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क्या होता है 'ब्रेक मानसून', क्यों अचानक कम हो जाती है बारिश...

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गुरुवार, 12 अगस्त 2021 (12:49 IST)
नई दिल्ली। पिछले एक हफ्ते में दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ गया है। इस वजह से ब्रेक मानसून की स्थिति बन गई है और देश में बारिश की कमी महसूस की जा रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार देश में कमजोर मानसून का मौजूदा दौर अगले 15 अगस्त तक जारी रहने की संभावना है। 16 अगस्त से प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की गतिविधियां बढ़ जाएंगी।
 
अभी कुछ ही दिनों पहले मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार पश्चिम बंगाल में नदियां उफान पर थी। देश के कई राज्यों में बाढ़ के हालात बने हुए थे। गांवों के डूबने और राहत और बचाव कार्यों की खबरें आ रही थी। अचानक मानसून की गतिविधियों में मानो ब्रेक लग गया और बारिश कम हो गई।
 
मौसम एजेंसी स्कायमेट के अनुसार, ब्रेक मानसून की स्थिति 15 या 16 अगस्त तक जारी रहने की उम्मीद है। 10 से 15 अगस्त के बीच उत्तर पश्चिम भारत का मौसम शुष्क रहने की संभावना है। लेकिन इस अवधि के दौरान हिमालय के तराई इलाकों में मूसलाधार बारिश होगी, जिससे भूस्खलन हो सकता है। हिमाचल प्रदेश की तलहटी में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है।
 
क्या होता है ब्रेक मानसून : जब मानसून टर्फ हिमालय की तलहटी में शिफ्ट हो जाती है और गंगा के मैदानी क्षेत्रों और देश के मध्य भागों में शुष्क पछुआ हवा द्वारा आर्द्र पूर्वी हवा की जगह ले लेती है। इस परिस्थिति में देश के अधिकांश हिस्सों में मौसम लगभग शुष्क हो जाता है। पश्चिमी हिमालय राज्यों, उत्तर प्रदेश तथा बिहार के तराई वाले जिलों सहित पूर्वोत्तर राज्यों में वर्षा की गतिविधियां अधिक होती हैं। देश के पश्चिमी तट पर भी बारिश में कमी होती है। इस स्थिति को ब्रेक मानसून कहते हैं।
 
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कहां कितनी बारिश : आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक 1 जून से 10 अगस्त के बीच देश में सामान्य से 5 फीसदी कम बारिश हुई। आईएमडी के पूर्वी और पूर्वोत्तर प्रभाग ने 12 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की है, जबकि उत्तर पश्चिम भारत और मध्य भारत के मौसम कार्यालय ने क्रमशः माइनस 2 और 7 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की है। दक्षिण प्रायद्वीप मौसम प्रभाग में अब तक सामान्य से 8 फीसदी अधिक बारिश हुई है।
 
बढ़ी इन राज्यों की चिंता : मानसून के कमजोर होने से गुजरात, राजस्थान और मध्यप्रदेश के कई इलाकों में चिंता दिखाई दे रही है। गुजरात में इस वर्ष सामान्य से 45 प्रतिशत कम बारिश हुई। गुजरात, अरावली और गांधीनगर के 33 जिलों में इस मौसम में अब तक 'सबसे कम' बारिश हुई है जबकि 31 जिलों में 'कम' बारिश हुई है। राजस्थान और मध्यप्रदेश के भी कई जिलों में अपेक्षा के काफी कम बारिश हुई है।

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