स्वच्छ भारत अभियान : गांधीजी के सपने को पूरा करने में जुटे मोदी

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का मानना था कि साफ-सफाई, ईश्वर भक्ति के बराबर है और इसलिए उन्होंने लोगों को स्वच्छता  बनाए रखने संबंधी शिक्षा दी थी और देश को एक उत्कृष्ट संदेश दिया था। उनका कहना था कि उन्होंने 'स्वच्छ भारत' का  सपना देखा था जिसके लिए वे चाहते थे कि भारत के सभी नागरिक एकसाथ मिलकर देश को स्वच्छ बनाने के लिए  कार्य करें। 
 
महात्‍मा गांधी के स्‍वच्‍छ भारत के स्‍वप्‍न को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 2 अक्‍टूबर 2014 को स्वच्छ  भारत अभियान शुरू किया और इसके सफल कार्यान्वयन हेतु भारत के सभी नागरिकों से इस अभियान से जुड़ने की  अपील की। इस अभियान का उद्देश्य पांच वर्ष में स्वच्छ भारत का लक्ष्य प्राप्त करना है ताकि बापू की 150वीं जयंती को  इस लक्ष्य की प्राप्ति के रूप में मनाया जा सके। स्वच्छ भारत अभियान सफाई करने की दिशा में प्रतिवर्ष 100 घंटे के  श्रमदान के लिए लोगों को प्रेरित करता है। 
 
प्रधानमंत्री ने मृदुला सिन्‍हा, सचिन तेंदुलकर, बाबा रामदेव, शशि थरूर, अनिल अम्‍बानी, कमल हसन, सलमान खान,  प्रियंका चोपड़ा और तारक मेहता का उल्‍टा चश्‍मा की टीम जैसी नौ नामचीन हस्तियों को आमंत्रित किया कि वे भी  स्‍वच्‍छ भारत अभियान में अपना सहयोग प्रदान करें। लोगों से कहा गया कि वे सफाई अभियानों की तस्‍वीरें सोशल  मीडिया पर साझा करें और अन्‍य नौ लोगों को भी अपने साथ जोड़ें ताकि यह एक श्रृंखला बन जाए। आम जनता को भी  सोशल मीडिया पर हैश टैग#MyCleanIndia लिखकर अपने सहयोग को साझा करने के लिए कहा गया।
 
एक कदम स्वच्छता की ओर : मोदी सरकार ने एक ऐसा रचनात्मक और सहयोगात्मक मंच प्रदान किया है जो राष्ट्रव्यापी आंदोलन की सफलता सुनिश्चित करता है। यह मंच प्रौद्योगिकी के माध्यम से नागरिकों और संगठनों के अभियान संबंधी प्रयासों के बारे में जानकारी प्रदान करता है। कोई भी व्यक्ति, सरकारी संस्था या निजी संगठन अभियान में भाग ले सकते हैं। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को उनके दैनिक कार्यों में से कुछ घंटे निकालकर भारत में स्वच्छता संबंधी कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
 
स्वच्छ भारत समुदाय अधिक से अधिक स्वयंसेवकों को इस अभियान से जोड़ेगा जो अपने आसपास के स्थानों में इस  अभियान के सफल कार्यान्वयन को सुनिश्चित करेंगे। इन सभी गतिविधियों का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को इस  अभियान से जोड़कर इसे एक जनआंदोलन बनाना है जिससे 2019 तक गांधीजी का स्वच्छ भारत का स्वप्न पूरा किया  जा सके।
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स्वच्छ और हरित भारत : स्वच्छ भारत अभियान का उद्देश्य केवल आसपास की सफाई करना ही नहीं है अपितु नागरिकों की सहभागिता से अधिक-से अधिक पेड़ लगाना, कचरा मुक्त वातावरण बनाना, शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराकर एक स्वच्छ भारत का निर्माण करना है। देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए स्वच्छ भारत का निर्माण करना अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि अस्वच्छ भारत की तस्वीरें भारतीयों के लिए अक्सर शर्मिंदगी की वजह बन जाती हैं इसलिए स्वच्छ भारत के निर्माण एवं देश की छवि सुधारने का यह सही समय एवं अवसर है। यह अभियान न केवल नागरिकों को स्वच्छता संबंधी आदतें अपनाने बल्कि हमारे देश की छवि स्वच्छता के लिए तत्परता से काम कर रहे देश के रूप में बनाने में भी मदद करेगा।
'बापू के नारे थे क्विट इंडिया और क्लीन इंडिया' :  मोदी का कहना है कि राष्ट्रपति ने क्विट इंडिया और क्लीन इंडिया का नारा दिया था।  बापू का क्लीन इंडिया का सपना अधूरा है। प्रधानमंत्री ने स्वच्छता अभियान में सबको अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि  इस देश को गंदगी से मुक्त करना सिर्फ सफाई कर्मचारियों का काम नहीं है। सवा सौ करोड़ देशवासी जैसे भारत माता की संतान हैं। 
 
