Publish Date: Thu, 14 Jan 2021 (18:37 IST)
Updated Date: Thu, 14 Jan 2021 (18:41 IST)
अपनी जान देकर कई लोगों की जिंदगी बचाने की शायद यह सबसे मासूम मिसाल है। एक 20 महीने की बच्ची अंगदान कर के 5 लोगों की जिंदगी में उजाला कर गई।
यह खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया में इसकी खूब चर्चा हो रही है। लोग इस बच्ची को लेकर भावुक भी हैं और इस खबर को मिसाल बताकर वायरल भी कर रहे हैं।
मामला देश की राजधानी दिल्ली का है। यहां के रोहिणी इलाके की 20 माह की बच्ची धनिष्ठा ने मौत के बाद भी समाज के लिए एक महान मिसाल कायम की है और सबसे कम उम्र की कैडेवर डोनर बन गई। इस छोटी सी बेटी ने मरने के बाद पांच मरीजों को अपने अंग दान किए। इस छोटी बच्ची का हृदय, लिवर, दोनों किडनी एवं दोनों कॉर्निया सर गंगाराम अस्पताल ने निकाल कर पांच रोगियों में प्रत्यारोपित किए है।
दरअसल, 8 जनवरी की शाम को धनिष्ठा अपने घर की पहली मंजिल पर खेलते हुए नीचे गिर गई एवं बेहोश हो गई थी। उसे तुरंत सर गंगाराम अस्पताल लाया गया, लेकिन डॉक्टरों के अथक प्रयास के बावजूद भी बच्ची को बचाया नहीं जा सका।
मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक 11 जनवरी को डॉक्टरों ने बच्ची को ब्रेन डेड घोषित कर दिया, मस्तिष्क के अलावा उसके सारे अंग अच्छे से काम कर रहे थे। इस दुख के बावजूद भी बच्ची के माता-पिता, बबिता एवं आशीष कुमार ने अस्पताल अधिकारियों के समक्ष अपनी बच्ची के अंग दान की इच्छा जाहिर की। बच्ची के पिता आशीष के मीडिया को बतायाकि हमने अस्पताल में रहते हुए कई ऐसे मरीज़ देखे जिन्हे अंगों की सख्त आवश्यकता है। हालांकि हम अपनी धनिष्ठा को खो चुके हैं लेकिन हमने सोचा कि अंग दान से उसके अंग न सिर्फ मरीज़ो में जिन्दा रहेंगे बल्कि उनकी जान बचाने में भी मददगार सिद्ध होंगे।
सर गंगाराम अस्पताल के चेयरमैन (बोर्ड ऑफ़ मैनेजमेंट) डॉ. डीएस राणा ने कहा कि “परिवार का यह नेक कार्य वास्तव में प्रशंसनीय है और इसे दूसरों को प्रेरित करना चाहिए।
गौरतलब है कि 0.26 प्रति मिलियन की दर से, भारत में अंगदान की सबसे कम दर है। अंगों की कमी के कारण हर साल औसतन 5 लाख भारतीय लोगों की मौत हो जाती है।
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नवीन रांगियाल
नवीन रांगियाल DAVV Indore से जर्नलिज्म में मास्टर हैं। वे इंदौर, भोपाल, मुंबई, नागपुर और देवास आदि शहरों में दैनिक भास्कर, नईदुनिया, लोकमत और प्रजातंत्र जैसे राष्ट्रीय अखबारों में काम कर चुके हैं। करीब 15 साल प्रिंट मीडिया में काम करते हुए उन्हें फिल्ड रिपोर्टिंग का अच्छा-खासा अनुभव है।
उन्होंने अखबार....
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