कविता 1 : भाई बिना बहना सावन की फुहारों में, राखी का है ये दिन। भाई बिना बहना, और बहना बिना भाई है अधूरा। आज के दिन बहना, आती है करने श्रृंगार। भाई की कलाई पर, प्यार से बांधे ये हार। ये धागा नहीं है कोई, ये...