Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia
Advertiesment

राज्यसभा सचिवालय का दावा- सदन में हंगामे के दौरान तैनात सुरक्षाकर्मियों में कोई बाहरी नहीं था

हमें फॉलो करें राज्यसभा सचिवालय का दावा- सदन में हंगामे के दौरान तैनात सुरक्षाकर्मियों में कोई बाहरी नहीं था
, गुरुवार, 12 अगस्त 2021 (21:48 IST)
नई दिल्ली। राज्यसभा में बुधवार को भारी हंगामे के दौरान हुई धक्का-मुक्की की घटना के एक दिन बाद उपसभापति एम. वेंकैया नायडू ने उच्च सदन के अधिकारियों के साथ चर्चा की जिन्होंने उन्हें बताया कि सदन में किसी भी बाहरी को सुरक्षाकर्मी के तौर पर तैनात नहीं किया गया था। उपसभापति ने सरकार और विपक्षी दलों के प्रतिनिधिमंडलों से भी मुलाकात की और 11 अगस्त को हुई घटना के बारे में उनकी राय भी सुनी।
 
नायडू ने राज्यसभा सचिवालय के अधिकारियों के साथ सदन में पिछले कुछ दिनों के भीतर हंगामे के दौरान हुई घटनाओं के बार में लगभग घंटे भर बैठक की। इस बैठक की चर्चा में बुधवार को सुरक्षाकर्मियों की तैनाती का भी मुद्दा शामिल था। इस दौरान नायडू ने पूर्व में सदस्यों के नियम विरुद्ध आचरण, उसे लेकर गठित समितियों, उनकी रिपोर्ट और उन पर हुई कार्रवाई के बारे में जानकारी मांगी।
 
सरकार ने हंगामे के दौरान विपक्षी सदस्यों के आचरण की जांच के लिए समिति गठित करने की मांग की थी। सूत्रों ने बताया कि इस सत्र में हुए हंगामे और सरकार की मांग के मद्देनजर समिति गठित करने को लेकर अभी चर्चा जारी है। सभापति ने सदन में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती को लेकर राज्यसभा अधिकारियों से जानकारी मांगी थी।
 
राज्यसभा सचिवालय ने एक बयान में कहा कि बाद में अधिकारियों ने नायडू को बताया कि 10 अगस्त को तैनात किए गए सुरक्षाकर्मियों में कोई बाहरी नहीं था। उन्होंने बताया कि लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय के कर्मियों को तैनात किया गया था। आवश्यकता के अनुरुप इन कर्मियों की तैनाती की मंजूरी है।
 
बयान में कहा गया ‍कि उन्होंने बताया कि शुरुआत में सिर्फ 14 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था जिसे बढ़ाकर बाद में 42 कर दिया गया। सदन की स्थिति और पूर्व में हुए घटनाक्रमों को देखते हुए ऐसा किया गया। नायडू ने विपक्षी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वह कथित घटनाओं के मामले को देखेंगे जिसमें कुछ सदस्य और सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। उन्होंने विपक्षी सदस्यों से सदन को सुचारू रूप से चलाने और उसकी गरिमा का ध्यान रखने का अनुरोध किया।
webdunia
उन्होंने विपक्षी नेताओं से कहा कि 10 अगस्त में सदन में जो कुछ भी हुआ उससे वह बहुत क्षुब्ध हैं और कुछ सदस्यों का ऐसा आचरण अक्षम्य है ओर उनके खिलाफ कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता है। इससे पहले राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य विपक्षी नेताओं ने संयुक्त बयान में कहा कि राज्यसभा में बुधवार को जो हुआ वह हैरान करने वाला, अप्रत्याशित, दुखद और सदन की गरिमा और सदस्यों का अपमान था...इस सरकार ने संसदीय लोकतंत्र के सम्मान को कम किया है।
 
विपक्षी नेताओं ने यह दावा किया कुछ महिला सांसदों समेत सदन के कई सदस्यों के साथ ऐसे बाहरी लोगों ने धक्कामुक्की की, जो संसद की सुरक्षा का हिस्सा नहीं है। इस बयान पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार, द्रमुक के टीआर बालू समेत 11 दलों के नेताओं के हस्ताक्षर हैं।

व्यवहार पर जताई चिंता : उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू तथा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हाल में संपन्न हुए संसद के मॉनसून सत्र में कुछ सांसदों के व्यवहार पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।

मॉनसून सत्र की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के एक दिन बाद बिरला ने आज शाम नायडू से मुलाकात की और दोनों ने सत्र के दौरान ‘संसद में दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम’ की समीक्षा की।
 
उपराष्ट्रपति सचिवालय ने ट्वीट किया कि दोनों ने कुछ सांसदों के कामकाज में बाधा डालने वाले बर्ताव पर गहन चिंता प्रकट की। इसमें कहा गया कि उनका पुरजोर मानना है कि ऐसे अशांतिपूर्ण व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए और उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।

इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी, राज्यसभा में नेता सदन पीयूष गोयल और मुख्तार अब्बास नकवी ने यहां नायडू से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की। उन्होंने कुछ सदस्यों के खराब व्यवहार के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सूत्रों ने कहा कि राज्यसभा के सभापति और लोकसभा अध्यक्ष दोनों को लगता है कि इन घटनाओं ने देश की सर्वोच्च पंचायत की गरिमा और सम्मान को धब्बा लगा है।

