Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia
Advertiesment

विपक्षियों के ठिकानों पर छापों की 'सियासत'!

हमें फॉलो करें विपक्षियों के ठिकानों पर छापों की 'सियासत'!
webdunia

राजीव रंजन तिवारी

केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार 26 मई को तीन वर्ष पूरे करने वाली है। स्वाभाविक है, सत्ताधारी दल से संबंधित लोग जश्न मनाने की तैयारी कर रहे होंगे। पर अफसोस कि सरकार के तीन वर्ष पूरे होने पर उसकी कथित उपलब्धियों की जितनी चर्चा नहीं हो रही है, उससे ज्यादा विपक्षी दलों के ठिकानों पर छापेमारी की है। इस छापेमारी में क्या हो रहा है, क्या मिल रहा है कुछ भी स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। पर पूरे देश में छापों की ही गूंज है। निश्चित रूप से विपक्ष के दो बड़े नेताओं के घरों और अन्य ठिकानों पर पड़े छापों को लेकर राजनीति भी गरम होनी चाहिए, सो हो रही है। विपक्ष का मानना है कि केंद्र सरकार बदले की भावना से कार्रवाई कर रही है, जबकि सत्ता पक्ष कहता है कि भ्रष्ट लोगों के हिसाब देने का वक्त आ गया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिजनों से जुड़ी करीब 1000 करोड़ की बेनामी संपत्ति की जांच के लिए आयकर विभाग ने दिल्ली, गुरुग्राम और रेवाड़ी जैसी जगहों के बाईस ठिकानों पर छापे मारे थे।
 
आरोप है कि फर्जी कंपनी बनाकर इन जगहों पर बेनामी संपत्ति तब जुटाई गई, जब लालू यादव रेलमंत्री थे। इसी तरह पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम पर आइएनएक्स टेलीविजन कंपनी में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की मंजूरी दिलाने की एवज में घूस लेने और संबंधित अधिकारियों को प्रभावित करने का आरोप है। कार्ति ने आइएनएक्स को एफडीआई की मंजूरी उस वक्त दिलवाई जब उनके पिता वित्तमंत्री थे। इसी सिलसिले में सीबीआई ने पी. चिदंबरम और उनके बेटे के घरों पर छापे मारे। राजनीति के जानकार कह रहे हैं कि केन्द्र की मोदी सरकार जानबूझकर यह सब करा रही है ताकि कोई उससे तीन साल की उपलब्धियां न पूछ ले। हर कोई गोरक्षा, तीन तलाक, छापेमारी आदि में उलझा रहे और सरकार जश्न मनाकर चुपके से 26 मई पार कर ले।
 
गौरतलब है कि पिछले दिनों आईएनएक्स मीडिया को विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड से मंजूरी दिलाने में कथित मदद के मामले में सीबीआई ने पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम और उनके पुत्र कार्ति चिदंबरम से जुड़े ठिकानों पर छापे मारे। मुंबई, दिल्ली, चेन्नई और गुरुग्राम में छापे मारे गए। चिदंबरम के पैतृक शहर कराईकुड़ी में भी छापे मारे गए। हालांकि चिदंबरम ने छापों के बारे में कहा कि सरकार सीबीआई तथा अन्य एजेंसियों का इस्तेमाल कर मेरे बेटे और उसके दोस्तों को निशाना बना रही है। सरकार का मकसद मेरी आवाज बंद करना है। लेकिन केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने ये आरोप खारिज कर दिए कि सरकार की आलोचना करने वाले लेख लिखने के कारण चिदंबरम को निशाना बनाया जा रहा है।
 
उन्होंने कहा कि अब भ्रष्ट लोगों को जवाब देना पड़ेगा। इसी क्रम में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद तथा अन्य से संबंधित 1,000 करोड़ रुपए के कथित बेनामी सौदों के मामले में आयकर विभाग ने दिल्ली और आसपास के इलाकों में कम से कम 22 स्थानों पर छापेमारी और तलाशी की। अधिकारियों के अनुसार, विभाग ने दिल्ली, गुड़गांव, रेवाड़ी में कुछ जाने-माने कारोबारियों और राजद सांसद पीसी गुप्ता के परिसरों पर भी तलाशी ली। सीबीआई और आयकर की छापेमारियों से सियासत भी गर्माने लगी है। एक तरफ जहां लालू और समर्थक गुस्से में हैं वहीं कांग्रेस ने भी केन्द्र सरकार पर निशाना साधना आरंभ कर दिया है।
 
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम के पुत्र कार्ति चिदंबरम से संबंधित परिसरों पर छापे मोदी सरकार की राजनीतिक बदले की कार्रवाई है। पार्टी की यह टिप्पणी कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के परिसरों और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद से जुड़ी कथित संपत्ति पर सरकारी एजेंसियों के छापे के बाद आई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि क्या प्रधानमंत्री बता सकते हैं कि उनकी नैतिकता का पैमाना क्या है? यदि उनमें नैतिकता है तो वे सहारा, बिड़ला एक्सेल के दस्तावेजों की जांच का आदेश देने से क्यों परहेज कर रहे हैं, जिसमें उनका खुद का बार-बार नाम आया है। 
 
