सात वचन से बँधी सात राखियाँ

सात राखी : सात वचन

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यह भारत में ही संभव है कि एक महीन रेशम डोरी से दिल की अनंत गहराइयों में छुपा प्यार अभिव्यक्त हो सकें। भाई और बहन के अनमोल रिश्ते को समर्पि‍त यह त्योहार मन में उमंग की सुरीली घंटियाँ बजा देता है। यूँ भी सावन मास सौन्दर्य का भीना मौसम माना गया है। यह मौसम साज-श्रृंगार और प्यार-अनुराग की कलाभिव्यक्तियों से आपुरित होता है। यही वजह है कि कलाई पर बँधने वाली राखी का सौन्दर्य रिश्ते की सादगी पर जीत जाता है।

इस मोहक मनभावन त्योहार पर इस बार बाँधें कुछ ऐसी राखियों को जो हर भाई-बहन के जीवन जीने का अंदाज बदल दें: यह राखी है प्यार, विश्वास, साथ, मुस्कान, सम्मान, स्वतंत्रता और क्षमा की।

प्यार की राखी : यह राखी सलमा-सितारें और मोतियों से नहीं सजी है। यह राखी, अपने मन के आँगन में खिलने वाले प्यार के मासूम फूल से बनी है। इसे बाँधने और बँधाने की यही शर्त है कि बहन और भाई दोनों यह कसम खाए कि उनका प्यार कभी नहीं बदलेगा। हर मौसम, हर समय, हर परिस्थिति में उनके प्यार का फूल तरोताजा रहेगा। चाहे बहन पराए आँगन की तुलसी बन जाए, चाहे रूनझुन पायल छनकाती दुल्हन, भाई ले आए। रिश्तों का सौन्दर्य और सादगी बनी रहे, बची रहे। दिल की गहराई में बसा प्यार निरंतर बढ़ता रहे, फलता-फूलता रहे। यह राखी इस मंगल त्योहार पर यही कसम चाहती है। दोनों के बीच महकते प्यार का फूल पैसों की तपिश से कभी ना मुरझा पाए।

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विश्वास की राखी : यह राखी बड़ी महीन लेकिन मजबूत डोरी से बनी है। इस राखी की यही शर्त है कि विश्वास की रेशम डोर दुनिया के ताने-बाने में कभी ना उलझ पाए। यानी हर हाल में भाई का बहन के प्रति और बहन का भाई के प्रति विश्वास बरकरार रहे। इसे यूँ भी कहा जा सकता है कि दोनों एक-दूसरे के प्रति विश्वास को टूटने नहीं देंगे।

अकारण एकदूजे पर अविश्वास की काली परत चढ़ने नहीं देंगे। अगर किसी एक से विश्वास की दीवार चटकती भी है तो उसकी परिस्थिति को उदार मन से समझने का प्रयास करेंगे। इस राखी को बाँधते हुए कसम लें कि एकदूजे का विश्वास बनेंगेऔर उसे संजोए रखेंगे।

साथ की राखी : 'चाहे सारी दुनिया तुम्हारे विरुद्ध हो तुम्हारा भाई हमेशा तुम्हारे साथ है।' यह अटूट सहारा देते शब्द सच्चे मन से हर बहन के अन्तर्मन में बैठे होने चाहिए। उसका यह भाव कि मेरा भाई है ना, और भाई का यह अहसास कि मेरी बहन सब संभाल लेगी,हर हाल में कायम रहे यही इस राखी को बाँधने की कोमल शर्त है। इस दुनिया में माँ और पिता के बाद भाई ही तो सच्चा निस्वार्थ साथ दे सकता है। देश का हर भाई अपनी बहन के साथ रहे एक अहसास बन कर, एक विश्वास बन कर तभी इस राखी की सार्थकता है।

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मुस्कान की राखी : यह राखी वचन चाहती है कि हर बहन के होंठों पर भाई का नाम सुनकर मुस्कान थिरक उठें। हर भाई की स्मृतियों के झरोखे से जब बहन झाँके तो उसके चेहरे पर भी गुलाबी मुस्कुराहट का छींटा सज उठें। यह तभी संभव है जब दोनों एक-दूसरे का मन ना दुखाने का संकल्प लें। कभी भूले से भी ऐसे कड़वे बोल जुबान पर ना आए कि हमेशा के लिए बहन या भाई का कलेजा बींध जाए।