'मार्स पर पहुंच सकते हैं, तो क्या गली-मुहल्ले साफ नहीं कर सकते'  : पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने एक संबोधन में कहा कि यदि भारतवासी कम से कम खर्चे में मार्स पर पहुंच सकते हैं तो  क्या अपना गली-मुहल्ला साफ नहीं कर सकते? उन्होंने कहा, 'मैं जानता हूं यह कठिन काम है, लेकिन हमारे पास  2019 तक का समय है। भारतवासी ये कर सकते हैं। भारतवासी कम से कम खर्चे में मार्स पर पहुंच सकते हैं तो क्या  अपने गली-मुहल्ले साफ नहीं कर सकते? 
 
'गंदी जगह को साफ करें, वीडियो अपलोड करें' :  पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, 'हमने सोशल मीडिया में भी इस अभियान की शुरुआत की है। उनका कहना था कि आप किसी गंदी जगह की फोटो अपलोड करें, फिर उसकी सफाई कर वीडियो अपलोड करें। राजनीति से प्रेरित होकर इस अभियान को न देखें। यह राष्ट्रनीति से प्रेरित अभियान है। उनके पीएम बनने से पहले से इस देश में कई सामाजिक संगठन हैं जो सफाई के लिए काम कर रहे हैं। महात्मा गांधी हर गली में सफाई अभियान के लिए नहीं गए थे, लेकिन उनकी प्रेरणा ने ऐसा कराया। ये काम सिर्फ सरकार का, मंत्रियों का नहीं है। यह काम जन सामान्य का है।'
 
शहरी क्षेत्रों के लिए स्वच्छ भारत मिशन : सरकार के इस मिशन का उद्देश्य 1.04 करोड़ परिवारों को लक्षित करते हुए 2.5 लाख सामुदायिक शौचालय, 2.6 लाख सार्वजनिक शौचालय और प्रत्येक शहर में एक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की सुविधा प्रदान करना है।

इस कार्यक्रम के तहत आवासीय क्षेत्रों में जहां व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों का निर्माण करना मुश्किल है वहां सामुदायिक शौचालयों का निर्माण करना। पर्यटन स्थलों, बाजारों, बस स्टेशन, रेलवे स्टेशनों जैसे प्रमुख स्थानों पर भी सार्वजनिक शौचालय का निर्माण किया जाएगा। यह कार्यक्रम पांच साल की अवधि में 4401 शहरों में लागू किया जाएगा। कार्यक्रम पर खर्च किए जाने वाले 62,009 करोड़ रुपए में से केंद्र सरकार की तरफ से 14623 रुपए उपलब्ध कराए जाएंगे। 
 
केंद्र सरकार द्वारा प्राप्त होने वाले 14623 करोड़ रुपयों में से 7366 करोड़ रुपए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर, 4,165  करोड़ रुपए व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों पर, 1828 करोड़ रुपए जनजागरूकता पर और सामुदायिक शौचालय बनवाए जाने  पर 655 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इस कार्यक्रम खुले में शौच, अस्वच्छ शौचालयों को फ्लश शौचालय में परिवर्तित  करने, मैला ढ़ोने की प्रथा का उन्मूलन करने, नगरपालिका ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और स्वस्थ एवं स्वच्छता से जुड़ीं प्रथाओं  के संबंध में लोगों के व्यवहार में परिवर्तन लाना आदि शामिल हैं।
 
