छह दिन में अनशन के दौरान अन्ना हजारे का वजन 4 किलो कम हुआ

सोमवार, 4 फ़रवरी 2019 (22:20 IST)
रालेगण सिद्धि (महाराष्ट्र)। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे का बीते 6 दिनों में अनशन के दौरान करीब सवा 4 किलोग्राम वजन कम हो गया है। वे लोकपाल की नियुक्ति को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे हैं।

हजारे के स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बढ़ने के बीच शिवसेना और मनसे ने भाजपा नीत सरकार से हजारे का जीवन बचाने के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की।
 
हजारे ने केंद्र तथा महाराष्ट्र में लोकपाल एवं लोकायुक्त नियुक्ति और किसानों के मुद्दों को लेकर महाराष्ट्र के अहमदनगर में अपने पैतृक गांव रालेगण सिद्धि में 30 जनवरी को अनशन शुरू किया था।

हजारे को देखने वाले डॉक्टर धनंजय पोटे ने सोमवार को कहा कि अन्ना का अब वजन 71.1 किलोग्राम है और अनशन शुरू करने के समय से उनका सवा 4 किलोग्राम वजन घट चुका है। उनका रक्तचाप भी अनशन के कारण बढ रहा है। गांव वालों ने हजारे के स्वास्थ्य पर नजर रखने तथा प्रतिदिन रिपोर्ट तैयार करने के लिए पोटे से कहा है। सरकारी अधिकारियों सहित कई लोगों ने बीते 6 दिन में हजारे से बात करके उनसे अनशन खत्म करने को कहा है।
 
मनसे प्रमुख राज ठाकरे तथा 'जलपुरुष' नाम से विख्यात राजेंद्र सिंह ने सोमवार को हजारे से मुलाकात की और उनके आंदोलन को अपना समर्थन दिया। ठाकरे ने हजारे से कहा कि वे बेकार सरकार के लिए अपने जीवन का बलिदान न दें। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने उनसे समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण की तरह भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करने को कहा। उद्धव ने रविवार को हजारे के आंदोलन को समर्थन दिया था।
 
शिवसेना ने सेामवार को अपने मुखपत्र 'सामना' में संपादकीय लिखकर भाजपा नीत सरकार से उनकी जिंदगी बचाने की अपील की। हजारे यह भी चेतावनी दे चुके हैं कि अगर मोदी सरकार ने अपने वादे पूरे नहीं किए तो वे पद्मभूषण पुरस्कार वापस कर देंगे। राज ठाकरे ने हजारे से अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त करने और भाजपा नीत सरकार को दफन करने के लिए उनके साथ मिलकर राज्य का दौरा करने का अनुरोध किया।
 
मनसे नेता और हजारे ने यादव बाबा मंदिर परिसर के एक बंद कमरे में 20 मिनट बैठक की। बैठक के बाद ठाकरे ने हजारे के प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों को संबोधित किया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार पर देश को धोखा देने एवं अपनी ही पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र को पूरा नहीं करने का आरोप लगाते कहा कि मैंने अन्ना से अपील की है कि वे इस बेकार सरकार के लिए अपने जीवन का बलिदान नहीं दें। मैंने उनसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके किसी वादे पर भरोसा नहीं करने को कहा है। ठाकरे ने कहा कि मोदी ने 18 दिसंबर 2013 को लोकपाल विधेयक के समर्थन में ट्वीट किया था।
 
ठाकरे ने कहा कि मोदी सरकार के 5 साल पूरे हो चुके हैं लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई काम नहीं हुआ। वर्ष 2013 में अन्ना के आंदोलन के कारण ही आज लोग सत्ता में हैं। उन्हें यह भूलना नहीं चाहिए। (दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद) केजरीवाल को अन्ना के आंदोलन के कारण पूरा देश जानता है। अब वे (केजरीवाल) सत्ता में हैं और अन्ना के स्वास्थ्य के प्रति कोई चिंता व्यक्त नहीं कर रहे।
 
इससे पहले सुबह राजेंद्र सिंह ने भी हजारे से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य पर चिंता व्यक्त की। सिंह ने कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर लोकपाल एवं लोकायुक्त कानून 2013 में खामियों और किसानों की समस्याओं पर चर्चा की। 

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