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हिन्दी दिवस पर बोले गृहमंत्री अमित शाह, हिन्दी एवं अन्य भाषाओं में कोई प्रतिस्पर्धा नहीं, वे सखियां

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वेबदुनिया न्यूज डेस्क

, शनिवार, 14 सितम्बर 2024 (16:51 IST)
Home Minister Amit Shah's speech on Hindi Diwas: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने शनिवार को कहा कि राजभाषा हिन्दी (Language Hindi) और अन्य भारतीय भाषाओं के बीच कभी कोई प्रतिस्पर्धा नहीं हो सकती, क्योंकि वे सखियां हैं और एक-दूसरे की पूरक हैं। शाह ने हिन्दी दिवस (Hindi Diwas) के अवसर पर चौथे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को संबोधित करते हुए नई दिल्ली में यह भी कहा कि राजभाषा हिन्दी का प्रचार-प्रसार तब तक नहीं हो सकता जब तक अन्य सभी भारतीय भाषाओं को मजबूत नहीं किया जाता और राजभाषा उन सभी के साथ संवाद स्थापित नहीं करती।
 
उन्होंने कहा कि हिन्दी और स्थानीय भाषाओं के बीच कभी प्रतिस्पर्धा नहीं हो सकती, क्योंकि हिन्दी सभी स्थानीय भाषाओं की सखी है। हिन्दी और सभी स्थानीय भाषाएं एक-दूसरे की पूरक हैं, इसलिए उनके बीच का रिश्ता और मजबूत किया जाएगा। गृहमंत्री ने कहा कि हिन्दी दिवस हिन्दी को संपर्क भाषा, आम भाषा, तकनीकी भाषा और अब अंतरराष्ट्रीय भाषा बनाने का संकल्प लेने का अवसर है।

 
75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में हीरक जयंती : उन्होंने कहा कि हम हिन्दी को राजभाषा के रूप में मान्यता मिलने के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में हीरक जयंती मना रहे हैं। हिन्दी को आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार करके और हिन्दी के माध्यम से देश की सभी स्थानीय भाषाओं को जोड़कर हम अपनी संस्कृति, भाषाओं, साहित्य, कला एवं व्याकरण के संरक्षण और संवर्द्धन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
 
शाह ने कहा कि हिन्दी भू-राजनीतिक भाषा से अधिक भू-सांस्कृतिक भाषा है। उन्होंने कहा कि उनके दोनों मंत्रालयों- गृह और सहकारिता की फाइल के माध्यम से सभी संचार हिन्दी में किए जाते हैं। शाह ने कहा कि इस स्तर तक पहुंचने में 3 साल लगे। इससे पहले शाह ने हिन्दी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संविधान सभा की भावना यह थी कि देश के सभी नागरिकों को एक-दूसरे के साथ किसी भारतीय भाषा में संवाद करना चाहिए, चाहे वह हिन्दी हो, तमिल हो, तेलुगु हो, मलयालम हो या गुजराती हो।
 
उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा कि हिन्दी को मजबूत करने से ये सभी भाषाएं भी लचीली एवं समृद्ध बनेंगी तथा एकीकरण किए जाने पर ये सभी भाषाएं हमारी संस्कृति, इतिहास, साहित्य, व्याकरण और संस्कार को भी आगे ले जाएंगी।

 
हिन्दी दिवस सभी के लिए बहुत महत्वपूर्ण : गृहमंत्री ने कहा कि इस वर्ष हिन्दी दिवस सभी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि 14 सितंबर 1949 को भारत की संविधान सभा ने हिन्दी को संघ की आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार किया था और तब से 75 साल हो गए हैं तथा देश इस साल राजभाषा की हीरक जयंती मनाने जा रहा है।
 
उन्होंने कहा कि हिन्दी ने 75 वर्ष में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं लेकिन इस मोड़ पर मैं निश्चित रूप से यह बात कह सकता हूं कि हिन्दी की किसी स्थानीय भाषा से कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है। हिन्दी सभी भारतीय भाषाओं की सखी है और वे एक-दूसरे की पूरक हैं। चाहे वह गुजराती हो, मराठी हो, तेलुगु हो, मलयालम हो, तमिल हो या बांग्ला हो, हर भाषा हिन्दी को मजबूत करती है और हिन्दी हर भाषा को मजबूत करती है।
 
