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आखि‍र कौन हैं ‘इस्‍लाम का बायकॉट’ करने वाली तसलीमा नसरीन?

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नवीन रांगियाल

तसलीमा नसरीन ने हाल ही में ट्व‍िटर पर लिखा था,

‘इस्‍लाम धर्म में सुधार की जरुरत है, नहीं तो आधुनिक सभ्‍यता में इस धर्म के लिए कोई जगह नहीं है’

इसके पहले तसलीमा ने ट्व‍िटर पर ही लिखा था, ‘बायकॉट इस्‍लाम’

तसलीमा नसरीन के इन ट्वीट्स के बाद सोशल मीडि‍या में खासा बवाल हुआ। जहां इस्‍लामि‍क कट्टरपंथि‍यों ने उनकी आलोचना की तो बाकी लोग खुलकर उनके समर्थन में आए।

तसलीमा दरअसल, लगातार खुलकर इस्‍लाम की बुराईयों और इस धर्म की खामियों के बारे में बात करती हैं।
हाल ही में फ्रांस में मोहम्‍मद पैगंबर के कार्टून को लेकर चल रहे विवाद में भी वे खुलकर अपना पक्ष रख रही हैं। वे लगातार ट्वीट करती हैं और मुस्‍लिम कट्टरतवाद को आइना दिखाती रहती हैं।

तसलीमा पाकिस्‍तान मूल के तारेक फतेह की तरह ही इस्‍लाम की बुराईयों की आलोचना करती हैं और भारत की पैरवी करती रही हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि आखि‍र कौन हैं तसलीमा नसरीन जो एक मुस्‍लि‍म महिला होते हुए भी इस्‍लामिक कट्टरता की जमकर आलोचना करती हैं।

कौन है तसलीमा?
तसलीमा नसरीन बांग्लादेश की जानी-मानी लेखिका हैं, वे अब तक कई किताबें लिख चुकी हैं, वे कविताएं लिखती हैं और उनकी एक नॉवेल ‘लज्‍जा’ पर भारत में फि‍ल्‍म भी बन चुकी है। इस फि‍ल्‍म के बाद उनके खि‍लाफ फतवा जारी कर दिया गया था।

इस्‍लामिक कट्टरता के खि‍लाफ लिखने और बयानबाजी की वजह से वे मुस्‍लिम कट्टरपंथि‍यों के निशाने पर रहती हैं। बांग्‍लादेश मुस्‍लिम देश है इसी वजह से उन्‍हें वहां से निर्वासित होकर भारत में शरण लेना पड़ी। हालांकि वे स्‍वीडन की नागरिक हैं। लेकिन वे बार-बार अपना वीजा बढवाकर भारत में ही रहती हैं। वे साल 2004 से भारत में रह रही हैं। तसलीमा पेशे से एक डॉक्‍टर रही हैं, लेकिन बाद में वे लेखि‍का बन गई।

25 अगस्‍त 1962 में बांग्‍लादेश के मयमनसिंह में पैदा हुईं तसलीमा ने बांग्‍लादेश से ही चिकित्‍सा में डि‍ग्री ली है। पहले वे यूरोप और अमेरिका में रहती थी, बाद में वे भारत में रहने लगी। इस्‍लाम पर टि‍प्‍पणी करने की वजह से उन पर कई बार हमले की कोशिश हो चुकी हैं। वे नारीवादी आंदोलन से भी जुड़ी हैं, और चाहती हैं कि भारत में हर क्षेत्र में महिलाओं की मजबूत भागीदारी हो। अपने इंटरव्‍यू में वे कई बार अपने देश बांग्‍लादेश लौटने की बात करती हैं, लेकिन उन्‍हें वहां जान से मारने का खतरा होने की वजह से वे वहां नहीं जा पा रही हैं।

एक बार उन्‍होंने मशहूर बांग्‍ला लेखक सुनील गंगोपध्‍यान पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। इसलिए उन पर कई बार सस्‍ती लोकप्र‍ि‍यता हासिल करने के भी आरोप लगते रहे हैं, हालांकि फि‍लहाल वे एक बड़ी और जानी-मानी लेखि‍का हैं।

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