मोदी ने याद किया विवेकानंद का संदेश
Publish Date: Thu, 11 Sep 2014 (14:32 IST)
Updated Date: Thu, 11 Sep 2014 (15:25 IST)
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक भाईचारे के स्वामी विवेकानंद के संदेश का स्मरण करते हुए गुरुवार को कहा कि अगर उनके संदेश पर अमल किया जाता तो विश्व को अमेरिका पर 11 सितंबर के आतंकवादी हमले जैसे कृत्यों का साक्षी नहीं बनना पड़ता।
मोदी ने कहा कि वैश्विक भाईचारे के विवेकानंद का यह संदेश 11 सितंबर 1893 को शिकागो में विश्व धर्म संसद में उनके संबोधन में दिया गया था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 11 सितंबर की 2 छवियां हैं। एक, 2001 में विनाश की और दूसरी, 1893 में स्वामी विवेकानंद के संदेश की। अगर हमने स्वामीजी के संदेश पर अमल किया होता तो इतिहास कभी ऐसे कायरतापूर्ण कृत्यों का साक्षी नहीं होता, जो हमने 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में देखा।
मोदी ने कहा कि अपने संबोधन के माध्यम से विवेकानंद ने हमारे देश के समृद्ध इतिहास और मजबूत सांस्कृतिक जड़ों की तरफ समूचे संसार का ध्यान आकर्षित किया।
‘अमेरिका के बहनों और भाइयों’ को उनके संबोधन का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि विवेकानंद के इन शब्दों के साथ वैश्विक भाईचारे का भारत का संदेश समूचे संसार में गूंजा।
मोदी ने कहा कि आईए, स्वामी विवेकानंद के शब्दों का स्मरण करें और एका, भाईचारे तथा विश्व शांति के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए अपने आपको समर्पित करें।
विवेकानंद ने 1893 में शिकागो में धर्म संसद को अपने संबोधन में कहा था कि सांप्रदायिकता, असहिष्णुता और उसके भयावह वंशज कट्टरवाद ने लंबे समय से इस सुंदर धरती पर कब्जा कर रखा है। उन्होंने धरती को हिंसा से भर दिया है और अकसर इसे खून से भिगोया है, सभ्यता नष्ट की है और पूरे राष्ट्र को निराशा में डाला है।
उन्होंने कहा था कि अगर ये भयावह राक्षस नहीं होते तो मानव समाज आज के मुकाबले ज्यादा आगे होता। लेकिन उनका वक्त आ चुका है और मैं उम्मीद करता हूं कि आज सुबह इस सम्मेलन के सम्मान में जो घंटी बजी थी वह तमाम कट्टरवाद के लिए, तलवार या कलम से तमाम जुल्मों के लिए, एक ही लक्ष्य की तरफ चलने वाले लोगों के बीच की तमाम दुर्भावनाओं के लिए मौत की घंटी हो सकती है। (भाषा)