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दुनिया के सबसे ऊंचे मंदिर में विराजेंगे अयोध्या के राजा राम

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रविवार, 19 जुलाई 2020 (17:58 IST)
अयोध्या। देश दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केन्द्रबिंदु अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण का सदियों पुराना सपना साकार होने में अब चंद दिनों का समय शेष है। दुनिया के सबसे ऊंचे मंदिर के निर्माण का भूमि पूजन अगस्त के पहले सप्ताह में होने की पूरी संभावना है।
 
विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा कि श्रीरामजन्मभूमि पर राम मंदिर का निर्माण प्रस्तावित मॉडल के अनुरूप ही किया जाएगा हालांकि श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में निर्णय लिया गया है कि राम मंदिर की ऊंचाई 161 फिट होगी और शिखर के गुम्बद पाँच बनाए जाएंगे, जिससे मंदिर भव्य दिखेगा।
 
उन्होंने बताया कि श्रीरामजन्मभूमि न्यास की कार्यशाला में मंदिर निर्माण के लिए जो पत्थर तराश कर रखे गए हैं उन्हीं को निर्माण के प्रयोग में लाया जाएगा। कार्यशाला की स्थापना 1990 में हुई थी, तभी से मंदिर के लिए पत्थर तराशे जा रहे थे। वर्ष 1855 से जारी अयोध्या विवाद का फैसला उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल 9 नवम्बर को सुनाया था।
 
अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर मॉडल 1 सितम्बर 1989 में प्रयागराज कुम्भ के दौरान ही देवरहा बाबा समेत देश के शीर्ष संतों के अनुमोदन पर तैयार कर लिया गया था। इस राम मंदिर के मॉडल के चित्र को घर-घर पहुंचाने का काम किया गया था जिसके बाद शिला पूजन का कार्य किया गया था।
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उन्होंने बताया कि चन्दन की लकड़ी से बने राम मंदिर के प्रस्तावित मॉडल को अयोध्या की इस कार्यशाला में रखा गया है, जिसे आज भी देश-विदेश के काफी श्रद्धालु देखते हैं। मंदिर का निर्माण निवर्तमान विहिप के अध्यक्ष रहे अशोक सिंहल द्वारा बनाए गए मंदिर मॉडल के अनुरूप ही निर्माण कराया जाएगा।
 
विहिप प्रवक्ता के मुताबिक राम मंदिर 265.5 फिट लम्बा और 140 फिट चौड़ा और अब 128 फिट की जगह 161 फिट ऊंचा होगा, जिसके प्रथम तल पर सबसे पहले सिंहद्वार, रंगमंडप, नृत्यमंडप और फिर परिक्रमा के बाद गर्भगृह होगा।
 
मंदिर के दूसरे मंजिल पर राम दरबार और उसके ऊपर तीन मंडप के अलावा पांच मंडप होंगे। उन्होंने बताया कि राम मंदिर के हर तल पर 106 खंभे तथा एक खंभे में 16 मूर्तियां होंगी। यह मंदिर पांच शिखर का बनाया जाएगा।
 
सम्पूर्ण राम मंदिर राजस्थान के वंशी पहाड़पुर से आने वाले पिंड सैंड स्टोन से बनाया गया है। मंदिर में एक लाख 75 हजार घन फिट पत्थर लगना था, जिसमें से 1 लाख घन फिट से अधिक पत्थर को गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कारीगरों द्वारा तराशा जा चुका है।
 
शर्मा ने बताया कि मंदिर का भूतल समेत करीब 60 फीसदी काम पूरा हो चुका है। राम मंदिर में लगने वाले पत्थर की आयु करीब एक हजार वर्ष की है, जिसका प्रयोगशाला में परीक्षण भी किया जा चुका है। मंदिर के फर्श में मार्बल लगेगा। साथ ही साथ प्लिंथ ग्रेनाइट पत्थर का बनाया जाएगा, जिससे पानी वगैरह से इन पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। (वार्ता)

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