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दिल्ली में सीलिंग पर व्यापारियों को राहत, नहीं थमा विरोध, बढ़ी लोगों की आफत

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नई दिल्ली , शुक्रवार, 2 फ़रवरी 2018 (12:42 IST)
देश की राजधानी दिल्ली में नगर निगम के द्वारा अवैध निर्माण के मामले में दुकानों को सील किए जाने की कार्यवाही लोगों के लिए मुसीबत में तब्दील होती नजर आ रही है। भले ही डीडीए ने व्यापारियों को राहत देने का रास्ता निकाल लिया है पर दिल्ली के सभी प्रमुख बाजार अभी भी बंद हैं।
 
नगर निगम की सीलिंग मुहिम के विरोध में अखिल भारतीय व्यापारी संघ ने करीब 2,000 व्यापारियों को समर्थन में लेकर दो दिनों, 2 फरवरी और 3 फरवरी को बंद का आह्वान किया है। 
 
दिल्ली में शुक्रवार व शनिवार के दिन कनॉट प्लेस, चांदनी चौक, करोल बाग, कमला नगर, खान मार्केट, दक्षिण दिल्ली, ग्रेटर कैलाश, लाजपत नगर, डिफेन्स कॉलोनी, ग्रीन पार्क, राजौरी गार्डन और तिलक नगर जैसे सभी प्रमुख बाजार बंद हैं। सप्ताह के अंत में बाजारों के बंद रहने से आम नागरिकों को खासी मशक्कतों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे सरकार के ऊपर व्यापारी संघ के साथ जल्द ही इस मामले के निपटारे का दबाव भी है। 
 
व्यापारियों के इस महाबंद के मद्देनजर केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी के द्वारा दिल्ली मास्टर प्लान में बदलाव के संकेत दिए जाने के बावजूद व्यापारी संघ ने पीछे हटने से मना कर दिया था। 
 
सीलिंग मामले में छिड़ी इस जंग के मद्देनजर दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के अधिकारियों ने शुक्रवार सुबह एलजी अनिल बैजल के निवास स्थल में उनसे मुलाकात की। अधिकारियों की इस बैठक के बाद भाजपा विधायक विजेंदर गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि दिल्ली मास्टरप्लान 2021 में बदलाव के तीन प्रस्ताव पारित किए गए हैं। तीन दिन बाद होने वाली डीडीए की बैठक में इन प्रस्तावों पर मुहर लगा दी जाएगी। 
 
इस घोषणा के बाद अब तक अखिल भारतीय व्यापारी संघ के द्वारा बंद खत्म किए जाने को लेकर कोई फैसला सामने नहीं आया है। 
 
दिल्ली के कारोबारियों पर सीलिंग की यह गाज दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद गिरनी शुरू हुई थी। इसके अंतर्गत अतिक्रमण व अवैध निर्माण के अलावा रूपांतरण शुल्क न देने वाले व्यापारियों की दुकानों को सील किया जा रहा है। इस सीलिंग मुहिम से कारोबारियों को हो रहे नुकसान पर आप और भाजपा एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करते नजर आए। आप व भाजपा के बीच एक बार फिर आम जनता शिकार बनी, जिसके दुष्परिणाम इस बंद के रूप में नजर आ रहे हैं। यदि इस मामले में केंद्र व नगर निगम में काबिज भाजपा व दिल्ली सरकार चलाने वाली आम जनता पार्टी पहले ही किसी समाधान पर साथ आ जाती तो नागरिक इन परेशानियों से बचे रहते। 

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