Publish Date: Tue, 19 May 2026 (14:44 IST)
Updated Date: Tue, 19 May 2026 (17:49 IST)
प्रख्यात पत्रकार कल्याण सिंह कोठारी हमारे बीच नहीं रहे। 18 मई को दोपहर 12 बजे अपने निवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। आपका जाना का चले जाना पत्रकारिता जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसे पूरा नहीं किया जा सकता। मगर आपके लेखन से आने वाली पीढ़िया निरंतर लाभांवित होती रहेंगी। कोठारी के परिवार में पत्नी हंसा कोठारी, पुत्र पुनीत कोठारी, बहू संजना कोठारी, बेटी पूर्वा मोहनोत समेत अन्य सदस्य हैं।
7 जून 1944 को जोधपुर में जन्मे पत्रकार कल्याणसिंह कोठारी परिचय के मोहताज नहीं हैं। अपने जीवन के 83 बसंत देख चुके कोठारी ने अपने बचपन से लेकर युवा अवस्था तक अध्ययन एवं अनेक कार्ययोजनाओं में कीर्तिमान स्थापित किए हैं। वहीं, दूसरी ओर जीवन की परवाह किए बिना अनेक प्रकार की पत्रकारिता की है। इनमें भारत-पाकिस्तान के युद्ध के समय आप जब वॉर जर्नलिस्ट के रूप में जोधपुर से खबरें लिख रहे थे, तब कुछ मीटर की दूरी पर बम के धमाकों की आवाज सुनाई देती थी, जो बाद में उनके कानों में गूंजती रही। यह सब आपके संघर्षपूर्ण जीवन की कहानी को बयां करती है।
इतना ही नहीं यु़द्ध के समय बंकरों में रहकर सीमित संसाधनों के चलते भूखे-प्यासे रहकर भी आपने दिन बिताए एवं जान जोखिम में डालकर पाठकों के लिए युद्ध की स्थितियों की रिपोर्ट पाठकों तक पहुंचाई। आप के अनुभव से सैकड़ों पत्रकार, मीडिया शिक्षक, मीडिया शोधार्थी एवं विद्यार्थी लाभांवित हो चुके हैं। आप पर प्रोफेसर (डॉ) रमेश कुमार रावत द्वारा लिखी गई पुस्तक एवं डॉक्यूमेंट्री फिल्म 'मीडिया मेकर्स ऑफ राजस्थान- कल्याणसिंह कोठारी' ने काफी सुर्खियां बटोरीं। फिल्म एवं पुस्तक को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स एवं एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी शामिल किया गया।
इतना ही नहीं ऑल इंडिया मीडिया एज्यूकेटर्स कॉन्फ्रेंस की नींव भी आपने देश के प्रख्यात मीडिया शिक्षक डॉ. संजीव भानावत के साथ मिलकर रखी। जिसमें चार संस्करणों में करीब 1200 से अधिक मीडिया शिक्षकों, मीडिया प्रोफेशनल्स ने शोध पत्र प्रस्तुत किए हैं।
कोठारी जी इंजीनियर बनना चाहते थे, लेकिन गणित अच्छी नहीं होने के कारण इसे जारी नहीं रख पाए और आर्ट्स में एडमिशन ले लिया। आगे चलकर वकालत भी की एवं पत्रकारिता में अपना करियर बनाने का निश्चय किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में युद्ध पत्रकारिता, विधि पत्रकारिता, राजनीतिक पत्रकारिता, विकासात्मक पत्रकारिता, बाल संरक्षण एवं पंचायत पत्रकारिता, यूएन बॉडीज एवं सिविक पत्रकारिता, सिटीजन जर्नलिज्म, खोजी पत्रकारिता, आर्थिक पत्रकारिता, सांस्कृतिक एवं एतिहासिक स्थल पत्रकारिता, स्वास्थ्य पत्रकारिता आदि में आपका अनूठा योगदान रहा है।
लोक संवाद संस्थान-बाल संरक्षण एवं मीडिया एडवोकेसी संस्थान में भी आप सचिव के रूप में कार्य किया है। पत्रकारिता के बाद सफल जनसंपर्ककर्मी, मीडिया सलाहकार के रूप में आपने देश-विदेश की अनेक संस्थाओं में न केवल सेवाएं दीं अपितु मार्गदर्शन भी किया है। आपको विभिन्न संस्थाओं द्वारा समय-समय पर सम्मानित किया गया। इसी कड़ी में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने माणक अलंकरण से भी सम्मानित किया था। पत्रकारिता के क्षेत्र में रहते हुए आपने अमेरिका, यूरोप एवं दुबई की यात्राएं कीं एवं वहां के शैक्षणिक संस्थानों में भ्रमण भी किया।
बाबा आमटे दिव्यांग यूनिवर्सिटी जयपुर के कुलपति डॉ देव स्वरूप, इंडिया हेबिटेट सेंटर दिल्ली के निदेशक प्रो केजी सुरेश, राजस्थान विश्वविद्यालय के जनसंचार केंद्र के पूर्व अध्यक्ष प्रो संजीव भानावत सहित देश के मीडिया शिक्षकों एवं पत्रकारों ने अपनी शोक सवेदनाएं व्यक्त की हैं।
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