जब त्योहार आए तो दुरियों के पूल पार ना किए जा सके, होंठों की मुस्कान की जगह आँखों से रिश्ते बहने लगें या नफरत का आवेग कोपभवन के दरवाजे ना खोलने दें। इस राखी का यही कहना है कि वचन दो भाई-बहन दोनों सदैव एक-दूसरे की मुस्कान का ख्याल रखोगे।

सम्मान की राखी : इस राखी के साथ बँधी शर्त हर छोटे-बड़े भाई-बहन के लिए है। लड़ना-झगड़ना, मार-पीट, रूठना-मनाना सब चलें मगर कभी भी अपमान और तिरस्कार के बोल जुबान पर ना आए। रिश्तों की पवित्रता, परिवार की गरिमा और परस्पर सम्मान का भाव लिए यह राखी वचन चाहती है कि कभी अकेले में भी बहन या भाई का मान घटाने वाली बात ना कहें। एकदूजे को चिढ़ाना-खिजाना यह शायद हर भाई-बहन के रिश्ते की अनिवार्यता है लेकिन इनका एक सुनिश्चित ग्राफ जरूरी है।

एक नाजुक सीमारेखा यहाँ बाँधना आवश्यक है। रंग,रूप, कमजोरी, असफलता, असमर्थता शारीरिक गठन आदि पर उस सीमा तक ही टिप्पणी उचित है जिस सीमा तक स्वयं बर्दाश्त की जा सकें। मजाक मखौल ना बनें और परिहास, क्रूर हास में परिवर्तित ना हो इसका ध्यान रहे। हम एकदूजे को समुचित आदर देंगे। दी‍जिए वचन इस राखी को बाँधते हुए, बँधाते हुए।

स्वतंत्रता की राखी : यह राखी आज के आधुनिक भाई-बहन के लिए विशेष रूप से बनवाई गई है। युवा होते भाई-बहन के बीच इस राखी ने अपनी अनिवार्यता सिद्ध की है। बहन के दोस्त और भाई की सहेलियाँ आपस में कितने किस हद तक स्वतंत्र रहें, इस राखी को बाँध कर तय करें। मजाक नहीं, इसे दूसरे शब्दों में समझें। भाई होने के नाते तुम्हारा ख्याल रखना मेरी जिम्मेदारी है लेकिन हर बात पर शक नहीं करना मेरे आधुनिक होने की सही निशानी है। मैं एक भाई होने के नाते तुम्हें इतनी स्वतंत्रता देता हूँ कि तुम अपने या मेरे दोस्तों के बीच से जीवनसाथी चुन कर लाओ तो मैं उस निर्णय का सम्मान कर सकूँ।

अगर मुझे लगता है कि तुम्हारा चयन गलत है तो बिना आपा खोए तुम्हारे नजरिए से फैसले को देखने का प्रयत्न करूँ। लेकिन अपने निर्णय, अपनी मर्जी तुम पर थोपने के बजाय तुम्हारी मर्जी, तुम्हारी खुशी को स्वीकार करने की कोशिश करूँ। बहन होने के नाते मैं वचन देती हूँ कि तुम्हारी मित्र-सखियों से सम्मान से पेश आऊँगी। हर लड़की के साथ तुम्हारा नाम जोड़ने के बजाय दोस्ती को सहजता से लूँगी।

हम एकदूजे को इतनी स्वतंत्रता देंगे कि अपनी जिन्दगी के सुनहरे युवा लम्हें खुशियों के साथ बटोर सकें। मनोरंजन की हर परिभाषा हम दोनों के लिए एक होगी। तो बढ़ाओ हाथ इस दमकती स्पेशल राखी के लिए।

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क्षमा की राखी : यह राखी आज के तेजी से बदलते युग में हर भाई की कलाई पर सजना आवश्यक है। साथ ही हर बहन की थाली में भी इसे चमकना होगा। यह राखी हर भाई-बहन को उसका मनुष्य होने का हक दिलाती है। हम सभी मानव है, हम सब से गलतियाँ संभव है। एक जरा सी फिसलन जीवन भर का दाग बन जाती है क्योंकि हम अभी दिमाग से उतने आधुनिक नहीं हुए हैं कि फिसलन को एक कमजोर लम्हा मान कर भूला सकें।

यह राखी चाहती है कि अगर किसी बहन से कुछ ऐसा हुआ है जो समाज के नियमों के खिलाफ है तो भी भाई उसे क्षमा कर सकें। अगर भाई रास्ते से भटक गया हो तो बहन उसे क्षमादान दे सकें। प्यार से लेकर क्षमा तक की इन राखियों का बँधन चिरस्थायी रहे, इस शुभ पर्व पर यही कामना है।

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