी डिजिटल पेमेंट माध्यमों से ज्यादा सुरक्षित और सरल है। इस माध्यम का इस्तेमाल करने वाले सभी व्यापारी बैंक में रजिस्टर्ड होंगे और ग्राहकों का बैंक खाता उनके आधार कार्ड से जुड़े रहने के कारण इसके गलत इस्तेमाल की गुंजाइश नहीं रहेगी।