नई दिल्ली। हिन्दी सिनेमा के माध्यम से प्रवासी भारतीयों की नई पीढ़ी ने भारतीय संस्कृति और भाषा को जाना। यह हिन्दी सिनेमा का बहुत बड़ा योगदान है, जो कला के किसी अन्य माध्यम से संभव नहीं है।
उक्त बातें प्रसिद्ध प्रवासी भारतीय लेखक तेजेंद्र शर्मा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज में 'सॉफ्ट ग्लोबल पॉवर ऑफ हिन्दी सिनेमा' विषय पर आयोजित व्याख्यान में कहीं।
उन्होंने कहा कि हिन्दी सिनेमा पिछले 50 सालों से विदेशियों के दिलों को छूता रहा है। भारतीय फिल्म, संगीत, अभिनेता और भाषा को लोग विदेशों में भावनात्मक रूप से काफी पसंद करते हैं, जबकि अपने यहां ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि कला विभाजित नहीं होती, चाहे वह कला सिनेमा हो या व्यावसायिक सिनेमा।
तेजेंद्र शर्मा ने अपने व्याख्यान में कुछ महत्वपूर्ण शोध तथ्यों, हिन्दी फिल्मों के गीतों, संवादों और तस्वीरों द्वारा विदेशों में हिन्दी सिनेमा की लोकप्रियता के संबंध में रोचक बातें रखीं। कॉलेज के पूर्व वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. प्रभात कुमार ने भी विदेशों में हिन्दी सिनेमा के प्रभाव पर अपने अनुभव और विचार साझा किए।