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ला ट्रोब यूनिवर्सिटी मेलबर्न में हिंदी की कार्यशाला

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रेखा राजवंशी

इस वर्ष अक्टूबर 23 को ऑस्ट्रेलिया इंडिया इंस्टिट्यूट और ला ट्रोब यूनिवर्सिटी ने ऑस्ट्रेलिया और भारत में हिंदी की स्थिति के बारे में चर्चा करने के लिए कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में कैनबरा और सिडनी के प्रमुख लोगों ने हिस्सा लिया।
  
डॉ. इयान वुल्फोर्ड और ऑस्ट्रेलिया इंडिया इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर क्रेग जेफरी ने सबका स्वागत किया। भारत से प्रसिद्ध पत्रकार और लेखिका मृणाल पांडे, वाणी प्रकाशन की अदिति माहेश्वरी और हिंदी फिल्मों के लेखक व कॉमेडियन वरुण ग्रोवर ने हिस्सा लिया। कैनबरा से एएनयू के प्रोफ़ेसर रिचार्ड बार्ज़, सिडनी से माला मेहता, कुमुद मिरानी और रेखा राजवंशी को निमंत्रित किया गया था। मेलबर्न के दिनेश श्रीवास्तव, सुभाष शर्मा, पूर्णिमा पाटिल और अन्य हिंदी के विद्वानों ने भाग लिया।
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पिछले सालों में ऑस्ट्रेलिया में राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी की प्रगति हुई है। पाठ्यक्रम विकसित किया गया है। मेलबर्न और सिडनी के कुछ विद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जाने लगी है। दो विश्वविद्यालयों में हिंदी की शिक्षा सुविधा प्रदान की जाती है- ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी कैनबेरा और ला ट्रोब युनिवर्सिटी मेलबर्न। डॉ. इयान वुल्फोर्ड ला ट्रोब यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं और इस कार्यक्रम का आयोजन उन्हीं के अथक प्रयासों से किया गया था। 
 
कार्यशाला में हिंदी के विविध पक्षों पर विचार-विमर्श हुआ। दिनेश श्रीवास्तव ने विक्टोरिया में हिंदी के विकास के बारे में बात की तो माला मेहता ने न्यू साउथ वेल्स के विद्यालयों में हिंदी की स्थिति के बारे में बात की। रेखा राजवंशी ने ऑस्ट्रेलिया में चल रही साहित्यिक गतिविधियों की चर्चा की और ऑस्ट्रेलिया के आदिवासी ड्रीम टाइम एमिमेशन फिल्म का हिंदी अनुवाद भी दिखाया।
 
रिचर्ड बार्ज़ ने विश्वविद्यालय शिक्षण में हिंदी की स्थिति का उल्लेख किया। एसबीएस रेडियो की कुमुद मिरानी ने मीडिया और हिंदी की स्थिति पर प्रकाश डाला। मेलबर्न के रेंजबैंक प्राइमरी विद्यालय के प्रधानाचार्य कॉलिन अवेरी और अध्यापिका पूजा ने अपने स्कूल में हिंदी शिक्षा के बारे में चर्चा की।
 
भारत से आईं विशेष अतिथि वाणी प्रकाशन की अदिति माहेश्वरी ने अनुवाद से संबंधित विविध पहलुओं के बारे में बातचीत की। जानीमानी पत्रकार मृणाल पांडे ने कहा कि हिंदी के लेखन में पैसा नहीं है फिर भी हम लिखते जाते हैं कि शायद भविष्य में लोग इसे पढ़ें। उन्होंने भाषा के सरलीकरण का विरोध किया और कहा कि ज़रूरी है कि हम बच्चों को विविध व विस्तृत शब्द भंडार दें।


कॉमेडियन, स्क्रीन लेखक और मसान फिल्म के गीतकार वरुण ग्रोवर ने कॉमेडी शो भी किया। हिंदी के क्षेत्र में उठाए गए इस कदम की सबने सराहना की और ऑस्ट्रेलिया में हिंदी के उज्जवल भविष्य की कामना की।

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