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जसवंत सिंह : प्रोफाइल

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जसवंत सिंह एक वरिष्ठ भारतीय राजनेता हैं। वे अपनी नम्रता और नैतिकता के लिए जाने जाते हैं। जसवंतसिंह उन गिनेचुने नेताओं में से हैं जिन्हें भारत के रक्षामंत्री, वित्तमंत्री और विदेशमंत्री बनने का अवसर मिला। अपने कार्यकाल के दौरान अपरिमित योगदान के लिए जसवंत सिंह को 2001 में उत्कृष्ट सांसद का पुरस्कार प्रदान किया गया।
 
प्रारंभिक जीवन : 3 जनवरी 1938 को जसवंत सिंह का जन्म राजस्थान के बाड़मेर जिले के गांव जसोल में राजपूत परिवार में हुआ। उन्होंने मेयो कॉलेज अजमेर से बीए, बीएससी करने के अलावा भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून और खड़गवासला से भी सैन्य प्रशिक्षण लिया। जोधपुर के पूर्व महाराजा गजसिंह के करीबी जसवंत सिंह 1960 के दशक में भारतीय सेना में अधिकारी रहे। 
 
पारिवारिक पृष्‍ठभूमि : जसवंत सिंह के पिता का नाम ठाकुर सरदारा सिंह और माता का नाम कुंवर बाई सा है। 
 
राजनीतिक जीवन : 1980 में वे पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए। 1996 में उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वित्तमंत्री चुना गया। हालांकि वे 15 दिन ही वित्तमंत्री रहे और फिर वाजपेयी सरकार गिर गई। 2 साल बाद 1998 में दोबारा वाजपेयी की सरकार बनने पर उन्हें विदेश मंत्री बनाया गया। 
 
विदेशमंत्री के रूप में उन्होंने भारत-पाकिस्तान संबंधों को सुधारने का भरसक प्रयास किया। 2000 में उन्होंने भारत के रक्षामंत्री का कार्यभार भी संभाला। 2001 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ सांसद का सम्मान भी मिला। फिर साल 2002 में यशवंत सिन्हा के स्थान पर उन्हें वित्तमंत्री बनाया गया और मई 2004 तक उन्होंने वित्तमंत्री के रूप में कार्य किया।
 
2009 को भारत विभाजन पर उनकी किताब जिन्ना-इंडिया, पार्टिशन, इंडेपेंडेंस पर खासा बवाल हुआ। नेहरू-पटेल की आलोचना और जिन्ना की प्रशंसा के लिए उन्हें भाजपा से निकाल दिया गया। कुछ दिनों बाद लालकृष्ण आडवाणी के प्रयासों से पार्टी में उनकी सम्मानजनक वापसी भी हो गई। भले ही वे पार्टी में वापसी करने में सफल रहे, पर पार्टी में उन्हें नेपथ्य में धकेल दिया गया। 
 
2014 में हुए लोकसभा चुनावों में उन्हें पार्टी ने बाड़मेर से सांसद का टिकट नहीं दिया। इतना ही नहीं अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए एक बार फिर छह साल के लिए पार्टी से निष्काषित भी कर दिया। मोदी लहर के कारण उन्हें कर्नल सोनाराम के हाथों हार का सामना करना पड़ा।
 
जसवंत सिंह एक आदर्शवादी व्यक्ति के रूप में जाने जाते है। जब उन्हें विदेश नीति का कार्यभार सौपा गया था तब उन्होंने बड़ी कुशलता से भारत और पाकिस्तान के बीच के तनाव को कम किया था। उनकी लेखनी में उनकी परिपक्वता और आदर्शों के प्रति उनका आदर साफ झलकता है। जसवंत सिंह को लोगों से घुलना-मिलना पसंद है और वे अस्पताल, संग्रहालय और जल संरक्षण जैसी कई परियोजनाओं के ट्रस्टी भी हैं। 
 
जब वे विदेश मंत्री थे तब दो आतंकवादियों को कन्धहार, अफ़ग़ानिस्तान सुरक्षित पहुंचाने के उनके फैसले की विविध राजनीतिक पक्ष द्वारा कड़ी आलोचना भी हुई थी। दो आतंकवादियों को इंडियन एयरलाइंस के हवाई जहाज को अपहरण कर बंधक बनाए हुए यात्रियों के बदले भारत सरकार द्वारा छोड़ दिया। 28 जनवरी 2015 को जसवंत सिंह का निधन हो गया। 

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