Publish Date: Sun, 28 May 2017 (15:10 IST)
Updated Date: Sun, 28 May 2017 (16:20 IST)
नई दिल्ली। भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने सत्ता में आने के 3 वर्ष होने के दौरान किसानों को किसी फसल की उत्पादन की लागत से 50 प्रतिशत अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देने के अपने चुनावी वादे को पूरा करने का प्रयास किया है।
शाह ने यहां एक साक्षात्कार में कहा कि अगर मूल्य गणना से भूमि की लागत को बाहर कर दिया जाए तो किसानों को दिया जाने वाला न्यूनतम समर्थन मूल्य अब उत्पादन लागत से 43 प्रतिशत से अधिक है।
उन्होंने कहा कि कोई भी सरकार उत्पादन की लागत की गणना के लिए स्वामीनाथन के फॉर्मूले को पूरा नहीं कर सकती, क्योंकि इसमें भूमि की लागत भी शामिल है, जो ज्यादातर किसानों को विरासत में मिलती है और जिसकी कीमत पिछले वर्षों में कई गुना बढ़ चुकी है। भाजपा ने कई अन्य वादों के अलावा उत्पादन लागत से 50 प्रतिशत अधिक का एमएसपी निर्धारित करने का वादा कर वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भारी सफलता प्राप्त की थी।
प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन की अगुवाई वाली राष्ट्रीय कृषक आयोग (एनसीएफ) द्वारा वर्ष 2006 में पहली बार इस मूल्य की सिफारिश की गई थी।
शाह ने कहा कि एक मुद्दे को लेकर विवाद है। स्वामीनाथन ने भूमि की कीमत को शामिल करते हुए (एमएसपी पर) फॉर्मूला तैयार किया जिसे कभी भी लागू करना संभव नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादों की कुल उत्पादन लागत में भूमि के मूल्य को नहीं गिना जा सकता, क्योंकि अधिकांश मामलों में किसानों ने यह कृषि भूमि अपने पूर्वजों से विरासत में प्राप्त की होती है और उस भूमि की कीमत अब करोड़ों में है। उन्होंने कहा कि अगर इस पहलू को छोड़ दिया जाए तो हम 43 प्रतिशत देने की स्थिति में पहुंचे हैं।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि कृषि फसलों के उत्पादन की कुल लागत में भूमि की लागत लगभग 25 से 30 प्रतिशत होती है। अगर भूमि की लागत को बाहर रखा जाए तो मौजूदा समय में अधिकांश फसलों के उत्पादन की लागत के मुकाबले एमएसपी 50 प्रतिशत से कहीं अधिक है। स्वामीनाथन की सिफारिशें आर्थिक तर्कों पर आधारित नहीं हैं। (भाषा)