उधर, लालू प्रसाद पर छापे को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी। जबकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने इसे बदले की कार्रवाई करार दिया है। लालू प्रसाद ने कहा कि वे झुकने और डरने वाले नहीं, आखिरी सांस तक फासीवादी ताकतों के खिलाफ लड़ते रहेंगे। इतना ही नहीं राजद प्रमुख लालू यादव के ठिकानों पर आयकर के छापे के बाद से गरमाई बिहार की सियासत की आंच सड़क तक पहुंच गई। छापे से नाराज राजद समर्थकों ने भाजपा के प्रदेश कार्यालय पर अचानक हमला बोल दिया। भाजपा और सुशील मोदी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए राजद समर्थकों ने भाजपा कार्यालय पर पत्थरबाजी की और बाहर खड़े वाहनों के शीशे तोड़ दिए। जवाब में भाजपा समर्थकों की ओर से भी पत्थरबाजी की गई। 
 
घटना के वक्त भाजपा कार्यालय में मौजूद लोगों के मुताबिक, सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शन कर रहे राजद समर्थक अचानक पत्थर फेंकने लगे। इसमें छह लोग घायल हुए। हालांकि राजद की ओर से कहा गया कि पहले भाजपा वालों की ओर से पत्थर फेंके गए। इस घटना से नाराज भाजपा नेताओं ने डीजीपी से मुलाकात कर मामले की जानकारी दी। इसके बाद भाजपा नेताओं ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके दोनों मंत्री बेटों तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव के खिलाफ थाने में नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई है।
 
बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय ने तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव की ओर इशारा करते हुए कहा कि नीतीश कुमार की सरकार में गुंडे भी शामिल हैं। उन्हें वे अपनी सरकार से बर्खास्त करें। वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी ने कहा कि राजद के गुंडों को भाजपा कार्यालय के पास जाने की क्या जरूरत थी। इस तरह अगर गुंडागर्दी जारी रही तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। उधर, राजद प्रवक्ता मनोज झा ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस कर कहा है कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भाजपा कार्यालय पर हमला नहीं किया। उन्होंने कहा कि जब राजद कार्यकर्ता प्रदर्शन करते हुए भाजपा कार्यालय के सामने से गुजर रहे थे तो भाजपा वालों ने उन पर हमला किया। इसमें राजद के कई कार्यकर्ता घायल हुए हैं।
 
उल्लेखनीय है कि जब कोई पार्टी सत्ता में आती है तो विपक्षी दलों के नेताओं पर शिकंजा कसने की नीयत से उनकी अनियमितताओं का पुलिंदा खोलकर बैठ जाती है। आयकर विभाग और सीबीआई की कार्रवाइयां तेज हो जाती हैं। फिर विपक्षी दल सत्ता पक्ष पर बदले की कार्रवाई का आरोप मढ़ना शुरू कर देते हैं। मगर ऐसे बहुत कम मामले हैं, जिनमें ऐसी कार्रवाइयों का कोई व्यावहारिक नतीजा सामने आता है। भ्रष्टाचार से जुड़े उन्हीं कुछ मामलों में सजा हो सकी है, जिनमें अदालतों का हस्तक्षेप रहा है।
 
ज्यादातर मामलों में यही देखा गया कि सत्ता पक्ष विपक्षी दलों की जुबान बंद करने की मंशा से उनके मुखर नेताओं के भ्रष्टाचार की तरफ अंगुली उठाता है। इसलिए जब केंद्र की भाजपा शासित सरकार ने लालू यादव, पी. चिदंबरम, ममता बनर्जी आदि के खिलाफ अनियमितताओं की जांच कराने के आदेश दिए तो उस पर स्वाभाविक रूप से बदले की भावना से काम करने का आरोप लग रहा है। भ्रष्टाचार खत्म करने का दम तो हर सरकार भरती रही है, पर इस दिशा में साफ नीयत से काम न हो पाने की वजह से यह समस्या लगातार बढ़ती रही है।
 
नाहक आयकर विभाग और सीबीआई की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आती रही है। अगर लालू यादव, कार्ति चिदंबरम और ऐसे दूसरे लोगों के खिलाफ अनियमितता के पुख्ता सबूत हैं तो उन पर कानूनी कार्रवाई होनी ही चाहिए। इसमें राजनीतिक गोटियां बिठाने या फिर सबक सिखाने की मंशा नहीं होनी चाहिए। भ्रष्टाचार से पार पाने का जो भरोसा नरेंद्र मोदी सरकार ने जगाया था, उसे पूरा करने के लिए जरूरी है कि पक्ष और विपक्ष का भेद किए बगैर कार्रवाई हो। अगर सिर्फ विपक्ष के नेताओं के खिलाफ कदम उठाए जाएंगे तो उसकी नीयत पर शक स्वाभाविक है। बहरहाल, देखना है कि क्या होता है?

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

एनजीटी ने यमुना डूब क्षेत्र में कचरे पर लगाया प्रतिबंध