शाह ने कहा कि अगर हिन्दी आंदोलन को गौर से देखा जाए तो चाहे वह चक्रवर्ती राजगोपालाचारी हों, महात्मा गांधी हों, सरदार वल्लभभाई पटेल हों, लाला लाजपत राय हों, नेताजी सुभाष चंद्र बोस हों या आचार्य जे बी कृपलानी हों, ये सभी गैर हिन्दी भाषी क्षेत्रों से आए थे।

 
उन्होंने कहा कि एन. गोपालस्वामी आयंगर और के एम मुंशी के नेतृत्व में गठित समिति ने हिन्दी को आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता देने और हिन्दी एवं हमारी सभी अन्य भाषाओं को मजबूती देने के लिए संविधान सभा को एक रिपोर्ट पेश की थी। शाह ने कहा कि ये दोनों नेता गैर-हिन्दी भाषी क्षेत्रों से थे।
 
गृहमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 10 वर्ष में हिन्दी और स्थानीय भाषाओं को मजबूत करने के लिए काफी काम किया गया है। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गर्व के साथ हिन्दी में लोगों को संबोधित किया है और देश ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में हिन्दी के महत्व को सामने रखा है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने देश की भाषाओं के प्रति गौरव की भावना भी बढ़ाई है। इन 10 वर्ष में हमने कई भारतीय भाषाओं को मजबूत करने के लिए काफी प्रयास किए हैं।
 
शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने नई शिक्षा नीति के तहत मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने को महत्वपूर्ण स्थान देकर हिन्दी और सभी भारतीय भाषाओं को नया जीवन दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इन 10 साल में एक उपकरण कंठस्थ विकसित किया है।
 
गृहमंत्री ने कहा कि हमने पिछले 10 साल में संसदीय राजभाषा समिति की 4 रिपोर्ट प्रस्तुत की हैं और सरकारी कामकाज में हिन्दी को प्रमुखता से स्थापित करने का काम किया है। शाह ने कहा कि राजभाषा विभाग हिन्दी से आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध सभी भाषाओं में अनुवाद के लिए एक पोर्टल भी ला रहा है, जिसके माध्यम से कृत्रिम मेधा का उपयोग करके बहुत ही कम समय में किसी भी पत्र या भाषण का सभी भाषाओं में अनुवाद किया जा सकेगा।
 
हिन्दी और स्थानीय भाषाएं बहुत मजबूत होंगी : गृहमंत्री ने कहा कि इससे हिन्दी और स्थानीय भाषाएं बहुत मजबूत होंगी। उन्होंने कहा कि हमारी भाषाएं दुनिया की सबसे समृद्ध भाषाओं में से हैं। हिन्दी हमें और हमारी सभी भाषाओं को जोड़ती है। शाह ने सभी देशवासियों से अपील की कि वे हिन्दी दिवस पर हिन्दी एवं स्थानीय भाषाओं को मजबूत बनाने का संकल्प लें और राजभाषा विभाग के इस कार्य में सहयोग दें।
 
इससे पहले, शाह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि समस्त देशवासियों को हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। उन्होंने कहा कि सभी भारतीय भाषाएं हमारा गौरव भी हैं और विरासत भी, जिन्हें समृद्ध किए बिना हम आगे नहीं बढ़ सकते। राजभाषा हिन्दी का हर भारतीय भाषा के साथ अटूट रिश्ता है। इस साल हिन्दी भाषा ने देश की राजभाषा के रूप में जनसंवाद व राष्ट्रीय एकता के 75 वर्ष पूरे किए हैं। शाह ने कहा कि मुझे विश्वास है कि सभी भारतीय भाषाओं को एक साथ लेकर राजभाषा हिन्दी विकसित भारत के संकल्प को चरितार्थ करने की दिशा में निरंतर अपना योगदान देती रहेगी।(भाषा)
 
Edited by: Ravindra Gupta

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