Publish Date: Tue, 13 Feb 2018 (18:00 IST)
Updated Date: Tue, 13 Feb 2018 (18:07 IST)
नई दिल्ली। नोटबंदी के दौरान अकाउंटिंग आचार संहिता का उल्लंघन करने के मामले में द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ने चार चार्टर्ड अकाउंटेटों (सीए) के खिलाफ कार्रवाई की है जबकि एक मामला अभी लंबित है।
संस्थान के नए अध्यक्ष नवीन एनडी गुप्ता ने मंगलवार को चर्चा में कहा कि नोटबंदी के दौरान आईसीएआई की आचार संहिता के उल्लंघन के पांच मामले आए थे, जिनमें से चार का निपटान किया जा चुका है और अभी एक मामला लंबित है। इन मामलों में संबंधित चार्टर्ड अकाउंटेटों पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना किया गया था और तीन-तीन महीने के लिए उनकी सदस्यता निलंबित की गई थी।
उन्होंने कहा कि एक नियामक के नाते उनका संस्थान सिर्फ आचार संहिता से जुड़ा मामला ही देखता है और मानदंडों के अनुरूप कार्रवाई की जाती है। ये सभी मामले गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) ने संस्थान के पास भेजे थे। हवाला और अन्य मामलों की जांच संबंधित एजेंसियां करती हैं।
गुप्ता ने कहा कि सरकार को नीतियां बनाने में उनका संस्थान सलाह-मशविरा देते रहता है। वर्ष 2018-19 के आम बजट में मानक कटौती शुरू करने का सुझाव भी उनके संस्थान ने ही दिया था। उन्होंने कहा कि हर वर्ष वित्त मंत्रालय को बजट से पहले सुझाव दिया जाता है। बजट के बाद भी आईसीएआई अपने सदस्यों और आम लोगों के साथ विचार-विमर्श के निष्कर्ष पर टिप्पणियां देता आ रहा है।
संस्थान के सदस्यों की विश्वसनीयता पर लग रहे प्रश्न चिह्न पर उन्होंने कहा कि जो लोग गलत करते हैं और उनकी शिकायत मिलती है तो उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाती है। अभी संस्थान में इस तरह के मामलों के निपटान में तेजी आई है। अब मामलों की लंबित होने की अवधि घटकर दो वर्ष पर आ गई है जबकि पहले यह चार से पांच वर्ष पर पहुंच गई थी।
गुप्ता ने कहा कि पिछले वर्ष प्रधानमंत्री ने वैश्विक स्तर की भारतीय अकाउंटिंग कंपनी बनाए जाने पर बल दिया था और उस दिशा में काम जारी है। उन्होंने कहा कि इंटरनेट के इस युग में अब इस तरह की कंपनियां बनाना पहले की तुलना में अधिक सरल हो गया है। शीघ्र ही वैश्विक स्तर पर एक भारतीय कंपनी सामने आने वाली है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह से हर क्षेत्र में इंटरनेट का उपयोग बढ़ा है, अब इस क्षेत्र में भी उसकी उपयोगिता बढ़ती जा रही है। आईटी अकाउंटिंग पर अधिक जोर दिया जा रहा है। (वार्ता)