मौसम अपडेट : भारी बारिश ने हिमाचल और उत्तराखंड में मचाई तबाही, दिल्ली समेत 14 राज्यों में बारिश का अलर्ट जारी

रविवार, 18 अगस्त 2019 (23:57 IST)
नई दिल्ली। भारी बारिश ने हिमाचल और उत्तराखंड में भारी तबाही मचाई है। बारिश के कारण अकेले हिमाचल प्रदेश में 22 लोगों की मौत हो गई जबकि उत्तराखंड में बादल फटने से 22 लोग लापता हो गए हैं। मौसम विभाग ने 14 राज्यों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
 
अधिकारियों ने बताया कि 9 व्यक्तियों की मौत शिमला में जबकि सोलन में 5, कुल्लू, सिरमौर और चंबा में 2-2 और बिलासपुर तथा लाहौल-स्पीति जिलों में 1-1 व्यक्ति की मौत हो गई।

पुलिस ने बताया कि यहां आरटीओ कार्यालय के पास हुए भूस्खलन की घटना में 3 लोगों की मौत हो गई। हिमाचल प्रदेश के मंडी, कुल्लू, पालमपुर में सबसे ज्यादा हालात खराब हैं। व्यास नदी भी कुल्लु के लोगों को डरा रही है।
 
बाढ़ जैसे हालात : नदियों के जलस्तर बढ़ने से बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। इन जिलों में अगले 24 घंटों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। सोलन में भूस्खलन में एक पहाड़ दरक गया और बड़े-बड़े पत्थर सड़कों पर आ गिरे। कहीं पर चट्‍टान खिसक गई तो कोई पेड़ बस पर आ गिरा।
शिमला और कुल्लू में सोमवार को स्कूल-कॉलेज बंद : शिमला और कुल्लू जिले में सभी शैक्षिक संस्थान सोमवार को भी बंद रहेंगे। हिमाचल प्रदेश की राजधानी में भारी बारिश की वजह से यह कदम उठाया गया है। शिमला और चंबा जिला प्रशासन की ओर से रविवार को जारी एक पन्ने के आदेश में सभी स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, आईटीआई, पॉलीटेक्निक और आंगनवाड़ी केंद्रों को फिलहाल बंद रखने के लिए कहा गया है।
 
उत्तराखंड में बादल फटे, 22 लोग लापता : देवभूमि उत्तराखंड के ज्यादातर स्थानों पर पिछले 24 घंटों से लगातार हो रही भारी बारिश के कारण कई जगह बादल फटने तथा भूस्खलन होने से 3 व्यक्तियों की मृत्यु हो गई जबकि 22 लोग लापता हैं।
उत्तरकाशी जिले के मोरी ब्लॉक में शनिवार-रविवार की दरमियानी रात बादल फटने से यमुना की सहायक नदियों में आई बाढ़ ने कई गांवों में तबाही मचाई जिसमें आराकोट, माकुडी और टिकोची आदि में कई मकान ढह गए।
 
प्रदेश के आपदा सचिव एस मुरूगेशन ने बताया कि आराकोट और स्नाइल गांवों में 2 व्यक्तियों की मौत की पुष्टि हुई है। उन्होंने बताया कि मौके पर पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टरों की सेवाएं लेने का प्रयास किया गया किंतु खराब मौसम के कारण यह संभव नहीं हो पाया।
 
उत्तरकाशी के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि उनके द्वारा बचाव और राहत कार्यों में शिमला व देहरादून के जिलाधिकारियों से सहयोग मांगा गया है।

चारधाम यात्रा मार्ग पर भी कई स्थानों पर भूस्खलन होने से यात्रा अवरुद्ध हो गई है। केदारनाथ यात्रा पैदल मार्ग पर मंदाकिनी नदी पर बना एक पुल क्षतिग्रस्त हो गया है जिसके चलते उसे बीच में ही रोकना पड़ा।
 
इसी प्रकार बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री यात्रा मार्ग पर भी कई जगह भूस्खलन होने से यातायात अवरुद्ध है, हालांकि प्रशासन का कहना है कि इससे चारधाम यात्रा पर केवल आंशिक प्रभाव पड़ा है।
 
कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग में भूस्खलन का मलबा आ जाने के कारण यात्रा प्रभावित हुई है तथा तीर्थयात्रियों को सुरक्षित जगह पर ले जाया जा रहा है। देहरादून के मालदेवता क्षेत्र में भारी बारिश के चलते एक कार बरसाती नदी में गिर गई जिसमें एक महिला बह गई।
दिल्ली के लिए आने वाले 12 से 14 घंटे मुसीबत भरे होंगे : उत्तराखंड में लगातार बारिश के कारण देहरादून में पत्थर बैराज से यमुना नदी में 2 लाख 50 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जो हथिनीकुंड बैराज से होते हुए 12 से 14 घंटे में दिल्ली पहुंचेगा। 2013 में भी पत्थर बैराज से 2 लाख 78 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था जिसने भारी तबाही मचाई थी। दिल्ली के लिए आने वाले घंटे बहुत भारी होंगे।

दिल्ली में बाढ़ की चेतावनी :  दिल्ली सरकार ने रविवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए बाढ़ की चेतावनी जारी की है और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को वहां से सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए कहा है क्योंकि सोमवार को यमुना नदी में जलस्तर के खतरे के निशान को पार करने की संभावना है। 
 
रविवार की शाम युमना नदी में जलस्तर 203.37 मीटर तक पहुंच गया है और इसके सोमवार तक इसके बढ़कर 207 मीटर तक पहुंचने की संभावना है क्योकि हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से शाम छह बजे 8 लाख 28 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
 
मौसम विभाग ने इन राज्यों के लिए जारी किया अलर्ट : मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, पश्चिमी उत्तरप्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु, पुडुचेरी, बिहार और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। पश्चिम-मध्य और दक्षिण-पश्चिम अरब सागर से 45-55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का भी अनुमान है।
 
केरल में मृतक संख्या 116 पर पहुंची : भयंकर बारिश की मार झेल रहे केरल में और शव मिलने के साथ ही मृतकों की संख्या 116 पर पहुंच गई है, वहीं मलप्पुरम के कवालप्पारा और वायनाड के पुथुमला में शवों का पता लगाने के लिए ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (जीपीआर) का इस्तेमाल किया जा रहा है। जीपीआर से भेजे गए संकेत सतह के नीचे की स्थिति की जानकारी उपलब्ध कराते हैं।
 
हैदराबाद से विशेषज्ञों की एक टीम ने जीपीआर की मदद से 2 गांवों में तलाश अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य मिट्टी के नीचे दबी लाशों का पता लगाना है। सरकार की ओर से जारी राज्यव्यापी आपदा रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून की दूसरी अवधि में 8 अगस्त से हो रही बारिश में 116 लोग जान गंवा चुके हैं और 83,043 लोग 519 राहत शिविरों में रह रहे हैं।
 
ताजा जानकारी के मुताबिक मलप्पुरम में अब तक 53, वायनाड में 12 और कोझीकोड में 17 लोगों की जान जा चुकी है। साथ ही रिपोर्ट में बताया गया है कि मानसून में 1,204 घर पूरी तरह बर्बाद हो गए।

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