ग्रामीण क्षेत्रों के लिए स्वच्छ भारत मिशन : निर्मल भारत अभियान कार्यक्रम भारत सरकार द्वारा चलाया जा रहा ग्रामीण क्षेत्र में लोगों के लिए मांग आधारित एवं जन केंद्रित अभियान है, जिसमें लोगों की स्वच्छता सम्बन्धी आदतों को बेहतर बनाना, स्व सुविधाओं की मांग उत्पन्न करना और स्वच्छता सुविधाओं को उपलब्ध कराना है जिससे ग्रामीणों के जीवन स्तर को बेहतर बनाया जा सके।
 
इस अभियान का उद्देश्य पांच वर्षों में भारत को खुले शौच से मुक्त देश बनाना है। अभियान के तहत देश में लगभग 11  करोड़ 11 लाख शौचालयों के निर्माण के लिए एक लाख चौंतीस हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। बड़े पैमाने पर  प्रौद्योगिकी का उपयोग कर ग्रामीण भारत में कचरे का इस्तेमाल उसे पूंजी का रुप देते हुए जैव उर्वरक और ऊर्जा के  विभिन्न रूपों में परिवर्तित करने के लिए किया जाएगा। 
 
अभियान को युद्ध स्तर पर प्रारंभ कर ग्रामीण आबादी और स्कूल शिक्षकों और छात्रों के बड़े वर्गों के अलावा प्रत्येक स्तर  पर इस प्रयास में देश भर की ग्रामीण पंचायत,पंचायत समिति और जिला परिषद को भी इससे जोड़ा जाएगा। 
 
अभियान के एक भाग के रुप में प्रत्येक पारिवारिक इकाई के अंतर्गत व्यक्तिगत घरेलू शौचालय की इकाई लागत को  10,000 से बढ़ाकर 12,000 रुपए कर दिया गया है और इसमें हाथ धोने, शौचालय की सफाई एवं भंडारण को भी  शामिल किया गया है। इस तरह के शौचालय के लिए सरकार की तरफ से मिलने वाली सहायता 9,000 रुपए और  राज्य सरकार का योगदान 3000 रुपए होगा। जम्मू एवं कश्मीर एवं उत्तरपूर्व राज्यों एवं विशेष दर्जा प्राप्त राज्यों को  मिलने वाली सहायता 10,800 रुपए होगी जिसमें राज्य का योगदान 1200 रुपए होगा। अन्य स्रोतों से अतिरिक्त  योगदान करने की स्वीकार्यता होगी।
 
स्वच्छ भारत-स्वच्छ विद्यालय अभियान : मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन स्वच्छ भारत-स्वच्छ विद्यालय अभियान केन्द्रीय 25 सितंबर, 2014 से 31 अक्टूबर 2014 के बीच केंद्रीय विद्यालयों और नवोदय विद्यालय संगठन में आयोजित किया गया। इस दौरान की जाने वाली गतिविधियों में शामिल हैं- 

- स्कूल कक्षाओं के दौरान प्रतिदिन बच्चों के साथ सफाई और स्वच्छता के विभिन्न पहलुओं पर विशेष रूप से महात्मा  गांधी की स्वच्छता और अच्छे स्वास्थ्य से जुड़ीं शिक्षाओं के संबंध में विचार विमर्श किया गया।
 
- कक्षा, प्रयोगशाला और पुस्तकालयों आदि की सफाई की गई।
 
-स्कूल में स्थापित किसी भी मूर्ति या स्कूल की स्थापना करने वाले व्यक्ति के योगदान के बारे में बात की गई और इस  मूर्तियों की सफाई करवाई गई।
 
-शौचालयों और पीने के पानी वाले क्षेत्रों की सफाई करवाई गई। 
 
-स्कूलों की रसोई और सामान ग्रह की सफाई की गई।
 
-खेल के मैदानों को साफ किया गया।
 
-स्कूल बगीचों का रखरखाव और सफाई की गई।
 
-स्कूल भवनों का वार्षिक रखरखाव, रंगाई एवं पुताई पर ध्यान दिया गया।
 
-स्कूलों में निबंध, वाद-विवाद, चित्रकला, सफाई और स्वच्छता पर प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
 
