नई दिल्ली। देश में तेजी से हो रहे आर्थिक बदलाव समाज के हर क्षेत्र को प्रभावित कर रहे हैं। इसके कारण विभिन्न व्यवसायों और आय वर्ग के लोगों में शादी की उम्र को लेकर सोच तेजी से बदल रही है। पहले जहां कम उम्र में ही शादी कर दी जाती थी, वहीं अब इससे परहेज किया जा रहा है।
भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त की ओर से जनगणना 2011 के आधार पर आर्थिक गतिविधियों की श्रेणी के अंतर्गत शादी की उम्र से संबंधित आज जारी आंकड़े इसका सबूत हैं।
इन आंकड़ों के अनुसार पिछले दशक 2001-2011 के दौरान शादी की उम्र में आर्थिक आधार पर बांटी गई पुरुषों और महिलाओं की औसत आयु में सुधार हुआ है, पहले जहां विवाह कम उम्र में हो जाया करते थे, वहीं धीरे- धीरे उम्र की सीमा बढ़ती दिखाई दे रही है। इन्हें मुख्य श्रमिकों, खेतिहरों, कृषि मजदूरों, घरेलू काम में लगे श्रमिकों, सीमांत श्रमिकों और गैर श्रमिकों की श्रेणी में बांटा गया है।
मुख्य श्रमिकों की श्रेणी में पुरुषों और महिलाओं की विवाह की उम्र 2001 में जहां क्रमश 22साल छह महीने और 18 साल दो महीने थी, वहीं यह 2011 में बढ़कर 23 साल छ: महीने और 19 साल दो महीने हो गई।
इसी तरह खेतिहरों में यह 21 साल पांच महीने और 17 साल छ: महीने से बढ़कर 22 साल पांच महीने और 18 साल छ: महीने पर पहुंच गई। कृषि मजदूरों में भी यह बदलाव देखा गया। इनमें यह 21 साल आठ महीने और 17 साल सात महीने से बढ़कर 22 साल पांच महीने और 18 साल पांच महीने हो गई।
मुख्य श्रमिकों में भी पुरुषों और महिलाओं में विवाह ज्यादा उम्र में होने लगे। इनमें 2001 में पुरुषों की आयु जहां 23 साल सात महीने थी वहीं 2011 में बढ़कर 23 साल चार महीने हो गई। महिलाओं में यह 19 साल पांच महीने से बढ़कर 20 साल आठ महीने हो गई।
सीमांत श्रमिकों की श्रेणी के पुरुषों और महिलाओं में यह क्रमश: 21 साल आठ महीने और 17 साल छह महीने से बढ़कर 22 साल पांच महीने और 18 साल सात महीने पर पहुंच गई। इसी तरह गैर श्रमिक श्रेणी में यह 22 साल 8 महीने और 18 साल पांच महीने से बढ़कर 23 साल पांच महीने और 19 साल चार महीने हो गई। (वार्ता)