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बंगाल में मुख्यमंत्री ममता के अहंकार और हठ के चलते बिगड़े हालात

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विशेष प्रतिनिधि

शनिवार, 15 जून 2019 (18:39 IST)
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सरकारी डॉक्टरों की हड़ताल 5वें दिन भी जारी है। हड़ताल के चलते पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। एक ओर अस्पतालों में इलाज के अभाव में मरीज दम तोड़ रहे हैं तो दूसरी ओर डॉक्टर अब भी झुकने को तैयार नहीं हैं।
 
इस बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के आला अफसरों के साथ एक आपात बैठक कर स्थिति की समीक्षा की है। दूसरी ओर अब बंगाल के डॉक्टरों के समर्थन में दिल्ली समेत कई प्रदेशों के डॉक्टर आ गए हैं।
 
डॉक्टरों के अखिल भारतीय संगठन आईएमए (IMA) ने 17 जून को देशभर में हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया है। इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने सभी प्रदेश सरकारों को पत्र लिखकर डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए विशेष बंदोबस्त करने को कहा है।
 
बंगाल में डॉक्टरों की हड़ताल लंबी चलने के चलते मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने फैसलों के चलते विरोधियों के निशाने पर आ गई हैं। बंगाल में सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों की हड़ताल अब राष्ट्रीय मुद्दा बना गया है।
 
इस बीच ममता बनर्जी ने डॉक्टरों को निशाने पर लेते हुए बांग्ला भाषा को लेकर दिए बयान ने पूरे मामले में आग में घी डालने जैसा काम किया, वहीं डॉक्टरों के हड़ताल के चलते कई अस्पतालों से इलाज के अभाव में मरीजों के मौत की खबरें भी सामने आ रही हैं।
 
क्यों बिगड़े बंगाल में हालात? : बंगाल में दिन-प्रतिदिन हालात बिगड़ने को लेकर वरिष्ठ पत्रकार डॉक्टर आनंद पांडे डॉक्टरों के इस तरह हड़ताल पर जाने को उचित नहीं ठहराते हुए कहते हैं कि एक मामूली घटना के इतना तूल पकड़ने के पीछे वे पूरी तरह सरकार के गैरजिम्मेदाराना रवैए को जिम्मेदार मानते हैं जिसके चलते पूरे मामले को सही ढंग से हल नहीं किया गया।
 
डॉक्टरों और सरकार के बीच सीधे टकराव के लिए डॉ. पांडे कहते हैं कि पहले ममता के अहंकार और हठ के चलते डॉक्टरों से किसी भी तरह की बातचीत से इंकार करने और हड़ताल खत्म करने के लिए 4 घंटे का अल्टीमेटम देने जैसे फैसलों ने स्थिति को और बिगाड़ दिया जिसकी प्रतिक्रियास्वरूप अब डॉक्टर आर-पार की लड़ाई लड़ने के मूड में आ गए हैं और उन्होंने सरकार से किसी भी तरह की बातचीत से इंकार करते हुए अब सामूहिक इस्तीफा देने जैसा रास्ता अख्तियार कर लिया है।
 
डॉक्टरों की हड़ताल के लिए पांडे राज्य में बदले सियासी माहौल को भी कहीं-न-कहीं बड़ा कारण मानते हैं। वे कहते हैं कि जिस तरह टीएमसी के कार्यकर्ताओं पर पिछले काफी समय से लोगों को डराने के आरोप लगते आए हैं, ऐसे में अब जब लोकसभा चुनाव में भाजपा एक मजबूत विकल्प के रूप में सामने आई तो कई संगठन अपनी आवाज उठाने लगे हैं।
 
वे साफ कहते हैं कि अगर डॉक्टरों के साथ मारपीट की घटना चुनाव से पहले होती तो हो सकता है कि डॉक्टर इस तरह हड़ताल पर जाने का फैसला ही नहीं कर पाते, वहीं पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों की हड़ताल का सियासी माइलेज लेने में भाजपा जुट गई है। भाजपा महासचिव और बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने डॉक्टरों की हड़ताल के चलते बंगाल की स्थिति को 'अराजक' करार दिया है।

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