उन्होंने कहा कि दोनों ने अतीत में हुए इस तरह के घटनाक्रमों और उनमें हुई कार्रवाइयों का विस्तृत अध्ययन करने का फैसला किया है ताकि भविष्य में ऐसे मामलों में कार्रवाई तय की जा सके। सूत्रों के अनुसार नायडू और बिरला ने कुछ सदस्यों के हंगामे की वजह से बड़ी संख्या में सांसदों को जनहित के मुद्दे उठाने का अवसर नहीं मिलने का भी संज्ञान लिया।
सरकार का दावा हर दिन पारित हुए 1 विधेयक : केंद्र सरकार ने गुरुवार को कहा कि संसद के मानसून सत्र में वर्ष 2014 के बाद ‘सबसे अधिक हंगामे’ के बावजूद राजयसभा में औसतन एक से अधिक विधेयक हर दिन पारित किया गया। सत्र के दौरान उच्च सदन में राज्यों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) जातियों की पहचान और सूची तैयार करने का अधिकार देने वाले संविधान संशोधन विधेयक सहित 19 विधेयक पारित किए गये।
 
सरकार ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद यह दूसरा मौका था जब इतनी संख्या में विधेयक पारित किए गए। सरकार का कहना है कि संसद में विधायी कामकाज निपटाने की यह उसकी ‘प्रतिबद्धता’ और ‘क्षमता’ को दर्शाता है।
 
वर्तमान सत्र में मात्र 28 प्रतिशत कामकाज हुआ। इस दौरान सदन में 28 घंटे 21 मिनट कामकाज हुआ और हंगामे के कारण 76 घंटे 26 मिनट का कामकाज बाधित हुआ। यह 2014 में राज्यसभा के 231वें सत्र के बाद व्यवधानों व स्थगनों के चलते 4 घंटे 30 मिनट के साथ प्रतिदिन औसतन सबसे ज्यादा समय का नुकसान था।
सरकार ने एक बयान में कहा कि वर्ष 2014 के बाद सर्वाधिक व्यवधान के बावजूद राजयसभा में प्रतिदिन 1.1 विधेयक पारित किया गया। यह वर्ष 2014 के बाद राज्यसभा में पारित किए गए विधेयकों का दूसरा सर्वाधिक आंकड़ा है। सरकार ने कहा कि सभी प्रकार के हंगामे और व्यवधान के बावजूद राज्यसभा में एक संविधान संशोधन विधेयक सहित 19 विधेयक पारित किए गए। यह विधेयक राष्ट्रीय हित में हैं और इनसे गरीबों, ओबीसी, कामगारों, उद्यमियों और समाज के सभी वर्गों को लाभ मिलेगा।
 
सत्र के दौरान संसद के दोनों सदनों द्वारा 22 विधेयक पारित किए गए, जिनमें 2021-22 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों से संबंधित दो विनियोग विधेयक और 2017-2018 के लिए अधिक अनुदान की मांग शामिल हैं, जिन्हें लोकसभा द्वारा पारित किया गया और राज्यसभा को भेजा गया। इन विधेयकों को अनुच्छेद 109(5) के तहत पारित माना जाता है।
ये विधेयक हुए पारित : इस सत्र में दोनों सदनों में पारित किए गए विधेयकों में राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता और प्रबंधन संस्थान विधेयक, 2021, नौवहन के लिए समुद्री सहायता विधेयक, 2021, किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2021, फैक्टरिंग नियमन (संशोधन) विधेयक, 2021, अंतर्देशीय पोत विधेयक, 2021, दिवाला और दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक, 2021, नारियल विकास बोर्ड (संशोधन), विधेयक, 2021, भारतीय विमानपत्तन आर्थिक नियामक प्राधिकरण (संशोधन) विधेयक, 2021, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग विधेयक, 2021, आवश्यक रक्षा सेवा विधेयक, 2021, सीमित देयता भागीदारी (संशोधन) विधेयक, 2021, जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम (संशोधन) विधेयक, 2021, संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (संशोधन) विधेयक, 2021, न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2021, कराधान कानून (संशोधन) विधेयक, 2021, केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2021, सामान्य बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) संशोधन विधेयक, 2021, राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (संशोधन) विधेयक, 2021, भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए राष्ट्रीय आयोग (संशोधन) विधेयक, 2021, संविधान (एक सौ सत्ताईसवां संशोधन) विधेयक, 2021, विनियोग (नंबर 3) विधेयक, 2021 और विनियोग (नंबर 4) विधेयक, 2021 शामिल हैं।
 
संसद का मानसून सत्र-2021, 19 जुलाई को शुरू हुआ था। इसे 11 अगस्त, 2021 को अनिश्चितकाल के लिए स्थागित कर दिया गया है। इस सत्र में 24 दिनों की अवधि में 17 बैठकें आयोजित की गई। इस सत्र में मूल रूप से 19 जुलाई से 13 अगस्त तक 19 बैठकें आयोजित करने का कार्यक्रम था। दोनों सदनों में लगातार व्यवधान और आवश्यक सरकारी कामकाज के पूरा होने के कारण इस सत्र में कटौती की गई।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

भारत ने UNSC में क्यों उठाया समुद्री सुरक्षा का मुद्दा, विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला से जानिए