Publish Date: Sun, 25 Jun 2017 (16:47 IST)
Updated Date: Sun, 25 Jun 2017 (17:33 IST)
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की आर्थिक शाखा स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) के क्रियान्वयन से कुछ दिन पहले इस पर सवाल खड़ा किया है। मंच का कहना है कि जीएसटी से छोटे कारोबारी बुरी तरह प्रभावित होंगे और इससे चीन से आयात बढ़ेगा।
मंच के सह संयोजक अश्विनी महाजन ने कहा कि जीएसटी का क्रियान्वयन नजदीक आ रहा है। इसके साथ ही छोटे उद्यमियों और व्यापारियों की धड़कन बढ़ रही है।
महाजन ने दावा किया कि लघु उद्योगों के लिए 1.5 करोड़ रुपए तक के उत्पादन पर उत्पाद शुल्क की छूट है, लेकिन जीएसटी प्रावधानों के तहत कोई भी इकाई जिसका कारोबार 20 लाख रुपए या उससे ऊपर होगा, को खुद को उस राज्य में जीएसटी के लिए पंजीकृत कराना होगा, जहां वह कारोबार कर रही है।
उन्होंने कहा कि इस कानून से लघु और कुटीर उद्योग बुरी तरह प्रभावित होंगे। ये उद्योग श्रम आधारित हैं और इनमें से ज्यादातर को ऊंचे कर के दायरे में रखा गया है। महाजन ने दावा किया कि लघु उद्योगों पर नकारात्मक असर से ग्रामीण इलाकों के लोगों का रोजगार छिनेगा और इसके साथ ही घरेलू उत्पादन घटने से चीन से आयात बढ़ेगा।
वहीं सरकार का कहना है कि जीएसटी से आर्थिक वृद्धि दर में 2 प्रतिशत अंक का इजाफा होगा। इससे देश का सबसे महत्वाकांक्षी कर सुधार बताया जा रहा है। (भाषा)