Publish Date: Wed, 23 Nov 2016 (15:40 IST)
Updated Date: Wed, 23 Nov 2016 (15:45 IST)
नोटबंदी के बाद से देश में ई-वॉलेट का तेजी से विकास हुआ है। सरकार द्वारा बड़े नोट बंद करने और ऑनलाइन भुगतान को बढ़ावा देने की वजह से देश में ऑनलाइन भुगतान की सुविधा देने वाली कंपनियों ने दिन-दूनी, रात-चौगुनी तरक्की की है। इन कंपनियों में भी सबसे आगे पेटीएम है। भारतीय शहरों की अधिकांश दुकानों पर अब पेटीएम के बोर्ड दिखाई देने लगे हैं। एक ओर तो इस कंपनी का यहां तेजी से विकास हो रहा है तो दूसरी ओर इसके विरोध में भी लोग तेजी से लामबंद हो रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि यह एक चीनी कंपनी है। जिस तरह से दिवाली के पहले चीनी पटाखों, लाइटों और चीनी सामानों का बहिष्कार किया गया था उसी प्रकार इस पेमेंट गेटवे का भी बहिष्कार किया जाना चाहिए।
नई दिल्ली के पास नोएडा में ऑनलाइन शापिंग पेटीएम डॉट कॉम की शुरुआत 2010 में हुई थी। इस वेबसाइट के सीईओ विजय शेखर शर्मा हैं। बाद में, मार्च 2015 में प्रसिद्ध उद्योगपति रतन टाटा ने भी इस फर्म में निजी निवेश किया था। इसी माह चीनी ई कॉमर्स कंपनी, अलीबाबा ग्रुप ने इसकी 25 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए 57 करोड़ डॉलर चुकाए।
पेटीएम ने मार्च 2016 में कार्यशील पूंजी के लिए आईसीआईसीआई बैंक से 300 करोड़ का कर्ज लिया था। इसका अर्थ यह है कि एक छोटे से स्थान पर संचालित कंपनी के लिए सारी दुनिया से वित्तपोषण किया जाता है और वह भी, इस कारण से कि इसके बड़े पैमाने पर विस्तार की संभावनाएं बहुत अच्छी होती है।
इस वेबसाइट की एप्लीकेशंस के तौर पर आप एयर टिकट की खरीदी, टैक्सी बुकिंग, मोबाइल रिचार्ज, डीटीएच बिल भुगतान और बिजली के बिलों का भुगतान कर सकते हैं। इसके जरिए आप इंडियन आइल पेट्रोल पंप पर भी फ्यूल खरीद का भुगतान कर सकते हैं। इसका पीवीआर सिनेमा के साथ साझेदारी भी है जिसके चलते आप मूवी टिकटों की बुकिंग भी करा सकते हैं।
बाद में, यह 2015 में भारत का पहला पेमेंट बैंक भी बन गया और इसने इस काम को करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से लाइसेंस भी हासिल कर लिया। यह अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराता है और इसकी नई सेवाओं में डेविट कार्ड्स, सेविंग खाता, ऑनलाइन बैंकिंग और ट्रांसफर्स किए जाते हैं जोकि देश में एक कैशलेस इकॉनॉमी को बनाने की दिशा में अग्रसर है। विदित हो कि शॉपिंग वेबसाइट पर पेमेंट्स बैंक के रूप में यह अलग कंपनी है जिसमें कंपनी संस्थापक विजय शेखर शर्मा की 51 फीसदी हिस्सेदारी है। इसके अलावा वन97 का हिस्सा 39 फीसदी और दस फीसदी हिस्सा इसकी सहायक कंपनी वन97 और शर्मा का होगा।
विदित हो कि पेटीएम, भारत बिल भुगतान सिस्टम की ऑपरेटिंग इकाई भी है जिसका यूजर कभी भी और कहीं भी बिलों का भुगतान कर सकते हैं।
फिर भी अगर लोग पेटीएम से भुगतान नहीं करना चाहते हैं तो उनके सामने रूपे के रूप में एक अन्य विकल्प भी है। इंडियनपे स्कीम की शुरुआत नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने की थी। यह मास्टरकार्ड और वीजाकार्ड स्कीम्स के विकल्प के तौर पर स्थापित किया गया था और इसका प्रमुख उद्देश्य भारत में विभिन्न पेमेंट सिस्टम्स को समन्वित और मजबूत करना था।
लगभग एक जैसे नाम का उपयोग करने वाली कंपनियों से भ्रम को दूर करने के लिए इसका नाम रूपे रखा गया था ताकि अन्य वित्तीय संस्थाओं से इसका कोई विवाद न हो। यह दो शब्दों, रुपी और पेमेंट, का मिलाजुला नाम है और इसका लोगो तिरंगे फंडे जैसा दिखाई देता है। रूपे कार्ड की शुरुआत 26 मार्च 2012 को की गई थी। इसके साथ एनपीसीआई ने सामरिक साझेदारी और रूपे कार्ड के लिए डिस्कवर फाइनेंशियल सर्विसेज (डीएफसी) की स्थापना की गई। इसके परिणामस्वरूप रूपे ग्लोबल कार्ड को भारत के बाहर डिस्कवर पेमेंट नेटवर्क द्वारा स्वीकार किया जाने लगा। बाद में, 8 मई, 2014 को देश के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में रूपे को देश के लिए समर्पित किया था।