-'बाल मंत्रिमंडलों के निगरानी दल बनाए गए और सफाई अभियान की निगरानी पर ध्यान दिया गया। 
 
इसके अलावा, फिल्म शो, स्वच्छता पर निबंध, पेंटिंग और अन्य प्रतियोगिताएं, नाटकों आदि के आयोजन द्वारा स्वच्छता  एवं अच्छे स्वास्थ्य का संदेश प्रसारित करने पर जोर दिया गया। शिक्षा मंत्रालयों ने इसके अलावा शालाओं के छात्रों,  शिक्षकों, अभिभावकों और समुदाय के सदस्यों को शामिल करते हुए सप्ताह में दो बार आधे घंटे सफाई अभियान शुरू  करने का प्रस्ताव रखा।
 
प्रधानमंत्री ने की ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की शुरुआत अक्टूबर 02, 2014 से करते हुए कहा था कि इसे देशभक्ति की  भावना से जोड़कर देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक भारतीय नागरिक होने की खातिर यह हमारी सामाजिक 
 
जिम्मेदारी है कि हम वर्ष 2019 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाए जाने तक उनके स्वच्छ भारत के सपने को  पूरा करें।
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जन आंदोलन में बदलने का आह्वान  :  प्रधानमंत्री ने देश की सभी पिछली सरकारों और सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक संगठनों द्वारा सफाई को लेकर किए  गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत को स्वच्छ बनाने का काम किसी एक व्यक्ति या अकेले सरकार का नहीं है, यह काम तो देश के 125 करोड़ लोगों द्वारा किया जाना है जो भारत माता के पुत्र-पुत्रियां हैं। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान को एक जन आंदोलन में बदल देना चाहिए और लोगों को ठान लेना चाहिए कि वह न  तो गंदगी करेंगे और न ही करने देंगे।
 
विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के मुताबिक साफ-सफाई न होने के चलते भारत में प्रति व्‍यक्ति औसतन 6500 रुपए बीमारियों  पर जाया हो जाते हैं। उन्‍होंने कहा कि इसके मद्देनजर स्‍वच्‍छ भारत जन स्‍वास्‍थ्‍य पर अनुकूल असर डालेगा और इसके  साथ ही गरीबों की गाढ़ी कमाई की बचत भी होगी, जिससे अंतत: राष्‍ट्रीय अर्थव्‍यवस्‍था में महत्‍वपूर्ण योगदान होगा।  हालांकि इसी वर्ष फरबरी में केन्द्रीय शहरी विकास और संसदीय कार्यमंत्री एम. वैंकेया नायडू ने कहा कि स्वच्छ भारत  अभियान को गति देने के लिए केन्द्र सरकार, राज्यों को और राशि आवंटित करेगी। विदित हो कि 2010 की यूएन रिपोर्ट के अनुसार देश की समूची जनसंख्या में से 60 फीसदी (2.5 बिलियन) लोगों के पास शौचालयों का अभाव है  और इससे 13 करोड़ परिवार प्रभावित होते हैं। शौचालयों और अन्य सुविधाओं के न होने से भारत को प्रतिवर्ष 54 अरब  रुपए का नुकसान होता है।     
 
वर्ष 2013 में देश के करीब एक तिहाई बच्चे कुपोषण के शिकार हैं जबकि सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का कहना है  कि देश के शहरों और कस्बों में प्रतिदिन होने वाला एक तिहाई कचरा सड़कों पर ही सड़ता रहता है। देश के अकेले चार  बड़े शहरों-दिल्ली, चेन्नई , मुंबई और कोलकाता में 16 बिलियन लीटर गंदा पानी पैदा होता है जिसे ठिकाने लगाना एक  बड़ी समस्या है। पर सवाल यह है कि क्या स्वच्‍छ भारत अभियान अपने उद्देश्यों में सफल हो पाएगा? दुर्भाग्य से पिछले  प्रयास सफल नहीं रहे हैं और लोग प्रति दो घंटे श्रमदान भी करें लेकिन इससे जमा हुआ कचरा कहां जाएगा? हम नौ  करोड़ शौचालय तो बना लेंगे लेकिन क्या एक पूरी पीढ़ी को बदलने में सफल हो सकेंगे?

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