रक्षा बंधन 2019 : इस बार भद्रा नहीं है अशुभ, जानिए राखी बांधने के खास मुहूर्त

* रक्षा बंधन के दिन भद्रा निवास 'पाताललोक' में, नहीं रहेगी अशुभ
 
किसी भी शुभ कार्य के मुहूर्त का निर्धारण करते समय 'भद्रा' का विशेष ध्यान रखा जाता है। पंचांग के 'विष्टि' करण को 'भद्रा' कहा जाता है। 'भद्रा' में शुभ कार्य करना निषिद्ध माना गया है। किंतु 'भद्रा' सदैव ही अशुभ नहीं होती। आइए जानते हैं कि 'भद्रा' कब विशेष अशुभ व हानिकारक होती है।
 
मृत्युलोक की 'भद्रा' विशेष अशुभ व हानिकारक : -
 
- यदि 'भद्रा' वाले दिन चंद्र कर्क, सिंह, कुंभ व मीन राशि में स्थित हो तो 'भद्रा' का निवास मृत्युलोक रहता है। मृत्युलोक की भद्रा विशेष अशुभ व हानिकारक मानी जाती है। इसमें सभी प्रकार के शुभकार्य वर्जित होते हैं'।
 
- यदि 'भद्रा' वाले दिन चंद्र मेष, वृष, मिथुन व वृश्चिक राशि में स्थित हो तो भद्रा का निवास (स्वर्गलोक) एवं भद्रा वाले दिन चंद्र कन्या, तुला, धनु व मकर राशि में स्थित हो तो भद्रा का निवास (पाताललोक) में रहता है। स्वर्गलोक एवं पाताललोक निवासरत भद्रा विशेष अशुभ नहीं होती।
 
- मध्यान्ह काल के उपरांत भद्रा विशेष अशुभ नहीं होती।
 
- शुक्ल पक्ष की चतुर्थी व एकादशी तथा कृष्ण पक्ष की तृतीया व दशमी तिथि वाली भद्रा दिन में शुभ होती है, केवल रात्रि में अशुभ होती है।
 
- शुक्ल पक्ष की अष्टमी व पूर्णिमा तथा कृष्ण पक्ष सप्तमी व चतुर्दशी तिथि वाली भद्रा रात्रि में शुभ होती है, केवल दिन में अशुभ होती है।
 
15 अगस्त को भद्रा का निवास 'पाताललोक' में रहेगा : -
 
रक्षा बंधन के दिन रात्रि 9 बजकर 15 मिनट तक चंद्र मकर राशि में रहेंगे। शास्त्रानुसार चंद्रमा के मकर राशिस्थ होने से भद्रा का निवास 'पाताललोक' रहेगा। 'पाताललोक' की भद्रा विशेष अशुभ नहीं मानीं जाती केवल मृत्युलोक की भद्रा ही विशेष अशुभ व निषिद्ध मानी जाती है। कुछ विद्वान भद्रा के प्रारंभ की 5 घड़ियों को ही अशुभ मानते हैं, मध्यान्ह काल के उपरांत भद्रा को विशेष अशुभ नहीं माना जाता।
 
रक्षा बंधन के शुभ मुहूर्त : -
 
मध्यान्ह काल- 12:00 बजे से 3:30 मिनट तक।
 
सायंकाल- 5:14 मिनट से 6:50 मिनट तक।
 
रात्रि- 6:50 मिनट से 8:15 मिनट तक।
 
-ज्योतिर्विद पं. हेमन्त रिछारिया
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केन्द्र
सम्पर्क: [email protected]

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