Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia
Advertiesment

तीन तलाक खत्म करने वाला बिल लोकसभा में पेश

हमें फॉलो करें तीन तलाक खत्म करने वाला बिल लोकसभा में पेश
, गुरुवार, 28 दिसंबर 2017 (15:15 IST)
नई दिल्ली। तीन तलाक को प्रतिबंधित करने और विवाहित मुस्लिम महिलाओं के अधिकार सुरक्षित करने से संबंधित ‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2017 को सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में पेश कर दिया। लोकसभा में आज ही इस पर चर्चा भी शुरू हुई। मामले से जुड़ी हर जानकारी...
 
* केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह कानून ऐतिहासिक है और उच्चतम न्यायालय द्वारा ‘तलाक ए बिदत’ को गैरकानून घोषित किए जाने के बाद मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए इस सदन द्वारा इस संबंध में विधेयक पारित करना जरूरी हो गया है।
* उन्होंने इस संबंध में कुछ सदस्यों की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि यह कानून किसी मजहब से जुड़ा नहीं बल्कि नारी सम्मान से जुड़ा है।
* इससे पहले विधेयक पेश किए जाने का विरोध करते हुए एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया कि यह विधेयक संविधान की अवहेलना करता है और कानूनी रूपरेखा में उचित नहीं बैठता।
* उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के साथ अन्याय के मामलों से निपटने के लिए घरेलू हिंसा कानून और आईपीसी के तहत अन्य पर्याप्त प्रावधान हैं और इस तरह के नये कानून की जरूरत नहीं है।
* ओवैसी ने कहा कि यह विधेयक पारित होने और कानून बनने के बाद मुस्लिम महिलाओं को छोड़ने की घटनाएं और अधिक बढ़ जाएंगी।
* राजद के जयप्रकाश नारायण यादव ने भी विधेयक को गैरजरूरी बताते हुए कहा कि इसमें दोषी को तीन साल की सजा का प्रावधान सही नहीं है।
* बीजद के भर्तृहरि महताब ने विधेयक को पेश करने के तरीके पर सवाल खड़ा किया और कहा कि इसका मसौदा बनाने में खामियां हैं। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में तीन तलाक के संबंध में उच्चतम न्यायालय का दिया हुआ फैसला नहीं झलकता और सरकार को इसे वापस लेकर पुनर्विचार करना चाहिए।
* आईयूएमएल के ईटी मोहम्मद बशीर और अन्नाद्रमुक के ए अनवर राजा ने भी विधेयक को गैरजरूरी बताते हुए कहा कि यह विवाहित मुस्लिम महिलाओं के साथ न्याय करने के बजाय उनके साथ अन्याय को बढ़ाएगा।
* इन सभी आपत्तियों को खारिज करते हुए कानून मंत्री प्रसाद ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक दिन है जो इस सदन में मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए विधेयक पेश किया जा रहा है।
* उन्होंने कहा कि यह कानून किसी पूजा, इबादत या मजहब से जुड़ा नहीं होगा बल्कि नारी सम्मान और गरिमा के लिए है।
* प्रसाद ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने ‘तलाक ए बिदत’ को गैरकानूनी करार दिया जिसके बाद अगर मुस्लिम महिलाओं के साथ अन्याय की घटनाएं हो रहीं हैं तो क्या यह सदन खामोश रहेगा?
* उन्होंने कहा कि कुछ सदस्य बुनियादी अधिकारों और अधिकारों की समानता की बात कर रहे हैं तो क्या इस सदन को तीन तलाक की पीड़िताओं के साथ हो रहे अन्याय को नहीं देखना होगा।
* प्रसाद ने विधेयक को संविधान के बुनियादी ढांचे के खिलाफ होने संबंधी कुछ सदस्यों की आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के तहत यह विधेयक पूरी तरह संविधान के बुनियादी ढांचे के तहत है और इस सदन को विवाहित मुस्लिम महिलाओं के साथ हो रहे अन्याय को खत्म करने के लिए कानून लाने का पूरा अधिकार है।
* बाद में लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि कानून मंत्री प्रसाद ने उनसे विशेष मामले के तौर पर उक्त विधेयक पर आज ही सदन में चर्चा कराके इसे पारित कराने का आग्रह किया है और दोपहर दो बजे इस पर चर्चा शुरू होगी। हालांकि कुछ सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताई। 
* केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने तीन तलाक विधेयक पेश किया।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

मीन राशि का वार्षिक भविष्यफल : पं. प्रेम कुमार शर्मा के अनुसार